अंबाला। पहले घर की जरूरतों के लिए साहूकारों से रुपये भारी भरकम ब्याज पर लेने पड़ते थे। कर्ज के मकड़जाल से निकलने के लिए सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर कब तक मजबूरी में दूसरों की ओर देखेंगी। गांव धुराला की कुछ महिलाओं ने करीब पांच साल पहले प्रण लिया कि अब वे घरेलू जरूरतों के लिए साहूकारों के चंगुल में नहीं फंसेंगी। स्वालंबन और आत्म सम्मान की जिद ने इन महिलाओं को उस मुकाम पर पहुंचा दिया जहां वे खुद आत्मनिर्भर होते हुए दूसराें को रोजगार तक दे चुकी हैं।
गांव की कुसुम लता ने आसपास की महिलाओं के साथ योजना बताई। पहले तो महिलाओं को लगा कि शायद ही वे कभी आर्थिक तंगी से निजात पा सकेंगी, लेकिन कई बैठकों का दौर चला। धीरे-धीरे इन महिलाओं ने अपने घर में इसकी बात, की तो परिजनों को भी लगा कि यह मुमकिन नहीं है। लेकिन वर्ष 2007 में एक मीटिंग ऐसी भी हुई, जिसमें इन महिलाओं ने इस आर्थिक तंगी से निजात पाने के लिए यह कदम उठा ही लिया। एक ग्रुप के माध्यम से हर महीने छोटी सी रकम जोड़नी शुरू की। गांव की कुसुमलता के नेतृत्व में कांता देवी, सुनीता, बाला देवी, सुदेश, गुरदेव कौर ने अपने साथ कुछ महिलाएं जोड़ीं और उन से हर महीने एक निश्चित रकम ग्रुप लीडर के पास जमा करवाने को कहा। बस फिर क्या था। सौ रुपये से हुआ ग्रुप हजारों तक पहुंच गया। इसी तरह शांति, सरस्वती, सतनाम, कल्पना, कृष्णा, भगत सिंह, सुरेंद्र सिंह ने भी ग्रुप शुरू किए। इस कार्य से प्रेरित होकर गांव के सरपंच के पिता सुरेंद्र सिंह ने भी इस कार्य की सराहना की।
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इस तरह से काम करते हैं ग्रुप
अंबाला। इन ग्रुप के तहत जितने भी सदस्य हैं, वे एक निश्चित रकम ग्रुप लीडर के पास जमा करवाते हैं। यही राशि महिलाओं को उनकी जरूरत के वक्त मात्र डेढ़ परसेंट ब्याज पर दी जाती है। जबकि बाजार में यदि कर्ज उठाया जाता है, तो पांच रुपये प्रति सैकड़ा के हिसाब से अदा करना होता है। यही ब्याज इन महिलाओं के ग्रुप की आमदनी भी है और बाद में इस ब्याज को भी महिलाओं में बराबर बांट दिया जाता है।
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यह हासिल किया महिलाओं ने
* किसी भी जरूरत के लिए यह ग्रुप किसी को भी लोन देती हैं
* किसी को यदि अपने बच्चे की फीस अदा करने में दिक्कत है, तो ग्रुप मदद करता है
* बेटी की शादी के लिए कोई भी इस ग्रुप की मदद ले सकता है
* खेतीबाड़ी के लिए खाद यदि लेनी है, तो भी यह ग्रुप मदद करता है
* मकान की रिपेयर करवानी है, तो भी आर्थिक सहायता करते हैं
* कुछ महिलाओं को घर पर ही मनियारी, किराना जैसा काम शुरु कराया
* कुछ दुकानें भी खुलवाकर युवाओं को रोजगार में मदद दी
* महिलाओं ने इस ग्रुप की मदद से पशु खरीदे और दूध बिक्री का काम शुरु किया
* खेतीबाड़ी में कर्ज के लिए चल रही आढ़तियों का जाल भी तोड़ा
यह है आगामी प्लानिंग
अंबाला। इन ग्रुपों की प्लानिंग है कि आने इसी साल पंचायती जमीन में से कम से कम दो एकड़ जमीन को पट्टे पर लें और इस पर काम शुरू करें। इस में खेतीबाड़ी से लेकर कुछ अन्य काम भी किया जा सकता है। कुसुमलता, कांता देवी, सुनीता, बाला देवी, सुदेश, गुरदेव कौर का कहना है कि वे सक्षम हैं और इस काम को भी बखूबी कर सकती हैं। इस बार पंचायती जमीन को पट्टे पर लेने की प्रक्रिया में वे भी भाग लेंगी।