अंबाला सिटी। अधिवक्ता अधिनियम 2025 के नए बिल के विरोध में शुक्रवार को अधिवक्ताओं ने वर्क सस्पेंड रखा। इस कारण अंबाला सिटी और नारायणगढ़ की अदालतों में करीब एक हजार से अधिक मामलों की सुनवाई रुक गई। अधिवक्ताओं का कहना है कि नए अधिनियम बिल के पास होने के कारण अधिवक्ताओं के अधिकारों का हनन होगा। इससे न्यायपालिका पर भी भारी असर पड़ेगा। शुक्रवार को राष्ट्रीय स्तर पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया की बैठक होगी। इसके बाद ही आगामी फैसला लिया जाएगा। यह वर्क सस्पेंड लंबा भी चल सकता है।
इन बिंदुओं पर जता रहे रोष
- नए अधिनियम के अनुसार अगर कोई पीड़ित केस संबंधित अधिवक्ता की कार्यकुशलता से संतुष्ट नहीं है तो वह उस अधिवक्ता के खिलाफ उपभोक्ता अधिनियम के तहत मामला दर्ज करवा सकता है।
- अगर किसी अधिवक्ता को किसी भी मामले में तीन वर्ष की सजा हुई तो उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
- अधिवक्ता अपनी मांगों व अन्य कारणों के चलते हड़ताल नहीं कर पाएंगे।
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम बनाने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाने व अन्य कई बिंदुओं पर अधिवक्ताओं ने रोष जताया है।
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बिल होना चाहिए खारिज : रविंद्र
अधिवक्ता रविंद्र कुमार ने कहा कि यह अधिनियम पास हो गया तो नए अधिवक्ताओं के लिए काम करना बहुत मुश्किल हो जाएगा। इसके साथ ही देश के सभी लॉ कॉलेजों में भी सीधे तौर पर केंद्र सरकार को नियंत्रण आ जाएगा। इसलिए इस बिल को खारिज कर देना चाहिए।
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न्यायपालिका पर पड़ेगा असर : विपिन
जिला बार एसोसिएशन सचिव एडवोकेट विपिन जीत सिंह ने बताया कि नए अधिनियम के विरोध में ही वर्क सस्पेंड किया गया। इस अधिनियम के कारण अधिवक्ताओं के साथ-साथ पूरी न्यायपालिका पर असर पड़ेगा। शनिवार को दिल्ली में बार काउंसिल इंडिया की बैठक होगी जिसके बाद वर्क सस्पेंड पर आगामी फैसला लिया जाएगा।
अधिवक्ता रविंद्र कुमार
अधिवक्ता रविंद्र कुमार