अंबाला। त्योहार पर घर जाने की चाहत यात्रियों के सिर चढ़कर बोल रही है। उन्हें यह भी ध्यान नहीं रहता कि वो तैश में आकर रेलवे संपत्ति का नुकसान कर रहे हैं। ऐसा ही वाक्य रविवार को अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म तीन पर देखने को मिला, जब जालंधर से चलकर सहरसा जाने वाली अंत्योदय एक्सप्रेस प्लेटफार्म पर पहुंची।
जनरल टिकट लेकर घंटों ट्रेन के इंतजार में खड़े यात्रियाें को जब कोच के दरवाजे बंद नजर आए तो उनकी हिम्मत जवाब दे गई और उन्होंने अंदर बैठे यात्रियों से आग्रह किया कि वो कोच का दरवाजा खोल दें, लेकिन अंदर बैठे यात्रियों ने इसे अनसुना कर दिया। ट्रेन के चलने की आवाज जैसे ही इंजन के माध्यम से मिली तो यात्रियों ने दरवाजे को पीटना शुरु कर दिया और इस दौरान एक यात्री ने अपने सामान से लोहे की रॉड निकालकर कोच के दरवाजे पर दे मारी और शीशे को तोड़ दिया।
अंदर बैठे यात्रियों ने भी विरोध स्वरूप शीश तोड़ने वाले यात्रियों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। गनीमत रही कि इसी दौरान कुछ कुली मौके पर पहुंच गए और उन्होंने टूटे कांच के अंदर हाथ डालकर कोच का दरवाजा खोल दिया। इसके बाद सभी यात्री कोच में सवार हो गए। लेकिन इस घटना की जानकारी रेलवे स्टेशन पर तैनात किसी भी अधिकारी, कर्मचारी व सुरक्षा एजेंसी से जुड़े लोगों को नहीं लगी।
गनीमत रही कि कुली मौके पर पहुंच गए और उन्होंने मामला शांत करवा दिया, अन्यथा यात्रियों में मारपीट से इंकार नहीं किया जा सकता था। यह मामला रेलवे की अव्यवस्थाओं से जुड़ा है जोकि विभागीय निर्देशों की पालना करने में नाकाम नजर आ रहे हैं और इसका खामियाजा रेल टिकट लेने के बाद भी यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।
वर्जन
ऐसा कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है, जानकारी लेने के बाद ही कुछ बता सकता हूंं। त्योहारों को लेकर विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों सहित आरपीएफ को जिम्मेदारी सौंपी गई है। अगर कुछ गलत हुआ है तो रिपोर्ट मंगवाकर कार्रवाई की जाएगी।
एमएस भाटिया, डीआरएम अंबाला।