पहली बार अंबाला रेल मंडल के अंतर्गत करोड़ों रुपये की लागत से डबल डेकर ट्रेनों को मद्देनजर इलेक्ट्रिक ट्रैक तैयार किए जाएंगे। ये ट्रैक तीन विभिन्न परियोजनाओं के अंतर्गत बनाए जाएंगे। अभी इन पर डीजल इंजन से ट्रेनें चलती हैं।
मिनिस्ट्री ऑफ रेलवे ने इस परियोजनाओं की जिम्मेदारी रेलवे की ही रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) इकाई को सौंपी है। आरवीएनएल ने परियोजना का खाका तैयार कर लिया है प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये प्रोजेक्ट तीन अलग-अलग चरणों में पूरा होगा। इसकी कुल प्रस्तावित लागत करीबन 415 करोड़ होगी। इससे रेलवे को भी अच्छी आय होगी और यात्रियों को भी बड़ा फायदा होगा।
ये है खास परियोजनाएं
पहले प्रोजेक्ट के तहत अंबाला रेल मंडल के अंतर्गत अंबाला से वाया बठिंडा पूरा ट्रैक इलेक्ट्रिक कर दिया जाएगा। अंबाला से राजपुरा पहले ही इलेक्ट्रिक है, लेकिन अब राजपुरा से वाया पटियाला, धुरी, नाभा से बठिंडा (148.22 कि.मी.) ट्रैक पर स्पेशल तरह की ओएचई (ओवर हेड इलेक्ट्रिक) लगाई जाएगी। इस प्रोजेक्ट को बिजली सप्लाई देने के लिए धबलाना व हडियाया स्टेशन पर दो बड़े बिजली के सबस्टेशन बनाए जाएंगे। जबकि पटियाला व बठिंडा में मेंटेनेंस डिपो बनेगा। इस प्रोजेक्ट का प्रस्तावित बजट करीबन 187.22 करोड़ रखा गया है।
दूसरे प्रोजेक्ट के अंतर्गत लुधियाना से धुरी (123 कि.मी.) तक भी ट्रैक को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक बनाया जा रहा है। इसके लिए प्रस्तावित बजट करीबन 150 करोड़ रहेगा। जबकि तीसरा प्रोजेक्ट के अंतर्गत धुरी से वाया जाखल से हिसार (79 कि.मी.) ट्रैक को भी इलेक्ट्रिक होगा। इसके लिए बिजली सप्लाई के लिए उकलाना और कुप स्टेशन पर सब स्टेशन बनेगा, जबकि मेंटेनेंस डिपो उकलाना और धुरी में बनेगा। तीसरी परियोजना के लिए प्रस्तावित बजट लगभग 78.12 करोड़ रहेगा।
डबल डेकर ट्रेनों के लिए सहायक होंगे ट्रैक
आरवीएनएल को सौंपी गई परियोजना में सबसे खास बात यह रहेगी कि ये इकाई अंबाला मंडल के तीनों परियोजना के तहत ट्रैकों को इस टेक्निक से इलेक्ट्रिक बनाएगी कि ये ट्रैक भविष्य में चलने वाली डबल डेकर ट्रेनों में भी सहायक होंगे। इसके लिए हाई रिस्क पोल लगेंगे। यानी ट्रैक को इलेक्ट्रिक करने के लिए 9.5 मीटर पर लगने वाले पोल 11.4 मीटर के होंगे। खास बात यह कि ट्रेनों के हिसाब से अभी तो इन पर लगने वाली सेंटीलीवर असेंबली 9.5 मीटर पर सेट की जाएगी, बाद में यदि डबल डेकर ट्रेनें चलती है तो इसे असेंबली को शिफ्ट कर 11.4 मीटर पर दिया जाएगा। रेलवे को ऐसी स्थिति में नए पोल लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। देश में पहली बार अंबाला मंडल में ही डबल डेकर ट्रेनों को ध्यान में रखते हुए इन ट्रैकों को इलेक्ट्रिक किया जा रहा है। रेलवे अफसर इसे बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं।
इस तरह से होगा यात्रियों, रेल को फायदा
इस परियोजना से यात्रियों व रेल को बड़ा फायदा होगा। उनके अनुसार इन ट्रैकों पर अभी तक चूंकि डीजल इंजन से ट्रेनें चलती थी, लेकिन अब इलेक्ट्रिक ट्रैक की वजह से ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी और यात्रियों का काफी समय बचेगा, जो यात्रा में व्यतीत होता था। अपने गंतव्य तक पहुंचने में कम समय लगने से इस रूट पर रेल यात्रियों की संख्या भी बढ़ेगी।
-दिनेश कुमार, डीआरएम, अंबाला मंडल
ये बहुत महत्वाकांक्षी परियोजनाएं हैं, जो डबल डेकर ट्रेनों को ध्यान में रखकर पहली बार तैयार की गई है। इस परियोजना से अपग्रेडेशन तो होगा, साथ ही डीजल इंजन बंद होने से पर्यावरण में भी कुछ हद तक सुधार होगा। जल्द ही इन परियोजनाओं पर काम शुरू होगा और यात्रियों व रेलवे दोनों को फायदा होगा।
-आरएन राजपूर, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर, आरवीएनएल