अंबाला छावनी के नजदीक स्लम क्षेत्र के बच्चों को पढाते इद्रीश फाउंडेशन के सदस्य। फाउंडेशन
अंबाला। मन में कुछ करने का जज्बा हो तो वो फिर अड़चनें भी कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं। अंबाला छावनी की रहने वाली नेहा प्रवीण ने ऐसी ही मुश्किलों का सामना करते हुए वह मुकाम हासिल किया है जो अब लोगों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन गया है। नेहा प्रवीण ने रेलवे चाइल्ड लाइन समन्वयक के तौर पर कार्य करते हुए जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई का बीड़ा उठाया और नौकरी छोड़कर इद्रीश फाउंडेशन का गठन किया जोकि आज क समय 35 से 40 के करीब स्थाई और 50 से 60 अस्थाई सदस्यों के साथ जनहित के कार्य में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
शिक्षित हो समाज
नेहा प्रवीण ने बताया कि उनके जीवन का एक ही मकसद है कि कोई भी बच्चा अशिक्षित न रहे क्योंकि अगर समाज शिक्षित होगा तो लोगों के मन में जो अवधारणाएं बनती हैं वो खत्म हो जाएंगी और वह भी समाज की मुख्य धारा से जुड़कर जनहित के कार्यों को करने में संकोच नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि उनका संगठन 300 के करीब बच्चों को शिक्षित कर चुका है और 40 के करीब गरीब बच्चे उन्होंने गोद लिए हैं, उनकी शिक्षा आदि का प्रबंध वह जनमानस के सहयोग से कर रहे हैं।
जनहित कार्याें में पूर्ण सहयोग
इद्रीश फाउंडेशन की ओर से जनहित कार्य, इसमें सड़क सुरक्षा, साक्षरता, स्वच्छता आदि को लेकर भी लगातार सहयोग किया जा रहा है। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण के लिए भी पौधरोपण की मुहिम चलाई जाती है, वहीं स्लम क्षेत्रों में जाकर अभिभावकों को बाल मजदूरी न करवाने और बच्चों को शिक्षित करने के लिए भी अभियान चलाया जाता है जोकि काफी हद तक सफल भी हो रहे हैं और स्थानीय लोग भी इन अभियानों का हिस्सा बनकर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
बचपन से ही देखती आ रही थी कि समाज में अशिक्षा का अंधकार फैला है, इसमें स्लम क्षेत्रों की स्थिति काफी खराब थी। इसके बाद ठान लिया कि जरूरतमंद बच्चों को शिक्षित करूंगी और परमात्मा व साथियों के सहयोग से यह सपना साकार हो गया। आज इंद्रीश फाउंडेशन सामाजिक कार्याें में बढ़-चढ़कर सहयोग करते हुए जनमानस के लिए मिसाल बन रही है।
- नेहा प्रवीण,संस्थापक, इद्रीश फाउंडेशन, अंबाला।