दो बच्चों की मौत से मातम में बदली खुशियां, एक्सरे-सीटी स्कैन के रुपये मांगने पर हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। कुछ घंटे पहले तक दलीपगढ़ में विवाह की खुशियां चरम पर थी। दलीपगढ़ के निवासी मुकेश के बड़े भाई की बेटी की शुक्रवार रात्रि शादी थी। अन्य जिलों से कई रिश्तेदार समारोह में शरीक होने आए थे। तड़के डोली विदा करने के बाद मुकेश का परिवार दलीपगढ़ स्थित अपने घर में सो गया। समूचे दलीपगढ़ में विवाह की खुशियां थी, मगर तड़के तेज बारिश में मुकेश के मकान की कडिय़ों वाली कच्ची छत गिरी तो खुशियां एकाएक मातम में बदल गईं। छत गिरने पर आवाज सुन आनन-फानन में पड़ोसियों ने दबे लोगों को निकाला। जो वाहन मिल सका उसमें उन्हें सिविल अस्पताल पहुंचाया । मलबे के नीचे दबे चार लोगों में से दो बच गए, मगर दो भाई-बहन इतने खुश किस्मत शायद नहीं थे। 15 वर्षीय बहन शीतल व उसका 12 वर्षीय भाई हन्नी हादसे में हमेशा के लिए मौत के आगोश में समा गए। हादसे ने परिवार को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया। मलबे के नीचे दबकर घायल हुए पिता मुकेश को देर शाम तक होश नहीं आया था और वह अस्पताल में दाखिल थे जबकि मां अंजू की हालत खराब थी। एक ही झटके में दोनों बच्चों को खोने का गम उनकी आंखों में साफ झलक रहा था। दोपहर पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार के सुपुर्द किया गया।
तड़के करीब चार बजे सोए परिवार के सदस्य
पेंट का काम करे वाला दलीपगढ़ निवासी मुकेश अपने घर में तड़के करीब चार बजे सो गया था। बड़े भाई की बेटी की डोली विदा करने पर वह अपनी पत्नी अंजू, बेटा हन्नी, बेटी शीतल, सहारनपुर निवासी अपने साला सोनू व भतीजे वंश के साथ सोया था। मगर तड़के करीब छह बजे तेज बारिश के दौरान एकाएक छत गिरी। पड़ोसी राज कुमार व अन्य ने बताया कि आवाज सुनते ही वह मुकेश के घर की ओर भागे। मुख्य गेट उन्हें बंद मिला जिसके बाद वह दीवार फांदकर अंदर आए। फिर कमरे का दरवाजा बंद था जिसे तोड़ा गया। अंदर दाखिल हुए तो घर में करंट आ रहा था। इसलिए बिजली की तारें काटी गई। इसके बाद मलबे से सभी को बारी-बारी से निकाला गया। जिन्हें पहले निकाला गया उन्हें लोग बाइक, स्कूल व अन्य वाहनों में सिविल अस्पताल ले आए। अंत में दसवीं की छात्रा शीतल व सातवीं के हन्नी को निकाला गया। बताते हैं कि दोनों मलबे व पंखे के नीचे बुरी तरह से दब गए थे। उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया।
अस्पताल में हुआ हंगामा
उधर, घायलों के परिजनों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया। उनका आरोप था कि अस्पताल में उनसे एक्सरे के लिए 100 रुपये व सिटी स्कैन के लिए एक हजार रुपये मांगे गए जबकि इमरजेंसी केस होने के बावजूद उन्हें तरजीह नहीं दी गई। उनका आरोप था कि अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर भी नहीं था। इसको लेकर उन्होंने रोष भी जताया।
अस्पताल ही बन गया सियासत का अखाड़ा
हादसे के कुछ ही मिनटों बाद अस्पताल में कांग्रेस नेता निर्मल सिंह और इनेलो नेता ओंकार सिंह पहुंच गए जिन्होंने मृतकों के परिजनों और घायलों से बातचीत की। इस दौरान उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। इसके कुछ देर बाद ही जब स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज मरीजों का हाल जानने अस्पताल पहुंचे तो मौजूद भीड़ ने मंत्री के खिलाफ ही नारेबाजी शुरू कर दी। यह देख मंत्री विज अस्पताल से लौट आए। एक राजनीतिक पार्टी द्वारा नारेबाजी की वीडियो को तुरंत वायरल भी किया गया। नारे लगाने वाले कौन लोग थे, यह साफ नहीं हो सका। मगर इस नारेबाजी के कुछ ही देर बाद पीड़ित परिवार के परिजन मंत्री विज के निवास पर पहुंच गए। यहां उन्होंने मंत्री को बताया कि नारेबाजी करने वाले उनके लोग नहीं थे। मंत्री विज ने परिवार से घटना को लेकर दुख व्यक्त किया और आर्थिक मदद के तौर पर चार लाख रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने कहा वह और मदद परिवार की कर सकें, इसका पूरा प्रयास करेंगे।
कोट्स
इमरजेंसी वार्ड में सुबह दो डॉक्टर तैनात थे और डॉक्टरों की अनुपस्थिति का आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है। बीपीपल एवं एससी का एक्सरे व अन्य टेस्ट राज्य सरकार द्वारा निशुल्क रखे गए हैं, मगर इसके लिए कार्ड दिखाना होता है। स्टाफ ने कार्ड दिखाने की बात कही थी। परिवार द्वारा अस्पताल प्रशासन द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं।
-सतीश कुमार, एसएमओ, सिविल अस्पताल, अंबाला कैंट।