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रचनात्मक शहरों में से एक है अंबाला : डॉ. माधव

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अंबाला। राष्ट्रीय साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक लिटरेरिया साहित्य महोत्सव में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने अमर उजाला से बात करते हुए अंबाला के साहित्यकारों को याद किया।
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उन्होंने कहा कि अंबाला उत्तर भारत के सबसे रचनात्मक शहरों में से एक रहा है। यहां ऊर्दू, पंजाबी, अंग्रेजी और हिंदी भाषा के बड़े मूर्धन्य लेखक रहे हैं। इस साहित्य महोत्सव से नासिर काजमी, स्वदेश दीपक और राकेश वत्स की आत्मा भी काफी प्रसन्न हुई होगी। कुछ दिन पहले अंबाला की डॉ. पाल को साहित्य अकादमी का पुरस्कार मिला।
हरियाणा को 70 साल बाद इस प्रकार के कार्यक्रम की उपलब्धि हासिल हुई है। इस पर पूरे अंबाला को साधूवाद देने की जरूरत है। जिस शहर में ऐसे बड़े साहित्यकार हुए वहां पर साहित्यिक संस्थाएं फलती फूलती हैं और नई पीढ़ी को एक नई दिशा देने का यही एक तरीका है। इन्हीं बच्चों में से आगे चलकर साहित्यकार बनते हैं।
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उत्तर भारत में भी बढ़ रहे साहित्य महोत्सव जैसे कार्यक्रम

इस प्रकार के साहित्य महोत्सव लंबे समय में किस प्रकार का प्रभाव छोड़ते हैं, इस प्रश्न पर डॉ कौशिक: ऐसे साहित्य महोत्सव का लंबे समय तक प्रभाव दिखता है। भारत के बहुत से हिस्से हैं, खासतौर पर दक्षिण भारत और बंगाल जहां ऐसे आयोजन होते रहते हैं वहीं से साहित्यिक प्रतिभाएं सामने आती रहती हैं। उत्तर भारत में हाल ही में इस प्रकार के महोत्सव होने शुरू हुए हैं, यही कारण है कि दक्षिण भारतीय साहित्य अधिक समृद्ध दिखाई देता है। उत्तर भारत में चंडीगढ़, अंबाला व अन्य शहरों में भी शुरू हुआ है। वहीं उत्तर भारत में साहित्य महोत्सवों को लंबा समय लगा इसका क्या कारण मानते हैं, इस प्रश्न पर डॉ कौशिक ने कहा कि कोई बात नहीं, देर आए दुरुस्त आए। इसमें सबसे बड़ी भूमिका मीडिया की है। ऐसे आयोजन समाज में अधिक पहुंचेंगे तो साल में एक बार आयोजित होने वाले कार्यक्रम कई बार होगा। वहीं उन्होंने युवाओं को साहित्य की तरफ बढ़ाने के प्रश्न पर बताया कि साहित्य अकादमी युवाओं को आगे लेकर चल रही है।
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