मां ने बड़ी बहन, छोटे भाई और मुझे रेलवे ट्रैक पर जबरदस्ती बैठा लिया था। हमने वहां से हटने की काफी कोशिश की। लेकिन मां की पकड़ इतनी मजबूत थी कि हम उनके हाथ से छूट नहीं सके। ट्रेन को सामने आता देख बहन-भाई चीखने-चिल्लाने लगे और ट्रैक से भागना भी चाहा लेकिन ऐसा नहीं कर सके। मैंने भी रेल लाइन पर लेट जाना ही ठीक समझा। इसके बाद क्या हुआ मुझे कुछ नहीं पता। उक्त जानकारी पीजीआई में उपचाराधीन ट्रेन हादसे में जिंदा बचे 7 वर्षीय दर्शन ने जीआरपी को दी। जिसे सुनकर जांच अधिकारी और बच्चे के परिजनों की भी रूह कांप उठी। मासूम अभी भी इस हादसे से सहमा है।
यह था मामला
मंगलवार-बुधवार देररात डीआरएम पुल के पास एक महिला व दो बच्चों की ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। इसमें एक बच्चा जिंदा बच गया था जोकि पीजीआई चंडीगढ़ में उपचाराधीन है। अब जीआरपी ने बच्चे के पिता अशोक कुमार के बारे भी गहन पूछताछ की और सरपंच सहित अन्य गणमान्य से जानकारी हासिल की। गांव वासियों ने अशोक को बेकसूर बताया क्योंकि उन्हें भी इस बात की जानकारी थी कि अशोक की पत्नी बबीता का पीजीआई में मानसिक उपचार चल रहा है और वह छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा हो जाती थी।
पीजीआई में उपचाराधीन हादसे के चश्मदीद गवाह दर्शन ने बताया कि मां उन्हें तैयार कर रेलवे ट्रैक पर ले गई थी और सभी को रेलवे ट्रैक पर बैठा दिया। उसने,बहन व छोटे भाई ने रेलवे लाइन से भागने की काफी कोशिश की, लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाए और इस दौरान ट्रेन आ गई, उसके बाद उसे कुछ जानकारी नहीं। उसे जब होश आया तो वह अस्पताल में था।
बच्चे के बयान के आधार पर पिता के संबंध में भी गहनता से जांच की गई।
चंद्रभूषण शर्मा, प्रभारी जीआरपी थाना अंबाला।