स्वास्थ्य-खेलमंत्री के जिले में देशभर से आए 1100 मेहमान खिलाड़ियों के लिए एक डॉक्टर तक नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी।
स्कूली नेशनल हॉकी प्रतियोगिता के लिए जिले को पहली बार मेजबानी करने का मौका मिलना बेशक गर्व की बात हो, लेकिन सरकारी व्यवस्था ऐसी हैं कि देशभर से आए करीब 1100 मेहमान यहां पर मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के क्षेत्र में इन 1100 खिलाड़ियों के लिए एक डॉक्टर तक उपलब्ध नहीं है। मंगलवार को इस 63वीं स्कूली हॉकी टूर्नामेंट के दूसरे दिन दो खिलाड़ियों को चोट लग गई। साथी खिलाड़ी और स्पोर्टिंग स्टाफ आदि दौड़कर खिलाड़ी को एंबुलेंस
लेकर तक पहुंचे तो पता चला कि यहां डॉक्टर ही नहीं है। मजबूरन आनन-फानन में एक को सिविल अस्पताल ले जाना पड़ा। अहम बात यह है कि दो मैचों के दौरान ही ये दोनों खिलाड़ी घायल हुए थे और दोनों बार ही डॉक्टर नहीं उपलब्ध हो सका। ऐसे में हम कह सकते हैं कि पहली घटना के दौरान डॉक्टर न मिलना तो संयोग हो सकता है, लेकिन दूसरी बार एक अन्य मैच में घायल खिलाड़ी के लिए डॉक्टर न मिलना कहीं न कहीं ‘मेहमानवाजी’ में भारी लापरवाही है। कहने को तो ऐसा लग रहा है कि स्पर्धा तो राष्ट्र स्तर की हो रही है, मगर यहां सुविधाएं ब्लॉक स्तर की भी नहीं है।
तमिलनाडु की खिलाड़ी के माथे पर लगी गेंद
प्रतियोगिता के दूसरे दिन मंगलवार को एक महिला खिलाड़ी के माथे पर गेंद लगी तो लहूलुहान हो गई। उपचार के लिए जब सभी एंबुलेंस की ओर दौड़े तो वहां डॉक्टर ही नहीं मिला। आनन-फानन में खिलाड़ी को सिविल अस्पताल ले जाया गया। जानकारी मुताबिक दोपहर करीब दो बजे डीएवी कालेज एवं स्कूल मैदान पर गर्ल्स कैटेगिरी में तमिलनाडु और उड़ीसा का मैच चल रहा था। इस दौरान तमिलनाडु की खिलाड़ी प्रभा के माथे पर गेंद लगी और वह घायल हो गई। खून बहने लगा तो डॉक्टर मौजूद न होने के कारण खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ ने खिलाड़ी के खून के बहाव को रुमाल से रोकना चाहा। जब एंबुलेेंस मौके पर पहुंची तो उसमें भी डॉक्टर मौजूद नहीं था, जिस कारण खिलाड़ी को एंबुलेंस से सिविल अस्पताल लाया गया। वहां पर उपचार के बाद छुट्टी दी गई।
इसी तरह कुछ समय बाद दूसरे मैच में भी आंध्र प्रदेश की खिलाड़ी प्रियंका की टांग पर चोट लग गई। घटना के समय आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच मैच चल रहा था। मगर खिलाड़ी प्रियंका के इलाज के लिए भी मौके पर कोई डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं था। घायल खिलाड़ी को वहीं पर ट्रीटमेंट दिया।
पीने का पानी तक नहीं, आने-जाने में ही बीत रहा समय
अव्यवस्थाओं की बात करें तो यहां खिलाड़ियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था तक नहीं है। इसके अलावा जहां पर खाना बनाया जा रहा है वहां भी साफ-सफाई का अभाव है। खिलाड़ियों को शौचालय की समस्या भी झेलनी पड़ रही है। ऐसे में नेशनल हॉकी में किए गए इंतजाम जिला शिक्षा विभाग के दावों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। ऐसे में असुविधाओं में घिरे खिलाड़ियों से कैसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रखी जा सकती है। टीम के खिलाड़ियों और कोच आदि ने बताया कि उन्हें अंबाला आए दो से तीन दिन हो चुके हैं लेकिन काफी अव्यवस्थाएं झेल रहे हैं। कई स्कूलों में कमरों की खिड़की और दरवाजे टूटे होने के कारण मच्छरों ने आतंक मचा रखा है। ऊपर से कई टीमों के रुकने के लिए व्यवस्था इतनी दूर की गई है कि प्रतियोगिता स्थल तक आने-जाने में ही समय बीत जाता है। उनके लिए वाहन भी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। वह ऑटो चालकों को अपने पल्ले से पैसे देकर मैदान तक पहुंच रहे हैं।
दो सौ रुपये वसूल रहे चार्ज
सिटी आर्य स्कूल के पिछली ओर खिलाड़ियों के खाने के लिए कॉमन मैस बनाई गई है। वहां भी खाना बनाने के स्थान पर गंदगी का आलम था। जानकारी मुताबिक प्रति खिलाड़ी दिन का दो सौ रुपये चार्ज करने के बावजूद खाने की स्थिति सही नहीं है। न तो शिक्षा विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान दे रहे न ही अन्य खेल अधिकारी।
ऐसे पहुंचे खिलाड़ी : पहले पैदल चले फिर ऑटो किया
मंगलवार को एक टीम का मैच था, उनके रहने का प्रबंध घास मंडी स्थित स्कूल में किया गया था। उक्त टीम के खिलाड़ियों ने दबी जुबान में बताया कि स्कूल से करीब दो-तीन किलोमीटर दूरी पर मैदान है। सोमवार को काफी गुहार लगाने पर स्कूली वैन में वह मैदान तक पहुंच गए थे, मगर मंगलवार को वैन नहीं मिली। बीच रास्ते तक वह पैदल आए और वहां से उन्होंने पैसे देकर ऑटो किया।
क्या कहते हैं अधिकारी
हर रोज स्कूलों का दौरा किया जा रहा है ताकि खिलाड़ियों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। तीनों मैदान पास में ही होने के कारण एक ही एंबुलेंस की व्यवस्था की गई थी। खाने और पीने की पानी की जो भी समस्या आ रही है उसे ठीक किया जा रहा है। अगर किसी भी खिलाड़ी को काई परेशानी होगी तो उसका तुरंत समाधान किया जाएगा।
उमा शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी, अंबाला।