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विवादों में घिरी डिप्टी सुपरिंटेंडेंट की नौकरियां!

Wed, 11 Sep 2013 05:38 AM IST
Ambala
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अंबाला। सूबे के जेलों में खाली पड़े डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के पद पर हुई नई नियुक्तियां विवादों में घिर गई है। आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर इस पद के लिए नौ लोगों को केवल इंटरव्यू के जरिये ही भर दिया गया। इन नियुक्तियों की विस्तृत अधिकृत सूचना अंबाला, हिसार सेंट्रल जेल औश्र रोहतक, कुरुक्षेत्र, झज्जर, करनाल, भिवानी व पलवल के जिला कारागार अधीक्षकों को डीजी जेल ने कुछ दिन पहले भेज दी है। हाईकोर्ट में शिकायत के बाद कोर्ट ने नई नियुक्तियों पर स्टे लगा दिया है।
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ये है मामला
प्रदेश के नौ जेलों में खाली पड़े डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के पद को भरने के लिए सरकार ने कई माह पहले भर्ती प्रक्रिया शुरू की। हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन के जरिये डायरेक्ट कोटे से 9 आवेदकों का साक्षात्कार लेकर अंतिम रूप से चयन कर लिया गया। एक जुलाई 2013 को इन नियुक्तियाें के लिए साक्षात्कार का रिजल्ट भी घोषित कर दिया गया। इन पदों के लिए जिन आवेदकों का चयन हुआ, उनमें से एक फतेहाबाद, एक अंबाला शहर, चार रोहतक, एक करनाल, एक कुरुक्षेत्र व एक पलवल के युवक शामिल हैं।

ऐसे घिरी विवादों में नियुक्तियां

हाईकोर्ट में दी गई शिकायत में इन नियुक्तियों को पूरी तरह से नियम के विरुद्ध बताया गया है। शिकायत में प्रदीप कुमार व अन्यों की ओर से दी गई है। इसमें बताया गया है कि सर्विस रूल के मुताबिक जो भी नियुक्तियां होगी, उसका 25 प्रतिशत कोटा सीधी नियुक्तियाें से और 75 प्रतिशत कोटा प्रोमोशन पॉलिसी के तहत भरा जाएगा। लेकिन नौ पदों को सीधी नियुक्ति से भर लिया गया। इसमें न तो लिखित परीक्षा करवाई गई। साथ ही इस पद के लिए प्रोमोशन पॉलिसी के तहत इंतजार में बैठे सहायक अधीक्षकों को भी नजरअंदाज कर दिया गया। इन 9 पदों के लिए आवेदकों के सिर्फ इंटरव्यू लिए गए और उन्हें ग्रेड देकर सीधे नियुक्तियां कर दी गई। शिकायत में यह भी बताया गया है कि इस पद के लिए विभाग की प्रोमोशन पॉलिसी तहत आवेदक को आर्ट, साइंस, कामर्स या कृषि में स्नातक होना जरूरी है। लेकिन सीधे इंटरव्यू के जरिये की गई इस नियुक्तियों के लिए शैक्षणिक योग्यता भी केवल आर्ट और साइंस में स्नातक ही रखी गई।
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सरकार से मांगा जवाब
अधिवक्ता राहुल देसवाल के अनुसार ये नियुक्तियां पूरी तरह से विवादों में घिरी है और केवल अपने चहेतों को लाभ देने के लिए सरकार ने ऐसा किया है। इसकी शिकायत पहले दिसंबर 2012 में हाईकोर्ट में की गई थी। शिकायत पर हाईकोर्ट ने सरकार को नियुक्तियों पर दोबारा विचार करने को कहा। लेकिन सरकार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसके बाद अप्रैल 2013 में फिर से इस बारे में हाईकोर्ट में शिकायत दी। हाईकोर्ट ने फिर से सरकार को इन नियुक्तियों बारे दोबारा विचार करने को कहा। मगर सरकार ने अब 1 जुलाई 2013 को ये नियुक्ति सीधे केवल इंटरव्यू के जरिए ही कर दी। इसलिए अब दोबारा सितंबर 2013 में हाईकोर्ट में शिकायत दी गई है। जिस पर हाईकोर्ट ने नियुक्तियों पर स्टे लगाते हुए सरकार से इस बाबत जवाब तलब किया है।
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