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कब्जेदारों की जिद में फंसेगा प्रशासन

Sun, 03 Aug 2014 12:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला
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अंबाला कैंट। कैंट के बाजारों से अवैध कब्जे हटवाने के लिए भले ही हाईकोर्ट गंभीर दिख रहा है, लेकिन प्रशासन का ढुलमुल रवैया अब प्रशासन के लिए ही आफत बनने वाला है, क्योंकि अफसरों की चेतावनी और सख्ती का कैंट के विभिन्न बाजारों के दुकानदारों पर कोई असर नहीं हो रहा है।
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ये दुकानदार आज भी पक्के व अस्थायी रूप से बाजारों में काबिज हैं और प्रशासन की तमाम सख्ती और चेतावनियों बेकार साबित कर रहे हैं। अब दुकानदारों के इस रवैये से जिला प्रशासन के अफसरों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं, क्योंकि हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन से यह पूछ लिया है कि बताएं करीब दो साल में प्रशासन ने बाजार में से कितने अवैध कब्जे हटवाए हैं। आला अफसरों को खुद हाईकोर्ट में अब पेश होकर इस रिपोर्ट को पेश करना होगा लेकिन बाजारों में अवैध कब्जों के जो वर्तमान हालात हैं, उससे यह साफ है कि प्रशासनिक अफसरों के लिए हाईकोर्ट में जवाब देना बड़ा मुश्किल हो जाएगा। विकल्प सिर्फ यही है कि प्रशासन या तो हाईकोर्ट की आगामी पेशी तक बाजारों से तमाम अवैध कब्जे हटवाए या फिर हाईकोर्ट की आगामी कार्रवाई के लिए तैयार रहे।

यह हैं मौजूदा हालात
अंबाला कैंट की खान ढाबे से शुरू होने वाली कपड़ा मार्केट, बजाजा बाजार, कसेरा बाजार, चौड़ा बाजार, सब्जी मंडी मार्केट, सदर बाजार, गुड़ बाजार, पंसारी बाजार, हलवाई बाजार, बलदेव दुप्पटे वाली गली, हनुमान मार्केट,  न्यू सदर बाजार, कबाड़ी बाजार, निकलसन रोड, सौदागर बाजार, पुल चमेली रोड, राम बाजार रोड, रेलवे रोड, सेवा समिति रोड, सेवा समिति रोड से बस स्टैंड रोड, ईदगाह रोड, गांधी मार्केट, रंधावा मार्केट व राय मार्केट इन सभी बाजारों में दुकानदार पांच से पंद्रह फीट तक बाहर सड़कों पर काबिज हैं जिस वजह से बाजार संकीर्ण हो चुके हैं और चौपहिया वाहन तो दूर दोपहिया वाहन के साथ गुजरना मुश्किल हो जाता है। बाजारों में नाले गायब हो चुके हैं।
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हाईकोर्ट में चल रही जनहित याचिका
करीब दो साल पहले इन्हीं कब्जों और लोगों की परेशानियों को लेकर वकील एसकेएस बेदी ने जनहित याचिका डाली थी। हाईकोर्ट जिला प्रशासन को कब्जे हटवाने के आदेश दे चुका है लेकिन आदेश न प्रशासन अफसरों ने माने और न ही दुकानदारों ने। उसके बाद याची वकील ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका डाली। अब इस याचिका पर ही अदालत ने अफसरों को इस रिपोर्ट के साथ हाईकोर्ट में तलब कर लिया है कि बताएं कि प्रशासन ने अब तक कितने कब्जे हटवाए हैं।
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