इंडियन आर्मी आए दिन अत्याधुनिक हथियारों से अपने तोपखाना को अपग्रेड कर रही है। लेकिन एक तोप ऐसी भी है, जिस पर आज तक इंडियन आर्मी का भरोसा कायम है।
ये तोप है 130 एमएमएम-46 रशियन फील्ड गन। रूस से ली गई ये तोप आज 47 साल बाद भी इंडियन आर्मी की बड़ी ताकत बनी हुई है।
सिटी के सेक्टर दस स्टेडियम में आयोजित आर्मी मेले में इस तोप को विशेष तौर पर बोफोर्स के साथ प्रदर्शित किया गया और ये तोप वहां दर्शकों की मुख्य आकर्षण का केंद्र भी रही। क्योंकि ये तोप 1971 में भारत-पाक युद्ध में, उसके बाद कारगिल में, फिर आपरेशन विजय व आपरेशन पराक्रम में अपना दमखम दिखा चुकी है।
इसी बेमिसाल परफोरमेंस की वजह से ही इंडियन आर्मी में इस तोप को मास्टर गन कहा जाता है। आर्मी के गनर प्रमोद कुमार बताते हैं कि सन 1968 में इस तोप को रूस से मंगवाया गया था, उसके बाद से ये लगातार आज तक इंडियन आर्मी में बनी हुई है।
इसमें 33.4 किलो का गोला बारूद इस्तेमाल होता है और इसकी मारक क्षमता 27490 मीटर तक है। जबकि जिस भी टारगेट पर इसका गोला गिरता है, वहां 55 मीटर व्यास क्षेत्र पूरी तरह तबाह हो जाता है।
हर तरह की परस्थितियों में ये तोप अपनी परफोरमेंस के लिए तैयार रहती है और नौ क्रू सदस्यों की मदद में हर एक मिनट में ये तोप 2 राउंड फायर करती है। दुश्मनों में आज भी इस गन की पूरी दहशत बरकरार है।
उनके अनुसार खास बात यह कि इस तोप में आज तक कोई शिकायत ही नहीं आई, जबकि अमूमन हथियारों व तोपों में किसी तकनीकी दिक्कत की वजह से उनके विशेषज्ञों को आर्मी बुलवाती रहती है। मगर इस तोप ने आज तक कोई खास दिक्कत नहीं दी।
समरच ने बढ़ाई सेना की ताकत
विगत वर्ष इंडियन आर्मी ने रूस से हैवी मारक क्षमता वाले राकेट लांचर समरच मंगवाया है। ये राकेट लांचर चलने पर 1100 डिग्री हीट पैदा करता है और इसमें 300 एमएम का 8.5 मीटर का गोला डलता है।
20 से 90 किलोमीटर की मारक क्षमता वाला ये राकेट लांचर 40 सैकेंड में 12 फायर करता है। जिस भी टारगेट पर ये राकेट लांचर गिरता है, वहां 800 मीटर व्यास क्षेत्र को पूरी तरह तबाह कर देता है।
इससे पहले आर्मी के पास 122.4 एमएम सेल्फ प्रोपेल्ड मल्टी बैरल राकेट लांचर बीएम-21 ग्राड मौजूद है। मगर समरच के आने के बाद इंडियन सेना की ताकत और बढ़ गई है।
सेना की ताकत ने किया रोमांचित
इसी तरह से सेना ने इस मेले में अपने उन उपकरणों व हथियारों को भी सहेजकर रखा हुआ था, जो पहले से ही सेना के पास मौजूद है। इनमें टैंक, गन, प्लाइंग लांचर, स्ट्रेना टेनम, फ्लाई कैचर वैपन कंट्रोल सिस्टम, सिगनल सिस्टम, राडार सिस्टम इत्यादि शामिल रहे।
मेले में आए मनीष शर्मा, अंकुल गोयल, लवली, चरणजीत सिंह, आरएस विर्क व रमनदीप विर्क के अनुसार ये आर्मी मेला बहुत ही ज्ञानवर्धक रहा, उनके अनुसार आर्मी को इस तरह के मेलों का आयोजन किए जाता रहना चाहिए। ताकि युवाओं में आर्मी के प्रति लगाव बढ़े।