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ऐसी सजा मिले जो दूसरों के लिए सबक हो

Wed, 11 Sep 2013 05:38 AM IST
Ambala
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अंबाला। दिल्ली गैंगरेप के आरोपियों को दोषी करार देने के अदालत के फैसले का अंबाला में महिलाओं ने स्वागत किया है। इन महिलाओं ने मांग की है कि इन दरिंदों को ऐसी सजा दी जाए, जो दूसरों के लिए सबक हो। एक महिला ने तो अपनी प्रतिक्रिया में साफ कहा कि ‘मेरा बस चले, तो इन दरिंदों को गोली से उड़ा दूं।’ महिलाआें ने अपील की है कि इस बार सजा पहले वाले दरिंदे की तरह कम नहीं होनी चाहिए।
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कानून का डर पैदा हो
महिलाएं अक्सर इन वारदात की शिकार होती जा रही है। आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए। ताकि ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वाले दरिंदों के मन में सजा का डर कायम रहे। ये केस केवल पीड़ित का परिवार नहीं, बल्कि देश की सभी महिलाएं व युवतियां लड़ रही है, इसलिए अदालत को जनादेश की भावना का सम्म्मान रखना चाहिए।
-शैली अग्रवाल, अंबाला-
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सीधे फांसी पर लटका दो
ऐसे आरोपियों को समाज में जीने का बिल्कुल अधिकार नहीं है। अदालत को देखना चाहिए कि इस तरह के आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम न उठाने से समाज में रहने वाले इन दरिंदो का हौसला और बढ़ जाएगा। अदालत ऐसे दरिंदों को केवल और केवल फांसी की सजा सुनाए। तभी पीड़ित परिवार और देश के आक्रोशित जनादेश को सही मायनों में इंसाफ मिल पाएगा।
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-प्राची अग्रवाल, अंबाला कैंट-
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अब जरुरत खामोशी तोड़ने की

मेरा बस चले तो ऐसे दरिंदों को सड़क पर खड़ा कर गोली से उड़ा दूं, ताकि बिटिया को इंसाफ मिल सकें। लेकिन हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। इस बार न्यायपालिका इस मामले में इंसाफ के लिए लड़े तमाम लोगों की भावनाओं की कद्र करेगा और दोषियों को केवल मौत की सजा देगा। तभी बदमाशों में खौफ पैदा किया जा सकता है।
-वीनू अग्रवाल, अंबाला कैंट-
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...फिर दोबारा कोई हिम्मत न करे

अदालत ऐसे दरिंदों को ऐसी सजा दे कि ऐसी दरिंदगी करने की कोई दोबारा हिम्मत न करे। यदि देश का कानून महिलाओं से होने वाली ऐसी वारदातों के बाद आरोपियों पर दया दिखाता रहेगा। तो देश में ऐसी घटनाएं अमूमन होती ही रहेंगी। इन दरिंदों की सजा समाज में अन्य असमाजिक तत्वों के लिए बड़ी सबक होनी चाहिए।
-प्रिया सिंगला, अंबाला कैंट -
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इस बार अदालत दया न दिखाएं

यह देश की जनता की भावनाओं और संघर्ष से जुड़ा मामला है। इसलिए अदालत इस बार इन दरिंदों के खिलाफ दया न दिखाए। अदालत दरिंदों को फांसी की सजा सुनाए और दरिंदे यदि राष्ट्रपति के पास फांसी माफी की अर्जी लगाते हैं, तो राष्ट्रपति भी तुरंत उनकी अर्जी रद्द कर उन्हें फांसी पर लटकाने का आदेश दें।
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-नंदिता गुप्ता, अंबाला कैंट-
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