अंबाला। स्वास्थ्य विभाग जिले में मातृ मृत्यु दर शून्य पर लाने के लिए मातृत्व स्वास्थ्य पखवाड़ा चला रहा है। गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया गया है। विभाग 7 जुलाई से एक विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाएगा। यह अभियान आगामी 22 जुलाई तक युद्ध स्तर पर जारी रहेगा। कैंट व सिटी के जिला नागरिक अस्पताल समेत सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टीमें सक्रिय रहेंगी। अस्पतालों में आने वाली प्रत्येक गर्भवती महिला की बारीकी से जांच की जाएगी। इसका मुख्य लक्ष्य हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों की समय रहते पहचान करना है। इससे प्रसव के दौरान होने वाले जोखिमों को सफलतापूर्वक टाला जा सकेगा।
इन जांचों को किया गया अनिवार्य, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
इस अभियान के दौरान प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं की रक्तचाप, धड़कन, हीमोग्लोबिन की जांच जांचों को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गर्भावस्था के दौरान बीपी का बढ़ना मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए घातक होता है। एनीमिया यानी खून की कमी के कारण प्रसव के समय होने वाली जटिलताओं को रोकने के लिए खून की जांच अनिवार्य होगी। गर्भ में पल रहे बच्चे की सेहत को मॉनिटर करने के लिए धड़कन की नियमित जांच की जाएगी।
रेफर होने वाले मरीजों की होगी मॉनिटरिंग
अक्सर देखा जाता है कि गंभीर स्थिति में गर्भवती महिलाओं को बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है, जिससे रास्ते में जोखिम बढ़ जाता है। इस बार स्वास्थ्य विभाग ऐसे मामलों को लेकर बेहद सख्त है। अभियान के दौरान स्थानीय अस्पतालों से रेफर होने वाली महिलाओं के पूरे रिकॉर्ड पर पैनी नजर रखी जाएगी। डॉक्टरों को जवाबदेह बनाया जाएगा कि किस परिस्थिति में मरीज को रेफर किया गया, ताकि रेफरल प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जा सके।
लिंगानुपात में सुधार पर भी रहेगा सीधा फोकस
इस महाअभियान का एक मुख्य उद्देश्य जिले के लिंगानुपात में सुधार लाना भी है। स्क्रीनिंग के बहाने स्वास्थ्य विभाग की टीमें अवैध लिंग जांच और भ्रूण हत्या जैसी गतिविधियों पर भी नजर रखेंगी। महिलाओं को जागरूक करने के साथ-साथ पीसी-पीएनडीटी एक्ट के तहत नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
मातृत्व स्वास्थ्य पखवाड़ा के तहत 22 जुलाई तक महिला ओपीडी व प्रसूति विभाग में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों पर मुख्य फोकस रहेगा।
- डॉ. पूजा पेंटल, पीएमओ, अंबाला कैंट नागरिक अस्पताल