अंबाला। कैंसर की शर्तिया दवा के नाम पर टाइल कारोबारी से हुई डेढ़ करोड़ रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने 15वें दिन एक आरोपी को धर दबोचा। आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के सरसावा वासी मन्नु उर्फ गोल्डी के तौर पर हुई है। आरोपी को सोमवार को कोर्ट में पेश कर पुलिस ने चार दिन का रिमांड लिया है। प्रभु प्रेम पुरम निवासी टाइल कारोबारी संजीव कुमार की शिकायत पर 21 जून को महेशनगर पुलिस ने विनोद कुमार, बब्बर भान, हरप्रीत, राजिंद्र नागर व दो अन्य पर मामला दर्ज किया था।
ठगों ने पहले पीड़ित का भरोसा जीता और उसे बिजनेस में इनवेस्ट करने को कहा। इसके बाद कैंसर को ठीक करने के नाम पर दवा देने की पेशकश की गई। ठीक इसी प्रकार से ठगी का मामला बलदेव नगर थाने में 19 जून को दर्ज किया था। इसमें भी शहर पुलिस एक आरोपी को काबू कर चुकी है। इन दोनों मामलों में आरोपी राजिंद्र का नाम शामिल है। इसमें 30.30 लाख की ठगी की गई थी।
इस तरह की गई थी ठगी
संजीव कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि हमारी टाइल फैक्टरी पंजाब के गांव रजापुर में है। 1 जून को विनोद कुमार नाम के व्यक्ति का फोन आया उसने मिलने का समय मांगा। विनोद कुमार अपने साथ बब्बर भान निवासी गांव खेलन व सहारनपुर निवासी हरप्रीत सिंह को लेकर उसकी फैक्टरी में आ गए। उन्होंने कहा कि हरप्रीत का अंबाला में रहने वाले राजिंद्र नागर से व्यापारिक झगड़ा है। संजीव से इस झगड़े को निपटाने के लिए मदद मांगी। हरप्रीत ने बताया था कि मेरी फार्मा मेटीरियल की फर्म है और वह दवाओं की ट्रेडिंग करता हूं। उनकी बातों में आकर उन्होंने राजिंद्र नागर को फोन मिला दिया। राजिंद्र नागर ने उन्हें जग्गी सिटी सेंटर में बुलाया। यहां राजिंद्र नागर ने संजीव के कहने पर हरप्रीत से सुलह कर ली। इसके बाद राजिंद्र नागर ने संजीव को बताया कि वह भी फार्मा ट्रेडिंग का काम करता है और दवा सप्लाई करता है। मेरे पास हर प्रकार के कैंसर की शर्तिया दवा है। संजीव ने अपने जानकार मरीज के लिए यह दवाई लेने की इच्छा जताई। 3 जून को दवा दिखाने के लिए उसे कालाआम्ब बुलाया। यहां आरोपी राजिंद्र, हरप्रीत व दो अन्य महेंद्रा एसयूवी में मिले। उसे 4 जून को दवा की कीमत 15 लाख लेकर आने को कहा। अगले दिन वह कालाअम्ब पहुंचा तो उसे बताया कि ट्रांसपोर्ट में देरी के कारण अभी दवा नहीं पहुंची है। इसके बाद राजिंद्र ने उसे इसी बिजनेस में पैसा इन्वेस्ट करने का झांसा दिया। संजीव ने बताया कि वह राजिंद्र की बातों में आ गया। उसने घर व अपने दोस्तों से उधार लेकर कुल 1.52 करोड़ रुपये एकत्र किए और सारे पैसे लेकर अगले दिन दवा लेने कालाआंब चला गया। वहां राजिंद्र व हरप्रीत को यह रकम थमा दी और 15 लाख रुपये का चेक भी दिया।