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सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को मलेरिया और डेंगू का खतरा

Mon, 05 Aug 2013 05:35 AM IST
Ambala
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अंबाला। अंबाला में बहुत से सरकारी स्कूलों के बच्चों की सेहत संकट में है। उन्हें मलेरिया और डेंगू बुखार का खतरा सता रहा है। लेकिन इस स्थिति को लेकर न तो जिला प्रशासन और न ही शिक्षा विभाग चिंतित है। नतीजतन स्कूलों में बरसाती पानी की वजह से पैदा हुए गंदे और बदबूदार माहौल में पढ़ने को बच्चे मजबूर हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इन दिनों आए दिन जिले में बारिश हो रही है। इस बारिश की वजह से शहर व छावनी के अधिकतर सरकारी स्कूलों के आंगन में जबरदस्त बरसाती पानी खड़ा हुआ है। चूंकि ये पानी कई दिनों से वहीं खड़ा हुआ है, इसलिए ये पानी जहां सड़ने लगा है, वहीं इस खड़े पानी मच्छरों ने भी अंडे दे दिए हैं। उनका लारवा पानी में तैरता साफ देखा जा सकता हैं। इसी वजह से यहां मच्छरों का जबरदस्त आतंक रहेगा और बच्चों को मलेरिया व डेंगू का खतरा बना हुआ है। इसके प्रति न तो जिला शिक्षा विभाग के अफसर चिंतित है और न ही प्रशासनिक अफसर।
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स्कूल प्राचार्य, कोई सुनता नहीं शिकायत
सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों व शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में बरसाती पानी को लेकर कोई निकासी नहीं है। उनके अनुसार स्कूलों के परिसर को कंकरीट का बना दिया जाए ताकि पानी स्कूल से बाहर चला जाए। मगर ऐसा न होने की वजह से हफ्तों पानी परिसर में ही खड़ा रहता है और इसमें मच्छर पैदा हो जाते हैं। इस बारे में वे लगातार शिकायतें जिला शिक्षा विभाग को करते रहते हैं, लेकिन कोई भी अफसर स्कूल में आकर इस स्थिति को नहीं देखता है। प्राचार्य खुद मानते हैं कि इस वजह से लगातार बच्चों में मलेरिया और डेंगू बुखार का खतरा रहता है।

बदबू से पढ़ना मुश्किल, मॉर्निग असेंबली बंद
सरकारी स्कूल में कई हफ्तों से खड़ा बरसाती पानी सड़ने लगा है। इस पर काई जमने लगी है। इसी वजह से इस पानी में से भी अजीब से दुर्गंध उठने लगी है। जिस वजह से कक्षाओं में छात्रों व शिक्षकों का बैठना मुश्किल हो रहा है। दूसरा, परिसर में तो बरसाती पानी खड़ा है, इसलिए अधिकतर स्कूलों में छात्रों की मार्निंग असेंबली कहां की जाए? इसका कोई विकल्प न होने की वजह से कई दिनों से अधिकतर स्कूलों में यह बंद है।
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पानी में चूना फेंकने तक का बजट नहीं
हालांकि स्वास्थ्य महकमा लगातार मलेरिया व डेंगू को लेकर अलर्ट जारी रहा है और बार-बार आह्वान कर रहा है कि जहां भी खड़ा पानी है, उसमें केरोसिन, डीजल व पेट्रोल डाल दिया जाए। स्कूलों के प्राचार्यों व शिक्षकों की मानें तो उक्त पेट्रो पदार्थों को तो खरीदना तो दूर, यहां पानी में चूना खरीदकर ही डाल दें, इसके लिए भी बजट नहीं है। उनके अनुसार कई बार खुद शिक्षकों ने अपने जेब से चूना मंगवाकर यहां फेंकवाया है लेकिन दोबारा बारिश होने की वजह से ये कारगर नहीं होता। इसलिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को मोटर लगाकर तुरंत ये पानी निकलवाना पड़ेगा और स्कूलों के परिसर को कंकरीट का बनाना होगा।

मैं स्कूलों में सर्वे करवा लेती हूं, जहां भी पानी खड़ा होगा, वहां से पानी निकलवाया जाएगा और दोबारा पानी नहीं भरे, इसके लिए भी इंतजाम किया जाएगा। बच्चों की सेहत को लेकर विभाग पूरी तरह गंभीर है।
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-डॉ. परमजीत शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी-
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