अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। सिविल अस्पताल की विद्युत आपूर्ति ठप होने पर 18 घंटों से गर्मी में तड़प रहे मरीजों की ओर स्वास्थ्य विभाग द्वारा ध्यान नहीं दिया गया, मगर मामला शुक्रवार सुबह विधायक असीम गोयल के संज्ञान में आया तो उन्होंने सुबह दस बजे आनन-फानन में अस्पताल का दौरा किया। पहले ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों को कड़ी फटकार लगाई फिर वह सीधा सीएमओ कार्यालय की ओर बढ़ गए। यहां उन्होंने सीएमओ को खूब खरी-खोटी सुनाई। यहां तक कि विधायक ने सीएमओ ऑफिस में लगा एसी और पंखा भी बंद करवा दिया। उन्होंने कहा जब तक अस्पताल में बिजली नहीं आ जाती तब तक सीएमओ ऑफिस में न पंखा और न ही एसी चलेगा। विधायक की फटकार के करीब डेढ़ घंटे बाद अस्पताल की विद्युत आपूर्ति बहाल हो सकी, जिससे मरीजों को राहत मिली।
सात मिनट तक सीएमओ को कुछ इस तरह लगी विधायक की फटकार
सुबह करीब 11 बजे विधायक असीम गोयल सीएमओ ऑफिस में पहुंच गए। सीएमओ अपने ऑफिस की चेयर पर बैठ कामकाज कर रहे थे। इसी बीच विधायक वहां पहुंचे, जिसके बाद पूरा नजला सीएमओ पर गिर गया। बिजली गुल होने पर तिलमिलाए विधायक सीएमओ से बोले कि...
‘शर्म है, शर्म है, आप गोरखपुर बनाना चाह रहे हो यहां, बच्चे मर जाएं, सरकार पर इसका ब्लेम आए, आपने रात से अब तक क्या किया, आपका सिंगल फोन किसी पर गया क्या, मुझे बताओ आपने क्या किया और किस-किस को फोन किया, आप यदि चाहते तो जनरेटर किराए पर मंगाते और बिजली चालू कराते। आप इस कुर्सी पर बैठने लायक ही नहीं हो, आपकी क्या जिम्मेदारी है, मैं इसकी सीएम से बात कर आपकी शिकायत करूंगा, मैं छोडूंगा नहीं इस गोरखधंधे को। आप लोग सरकार की बदनामी करने पर तुल हो, वहां लाइट नहीं है, जिनकी डिलीवरी हुई वहां लाइट नहीं, वो औरतें किस हालत में हैं, क्या आपने अस्पताल में चक्कर लगाया, हालात देखे आपने, कितने भयावह हालात हैं, आपने चैक किया क्या..., आप मजे से बैठे हुए हो अपने आफिस में, यहां एसी चल रहा है... पंखा चल रहा है, बंद करो न इसे, बैठो न बाहर धूप में, उनके वहां लगाकर देखों ने अपना ऑफिस, वहां मरीज मर रहे हैं, वहां किसी की डिलीवरी होनी है, समझ रहे हो न आप, इंसानियत है आप में थोड़ी बहुत, सुबह मेरे फोन के बाद आप ऑन हुए... आपने कितना स्ट्रेस लिया, पौना घंटा हो गया मुझे आपको फोन किए, पौने घंटे में आदमी चंडीगढ़ पहुंच जाता है।’
इसके बाद विधायक ने एक्सईएन को फोन लगाया और पूछा कि अस्पताल से कितनी देर पहले लिखित जानकारी आई है तो पता चला कि पांच मिनट पहले, इस पर फिर विधायक भड़के और सीएमओ से बोले...
‘आप क्या कर रहे हो, फिर उन्होंने सीएमओ का फोन चेक किया और बोले कि, मिस कॉल से पहले आपने किसे कॉल की, आप क्या चाहते हो सीएमओ साहब, स्वास्थ्य मंत्री के नाक तले बैठे हो, उनके जिले का यह हाल है। सीएमओ इंसानियत से काम करो, कुर्सी पर बैठे तनख्वाह से काम नहीं चलता, फील्ड में जाना पड़ता है। आपके ऑफिस का पंखा व एसी तब तक नहीं चलेगा जब तक अस्पताल में लाइट नहीं आती।’ इसके बाद विधायक वहां से चले गए।
यह थी असल समस्या
सिटी सिविल अस्पताल में वीरवार दोपहर तीन बजे से बिजली गुल हो गई थी। रात्रि ग्यारह बजे अस्पताल प्रशासन द्वारा जनरेटर चलाया गया जिससे एक-दो वार्ड में बिजली आपूर्ति हो रही थी। शुक्रवार मौसम में नमी थी जिस कारण महिला वार्ड, पुरुष वार्ड, शिशु वार्ड व अन्य वार्डों में बिजली नहीं होने से मरीज व तीमारदार तड़प रहे थे। दरअसल, अस्पताल को सप्लाई होने वाली बिजली के ट्रांसफार्मर में फाल्ट की वजह से यह गड़बड़ी उत्पन्न हुई।
डेढ़ घंटे बाद चालू हुई बिजली
विधायक की फटकार के डेढ़ घंटे बाद अस्पताल की बिजली पुन: चालू हुई। नया ट्रांसफार्मर पहले से अधिक क्षमता का लगाया गया ताकि ओवरलोडिंग व अन्य समस्या से निपटा जा सके। दूसरी ओर अस्पताल में मौजूद तीमारदार संतोष रानी, कमलेश, लक्ष्मण, सचिन, सुरेश, विशाल, सोनी आदि ने कहा कि तीन बजे से अस्पताल में बिजली नहीं है जिस वजह से परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों के कमरों के पंखे चल रहे हैं जबकि वार्डों में नहीं। नवजात शिशुओं को अस्पताल में रखने की दिक्कत हो रही है।
मामले में मुख्य जिम्मेदारी पीएमओ की है। मैं वीरवार शाम पांच बजे अस्पताल के दौरे पर भी गया था, मगर किसी ने भी मुझे ट्रांसफार्मर खराब होने की जानकारी नहीं दी। इसके बाद मुझे रात्रि आठ बजे पता चला। फिर एक्सईएन व अन्य विभागों को फोन कर जल्द आपूर्ति दुरुस्त करने की मांग की। विधायक का फोन आने के बाद सुबह एक्सईएन से बात हुई तो एक्सईएन ने कहा कि आप लिखित में मांग पत्र भेजो। फिर मैंने पीएमओ को पत्र लिखने को कहा और इसी प्रक्रिया में समय लगा। इसी बीच विधायक सिविल अस्पताल निरीक्षण के बाद मेरे कार्यालय में आ गए। इस मामले में मेरी गलती नहीं है जबकि यह जिम्मा पीएमओ का है।
-डा. अशोक कुमार, सीएमओ, अंबाला।