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Ambala News: व्हाट्सएप पर फर्जी चेक की फोटो दिखा अंबाला की कंपनी से 7.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी

Tue, 14 Jul 2026 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
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संवाद न्यूज एजेंसी
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साहा। इंडस्ट्रियल एरिया साहा स्थित संगमेश्वर इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से फर्जी चेक के झांसे में लेकर करीब साढ़े सात लाख रुपये की धोखाधड़ी हो गई। आरोप है कि जालंधर की एक फर्म के मालिक ने भुगतान के नाम पर पहले ओवर राइटिंग किए हुए फर्जी चेक की फोटो व्हाट्सएप पर भेजी व माल डिलीवर होते ही मुकर गया। आर्थिक अपराध शाखा की गहन जांच के बाद अंबाला के साहा थाना पुलिस ने कंपनी के निदेशक राकेश अग्रवाल की तहरीर पर आरोपी फर्म मालिक नरेंद्र पर प्राथमिकी दर्ज कर ली। यह कार्रवाई क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट धारा 316(2), धोखाधड़ी 318(4), गाली-गलौज 352 की धाराओं के तहत की।

परचेज ऑर्डर देकर जाल में फंसाया
साहा एचएसआईआईडीसी स्थित संगमेश्वर इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक राकेश अग्रवाल ने बताया कि जालंधर के निजातम नगर में एडी सर्जिकलर्स के मालिक निवासी नरेंद्र सिंह ने उनकी कंपनी से संपर्क किया था। आरोपी ने 29 अगस्त 2025 को कंपनी को 6 लाख 92 हजार 909 रुपये का एक परचेज ऑर्डर दिया। इसके बाद कंपनी ने दो अलग-अलग बिलों के तहत कुल 7 लाख 50 हजार 652 रुपये का माल तैयार किया। आरोपी ने शातिराना चाल चलते हुए भुगतान के रूप में एक बैंक चेक तैयार किया, जिसमें ओवर राइटिंग की गई थी। उसने उस फर्जी चेक की फोटो व्हाट्सएप के जरिए कंपनी को भेजी और विश्वास दिलाया कि भुगतान प्रक्रिया में है। चेक की फोटो देखकर कंपनी ने भरोसा कर लिया और आरोपी के कहे अनुसार गाड़ी के जरिए माल की डिलीवरी उसके नोएडा सेक्टर-62 स्थित पते पर भेज दी थी।
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माल मिलने के बाद दी गालियां

पीड़ित निदेशक राकेश अग्रवाल ने बताया कि नोएडा में माल की डिलीवरी सुरक्षित पहुंच जाने के बाद आरोपी नरेंद्र सिंह बदल गया था। उसने कंपनी को भुगतान करने से साफ इनकार कर दिया और फोन उठाना बंद कर दिया। जब कंपनी के अधिकारियों ने व्हाट्सएप पर संपर्क किया तो आरोपी ने उनके साथ जमकर गाली-गलौज की और अपशब्द कहे। थक-हारकर पीड़ित कंपनी ने इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच प्रभारी आर्थिक अपराध शाखा जिला अंबाला को सौंपी गई थी। ईओडब्ल्यू ने जब आरोपी की व्हाट्सएप चैटिंग और बैंक दस्तावेजों को खंगाला तो धोखाधड़ी का पता चला।
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