आबकारी एवं कराधान विभाग के फर्जी अकाउंट खोलकर लाखों का चूना लगाने वाला वकील विनोद मित्तल आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया।
जून 2014 में दर्ज हुए इस मामले में पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने धोखाधड़ी के इस आरोपी को रविवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश कर तीन दिन के रिमांड पर लिया है।
जून 2014 में आबकारी एवं कराधान विभाग के डीईटीसी (सेल टैक्स) रविंद्र कौशिक ने शिकायत की थी कि वकील विनोद मित्तल ने फर्जी तरीके से उनके विभाग का असैसिंग अॅथारिटी (निर्धारण प्राधिकरण) का एक खाता स्थानीय ओबीसी बैंक में खुलवा कर उसमें विभाग के नाम से आए लाखों रुपये के ड्राफ्ट कैश करवा लिए हैं।
डीईटीसी को इसकी जानकारी तब हुई, जब अंबाला की एक फर्म द्वारा दिया गया 11 लाख 54 हजार 812 रुपये का ड्राफ्ट कैश नहीं हुआ।
इस बारे में फर्म के मालिक से संपर्क किया, तो पता चला कि यह राशि नारायणगढ़ स्थित ओरियटल बैंक ऑफ कामर्स से कैश हो चुकी है। इसके बाद गहराई से तहकीकात की गई, तो पता चला कि नारायणगढ़ निवासी विनोद मित्तल नामक एक व्यक्ति ने मैसर्स असैसिंग अॅथारिटी नाम से एक फर्म बनाकर यह खाता खोला है।
इस खाते में जनवरी 2014 से मई 2014 तक 34 लाख से अधिक जमा करवाए गए। इनमें से 32 लाख 85 हजार रुपये निकाल लिए गए। डीईटीसी की शिकायत पर स्थानीय पुलिस ने विनोद कुमार मित्तल निवासी वार्ड नंबर-11, नारायणगढ़ के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया था।
इसके बाद स्थानीय पुलिस आरोपी विनोद कुमार मित्तल को गिरफ्तार नहीं कर पाई, तो केस आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दिया गया। आर्थिक अपराध शाखा ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
वकील विनोद मित्तल को रविवार को अदालत में पेश कर तीन दिन के रिमांड पर लिया गया है। रिमांड के दौरान उससे इस सारे घोटाले से संबंधित तथ्य जुटाए जाएंगे।
- प्रदीप राणा, जांच अधिकारी, नारायणगढ़ पुलिस-