अंबाला। रेलवे अस्पताल में एक नेत्र चिकित्सक के सहारे कर्मचारियों और उनके परिजनों की आंखों का उपचार हो रहा है। घंटों इंतजार के बाद उनका नंबर आता है। ऐसे में उन्हें मानसिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे ज्यादा परेशानी उन कर्मचारियों के लिए है, जिन्हें ट्रेन संचालन के लिए मेडिकल उसी दिन विभाग को देना होता है। ऐसे में उनका इंतजार लंबा होता जा रहा है। दूसरी बड़ी परेशानी सप्ताह के एक दिन जांच की है जोकि नेत्र चिकित्सक द्वारा सप्ताह के प्रत्येक बुधवार को की जाती है। ऐसे में मरीजों की संख्या काफी अधिक हो जाती है।
मजबूरन उन्हें एक नेत्र चिकित्सक के सहारे ही अपना उपचार करवाने का इंतजार करना पड़ता है। पूर्व रेल कर्मी अशोक कुमार, विपिन कुमार, जसबीर सिंह आदि ने बताया कि सप्ताह में एक दिन की ओपीडी से हालात बिगड़ रहे हैं। अगर इसे बढ़ा दिया जाए तो हालात सुधर सकते हैं या फिर एक की जगह दो विशेषज्ञ रखे जाएं ताकि लोगों को घंटों इंतजार न करना पड़े। उन्हाेंने बताया कि मंडल का यह सबसे बड़ा और प्रमुख अस्पताल है, इसलिए किसी भी उपचार के लिए पहले यहीं आना पड़ता है।
यहां रोजाना बठिंडा, कालका, यमुनानगर आदि क्षेत्रों से रेल कर्मी व परिजन आते हैं जोकि सुबह से शाम तक उपचार के लिए बैठे रहते हैं। लंबी लाइनों के कारण कर्मचारियों व परिजनों की परेशानी काफी बढ़ जाती है। वहीं कुर्सियों की संख्या भी नाममात्र है, ऐसे में मरीजों को फर्श पर बैठकर अपनी बारी के आने का इंतजार करना पड़ता है।
वर्जन
मामला संज्ञान में आया है। इस समस्या का समाधान किया जाएगा, जिससे कि रेल कर्मचारियों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
मंदीप सिंह भाटिया, डीआरएम अंबाला।