अंबाला। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर कई महिलाएं अपनी आजीविका चला रही हैंं। यह महिलाएं अपने और अपने परिवार का पालन पोषण भी कर रही हैं।
इनमें अंबाला शहर के नन्याैला गांव निवासी बुजुर्ग महिला बलबीरो देवी एक ऐसी मिसाल हैं। जो खाट बनाना, पीढ़ी बनाना, बुनाई और सिलाई के काम में माहिर होने के बाद भी मजदूरी करने को मजबूर थीं। इस बुजुर्ग महिला ने 12 रुपये से मजदूरी शुरू की और 250 रुपये तक मजदूरी का काम किया।
इसके बाद बलबीरो देवी हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपने काम का हुनर दिखाया। अब बलबीरो युवाओं काे पीढ़ी बनाना, खाट बनाना और बुनाई का काम सिखा रही हैं। वह अब तक करीब 90 महिलाओं को काम सिखा चुकी हैं। बलबीरो देवी के तैयार किए खाट और पीढ़ी की सबसे ज्यादा मांग उत्तर प्रदेश में है। वहीं अंबाला के थोक व्रिकेता वीरो देवी से मंजे और पीढ़ी खरीदकर उत्तर प्रदेश में बेचते हैं। इसके अलावा यह सामान पंचकूला, कुरूक्षेत्र, चंडीगढ़ व अन्य जिलों में लगने वाले मेलों में भी जाती हैं।
मम्मी और ताया से सीखा ये काम
बलबीरो देवी के अनुसार जब वह 13 साल की थी तब उनकी माता जूनी और ताऊजी जूना, खाट और पीढ़ी बनाने का काम करते थे। इन्हें देखकर बलबीरो के मन में काम करने की इच्छा जागी। इसके बाद उन्होंने मम्मी और ताया से मंजा, पीढ़ी बनाना सीखा। इसके साथ ही उन्हाेंने कपड़ों की सिलाई और दरी बनाना सीख लिया।
मजदूरी के मिलते थे 12 से 250 रुपये
बलबीरो देवी बताती हैं कि उनकी पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसके बाद उन्होंने मजदूरी करनी शुरू कर दी। उस दौरान उन्हें 12 रुपये मजदूरी मिलती थी। इसके बाद धीरे धीरे समय बदला और मजदूरी 250 रुपये हो गई। तब तक भी वह मजदूरी करती रहीं। इसके बाद हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के उपकार ग्रुप से जुड़ने के बाद बीरो देवी की आर्थिक स्थिति बदल गई। इस ग्रुप में 13 महिलाएं हैं। अपने ग्रुप के अन्य ग्रुप की महिलाओं को भी काम सिखा दिया। बीरो देवी ने अपने पति को प्लास्टिक के सामान की दुकान खुलवा दी।
अपने द्वारा बनाई पीढ़ी दिखाते हुए बलबीरो देवी। स्वयं