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चार अफसरों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी

Tue, 18 Aug 2015 12:35 AM IST
अंबाला/ब्यूरो
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कैंट के सुभाष कालोनी में सड़क निर्माण को लेकर की गई धांधली के मामले में म्यूनिसिपनल कारपोरेशन अंबाला (एमसीए) के म्यूनिसिपल इंजीनियर (एमई), जूनियर इंजीनियर (जेई), एक्सईएन और रिटायर्ड एक्सईएन (टेक्निकल एडवाइजर) के खिलाफ कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए हैं।
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कैंट पुलिस अपनी जांच में इन चारों को शामिल करना चाहती है। इनके खिलाफ पुलिस विगत दिनों केस भी दर्ज कर चुकी है और अब पुलिस को चारों की तलाश है।

पुलिस ने इन चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई जगह छापे मारे, मगर चारों आरोपी अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। इसी के चलते पुलिस ने अब कोर्ट से चारों आरोपियों के गिरफ्तारी वारंट जारी करवा लिए हैं। अंबाला कैंट पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को काबू किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस फर्जीवाड़े की जांच के लिए एसीपी हितेश यादव की अध्यक्षता में स्पेशल कमेटी गठित है।


एमई, जेई को पुलिस जांच में शामिल होने के आदेश
अदालत से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद एमई  और जेई  ने अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगाई। लेकिन अदालत ने अब इस दोनों अफसरों की जमानत याचिका पर सुनवाई करने से पहले दोनों अफसरों को अदेश दे दिया है कि पहले वे जाकर  पुलिस की जांच में सहयोग करें।
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अदालत ने उन्हे 31 अगस्त तक पुलिस के समक्ष पेश होकर जांच में सहयोग करने के आदेश दिए हैं। उसके बाद पुलिस अपनी स्टेट्स रिपोर्ट अदालत में पेश करेगी, उसके बाद अदालत यह तय करेगी कि आरोपियों को जमानत दी जानी है या नहीं? उल्लेखनीय है कि इस धांधलेबाजी में एसीपी हितेश यादव की जांच के बाद एससीए के तत्कालीन एक्सईएन मनीराम, जेई अनिल कुमार, एमई संदीप राज व रिटायर्ड एक्सईएन एवं टेक्निकल एडवाइज आरके गुप्ता को भी आरोपी बनाया गया है। 

जबकि इसी मामले में एमसीए के एक जेई व ठेकेदार के खिलाफ पहले ही केस दर्ज हो चुका था। इस मामले में पुलिस ने सबसे पहले जेई महेंद्रपाल व ठेकेदार करनैल सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया था। इनमें से जेई को पुलिस काबू कर चुकी है। अब पिछले दिनों ठेकेदार ने भी सरेंडर कर दिया है। फिलहाल चार अफसर एमई, जेई, एक्सईएन व टेक्निकल एडवाइजर पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं।


धांधली का मामला
सुभाष कालोनी में हाऊस नंबर 145 से 180 तक इंटरलॉकिंग टाइल से सड़क बनाई जानी थी। इसके लिए करीब छह लाख रुपए का ठेका कांट्रेक्टर को दिया गया था। लेकिन निगम के कुछ अफसरों ने मिलीभगत कर संबंधित ठेकेदार से सड़क निर्माण की साइट ही चेंज करवा दी।

मगर कागजों में संबंधित सड़क बनी हुई दिखा दी गई। इस मामले की शिकायत होने पर जब म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन अंबाला (एमसीए) के अधिकारियों ने साइट को विजिट किया तो धांधलेबाजी का खुलासा हुआ। तब मौके पर गए अधिकारियों ने एमसीए कमिश्नर को इसकी जानकारी दी।  उसके बाद एमसीए कमिश्नर शक्ति सिंह की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करवाया गया था।


एक पार्षद की भूमिका भी संदेह के घेरे में
इस पूरी धांधली में अंबाला कैंट के एक पार्षद की भूमिका भी संदेह के घेरे में हैं। क्योंकि धांधलेबाजी के दस्तावेजों में काम पूरा होने के बाद ठेकेदार को पेमेंट करने के लिए पार्षद ने ही बतौर जनप्रतिनिधि अपने हस्ताक्षर दस्तावेजों पर किए थे। पुलिस अब इस ओर भी जांच कर रही है कि आखिरकार पार्षद ने गलत सड़क बनने पर बिना जांच किए क्यों ठेेकेदार को पेमेंट करने के लिए दस्तावेजों पर तसदीक की।



इस सड़क निर्माण की धांधली में तत्कालीन एक्सईएन मनीराम, जेई अनिल कुमार, एमई संदीप राज व रिटायर्ड एक्सईएन एवं टेक्निकल एडवाइज आरके गुप्ता की संलिप्तता पाई गई थी, तभी उन्हें आरोपी बनाते हुए उनके गिरफ्तारी वारंट जारी करवाए गए हैं। मगर इनमें से एमई और जेई द्वारा अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने पर अदालत ने दोनों को पहले पुलिस जांच में शामिल होने के आदेश दिए हैं। पुलिस अब दोनों अफसरों की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है, उसके बाद स्टेटस रिपोर्ट अदालत को देगी।
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-हितेश यादव, एसीपी हेडक्वार्टर, अंबाला
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