अंबाला। अटल कैंसर केयर केंद्र पिछले ढाई साल बाद भी विशेषज्ञों डॉक्टरों की कमी को पूरा नहीं कर पाया है। यहां पर हरियाणा, पंजाब, हिमाचल सहित अन्य राज्यों के कैंसर मरीजों का इलाज होता है। इस अस्पताल में अभी तक ब्लड कैंसर के लिए कोई संबंधित विशेषज्ञ ऑन्कोलॉजिस्ट तक नहीं मिल सका है। जबकि यह सबसे घातक कैंसर में से एक होता है। अस्पताल की दूसरे विशेषज्ञ द्वारा 15-15 घंटे कैंसर का ऑपरेशन चलने का प्रचार सुनकर दूसरे राज्यों से भी मरीज यहां पहुंचते हैं लेकिन उन्हें मजबूरन चंडीगढ़ या फिर रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया जाता है। जबकि निजी अस्पतालों में ब्लड कैंसर के मरीजों को उपचार के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
रेडियो, मेडिकल न सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट सहित 11 का चल रहा इंतजार
कैंसर के मरीजों को बेहतर उपचार देने के लिए अस्पताल प्रबंधन की तरफ से ब्लड ऑन्कोलॉजिस्ट के अलावा 12 अन्य की भी डिमांड भेजी गई है। इनमें डॉक्टरों सहित टेक्नीकल स्टाफ है। इनमें 2 रेडियो ऑन्कोलॉजिस्ट, 2 सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, 2 मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, 2 रेडिएशन सेफ्टी ऑफिसर व 3 रेडिएशन थेरेपी टेक्नोलॉजिस्ट शामिल है। विभाग की तरफ से विज्ञापन भी निकाला गया था। बावजूद अभी तक कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है।
चंडीगढ़ व रोहतक में मिली है लंबी-लंबी डेट, इसलिए अंबाला में रुझान अधिक
कैंसर के मरीजों का रोहतक व चंडीगढ़ पीजीआई में भी उपचार है लेकिन वहां पर मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण लंबी-लंबी डेट मिल रही है। ऐसे में अधिकतर मरीज दवाओं के सहारे हैं। इसलिए जल्द व बेहतर उपचार के लिए हरियाणा के अलावा राजस्थान, बिहार, हिमाचल आदि से भी मरीज इस अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचते हैं। यहां आकर पता चलता है कि ब्लड विशेषज्ञ ही नहीं है।
छोड़ गए थे न्यूरो सर्जन व बेहोशी की डॉक्टर
मस्तिष्क व रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानियों के उपचार के लिए अटल कैंसर केयर केंद्र में मरीजों को भटकना पड़ रहा है। अप्रैल 2025 में ही लंबे समय से कार्य कर रहे न्यूरो सर्जन डॉ. कार्तिक नांदरा का अनुबंध खत्म हो गया था। उनकी तरफ से उसे आगे नहीं बढ़ाया गया है। इसके अलावा अटल कैंसर केयर केंद्र की ऑपरेशन थियेटर से बेहोशी की डॉक्टर अनु भी छोड़ गई थी। उनका भी पद खाली पड़ा है।
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अटल कैंसर केयर केंद्र में ब्लड कैंसर सहित अन्य विशेषज्ञ के लिए मुख्यालय डिमांड भेजी गई है। जल्द ही ब्लड कैंसर ऑन्कोलॉजिस्ट को रखने के लिए विचार किया जा रहा है। ताकि अस्पताल में आने वाले कैंसर के मरीजों को राहत मिल सके।
डॉ. जतिंद्र, आरएमओ, कैंट नागरिक अस्पताल