अंबाला सिटी। अदालत ने मोबाइल झपटमारी के एक मामले में आरोपी सनी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। अदालत ने पुलिस जांच में कई खामियां पाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ दोष साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। यह फैसला सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र मलिक की अदालत ने सुनाया। सुनवाई के दौरान दलीलों और गवाहों के बयानों ने पुलिस की कहानी पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
अदालत ने सुनवाई में इन साक्ष्यों पर जताई हैरानी
अदालत ने हैरानी जताई कि जब शिकायतकर्ता आरोपियों को पहले से नहीं जानता था। मौके पर अंधेरा था, तो एफआईआर दर्ज करवाते समय उसे आरोपियों के नाम कैसे पता चले। शिकायतकर्ता ने जिरह में माना कि पुलिस ने उसे नाम बताए थे, जबकि जांच अधिकारी का दावा था कि शिकायतकर्ता ने खुद नाम लिखे थे। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने कानूनी रूप से जरूरी शिनाख्त परेड नहीं करवाई। जिस समय आरोपी से मोबाइल बरामद होने का दावा किया गया, उस समय पुलिस ने किसी भी स्वतंत्र या बाहरी व्यक्ति को गवाह के तौर पर शामिल नहीं किया था। घटना के कुछ ही घंटों बाद रात 2:30 बजे आरोपी की गिरफ्तारी और पहचान को लेकर भी अदालत ने संदेह व्यक्त किया।
यह था मामला
शिकायतकर्ता रिंकू कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि 5 अगस्त 2023 की शाम करीब 7:30 बजे, जब वह अपने घर के बाहर मोबाइल पर बात कर रहे थे। तब बिना नंबर की बाइक पर आए दो युवकों ने उनका वीवो फोन झपटकर लिया था। पुलिस ने इस मामले में अल्लाहपुर निवासी सनी और एक अन्य नाबालिग के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।