फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बैंकों में नहीं मिल रहा पर्याप्त कैश,

Fri, 25 Nov 2016 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला सिटी
विज्ञापन
लाोग
विज्ञापन
अंबाला कैंट। अब सारा मामला सरकार और बैंकों पर टिका है कि आने वाले महीने के शुरुआती दिन आम जनता के कैसे निकलते हैं। बैंक से कैश पूरा नहीं मिल रहा, बड़े नोट अधिकतर दुकानदार नहीं ले रहे, छोटे नोट एटीएम से कम निकल रहे हैं। आने वाले महीने के शुरुआती दिनों में यह परिस्थितियां परेशान कर सकती हैं।
विज्ञापन

नोटबंदी के 17वें दिन बेशक बैंकों के बाहर लाइन कम हो चुकी है या फिर खत्म है, लेकिन जनता अभी भी नगदी के लिए भटक रही है। अब इसी को लेकर माथापच्ची हो रही है कि आखिर आने वाले महीने का शुरुआती खर्च कैसे एडजस्ट करें। सबसे ज्यादा परेशानियां मजदूर वर्ग को है, जिनको अभी मजदूरी में पुराने नोट थमाए जा रहे हैं या फिर नई करेंसी या सौ रुपये से नीचे की करंसी के नोट के रूप में पूरी मजदूरी नहीं दी जा रही है।
यह कहते हैं लोग
कैंट के रहने वाले किशन कुमार, अजय गुप्ता, सुरेश वालिया, निर्मल कुमार, अशोक कुमार, प्रह्लाद, महेंद्र पासवान, जगदीश लाल का कहना है कि वे रोज दिहाड़ी पर जाते हैं और शाम को पुरानी करेंसी थमा दी जाती है या फिर एडजस्ट करते हुए थोड़ा रुपया रोक लिया जाता है। अब बच्चों की फीस है, सर्दियों की वर्दियां हैं, ट्यूशन फीस, घर का राशन जरूरी है, जबकि हर जगह या तो छोटी करेंसी देनी होगी या फिर दो हजार रुपये का नोट देते हैं, तो ज्यादा से ज्यादा सामान खरीदना होगा।
विज्ञापन

इस कारण से आ रही है परेशानी
- बैंकों में एटीएम पर कैश जल्द खत्म हो रहा है, जबकि बाद में नो कैश का बोर्ड टांग दिया जाता है
- बैंकों में तय सीमा में भी ग्राहकों को पूरा कैश नहीं दिया जा रहा है
- ग्रामीण बैंकों में तो लोग करेंसी को लेकर परेशान हैं, जबकि बैंक अपनी मजबूरी बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं
- बाजार में दुकानदार दो हजार रुपये का नोट लेने से परहेज कर रहे हैं
- लोगों के पास पांच सौ रुपये का नया नोट नहीं है, जबकि सौ या इससे छोटी करेंसी भी आसानी से उपलब्ध नहीं है
धीरे-धीरे स्थिति सामान्य हो रही है, जबकि बैंकों में कैश भी आ रहा है। एटीएम से भी अब कैश मिलना शुरू हो गया है और लोगों की लाइनें भी कम हो चुकी हैं। अब कुछ ही दिनों में सारी व्यवस्था दुरुस्त हो जाएगी। इसके बाद परेशानी नहीं होगी।
- नरेश सिंगला, लीड बैंक मैनेजर, अंबाला
उधार से सहारे दुकानदारी, सिर्फ दाल रोटी जारी
-दुकानदार और ग्राहक दोनों परेशान, आखिरकार कहां से लाएं पैसा
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। नोटबंदी के फैसला अब आम जनता और किराना दुकानदारों के लिए गले की फांस बन चुका है। एक ओर जहां बैंकों में नोटों की किल्लत से आम जनता परेशान है, वहीं किराना कारोबार भी ग्राहकों के अभाव से बुरी तरह से प्रभावित होता जा रहा है। दुकानदारों के अनुसार हालत इस कदर बिगड़ चुके हैं कि दुकानदारी से दाल-रोटी चलाना भी मुश्किल हो रहा है। जबकि उधार के सहारे ही अपने काम को धकेला जा रहा है। ताकि जब हालात सामान्य होंगे तो वह काम चला सकेंगे।
छोटी करेंसी की किल्लत से कारोबार लगातार गिरता जा रहा है। ग्राहक केवल नई करेंसी में दो हजार के नोट व पुरानी करेंसी ला रहे। इसके बदले खुले नोटों की जबरदस्त कमी होने के कारण  उन्हें लौटा जा रहा है। अगर बाजार में नई करेंसी में छोटे नोट वितरित होते हैं तो हालत बदल सकते हैं।
-अतिम जैन, किराना कारोबारी
महीने की अंतिम तिथि पर राशन की मांग बढ़ जाती है। अभी तक ग्राहक नोटों की किल्लत में ही उलझे हुए हैं तो कैसे कारोबार होगा। केवल कुछ लोग सामान खरीद रहे हैं। उन्हें भी मजबूरन छोटे नोटों की किल्लत के कारण उधार पर सामान दिया जा रहा है। ये काफी परेशानी खड़ी कर रहा है।
-अंकित गुप्ता, किराना कारोबारी
बैंक न तो ग्राहकों को खुले पैसे दे रहे हैं और न ही दुकानदारों को। भला ऐसे में कैसे दुकानदारी संभव है। जो भी ग्राहक आता सामान खरीदने के लिए पहुंचता है तो बड़े नोट ही लाता है। ऐसे में छोटे नोटों की व्यवस्था करना असंभव सा हो रहा है। इस कारण दुकानदारी पूरी तरह से गड़बड़ा रही है।  
-राजीव गौतम, किराना कारोबारी
ये महीना खत्म होने को है और घर में भी राशन की किल्लत आ रही है। लेकिन वह नई करेंसी लेकर दुकान पर पहुंचते हैं तो उन्हें लौटा दिया जाता। बैंक भी अब तो नई करेंसी हाथ में थमा देते है।ं भला नई करेंसी का सामान खरीद लिया तो अन्य खर्च कैसे पूरा करेंगे।
-बंसी लाल, ग्राहक
सामान की जरूरत भी है और छोटी करेंसी भी नहीं है। ये तो सरकार को सोचना चाहिए था कि वह पूरी योजना से काम करें। लेकिन अब राशन लेना भी परेशानी बन चुका है। केवल उधार मांगकर ही सामान से छोटा-मोटा सामान खरीद रहे हैं।
विज्ञापन

-शिव प्रसाद, ग्राहक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें