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Ambala News: सेना पर 900 करोड़ का सेवा शुल्क लंबित

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अंबाला छावनी ​स्थित कैंटोनमेंट बोर्ड का कार्यालय। फाइल फोटो - फोटो : अंबाला छावनी ​स्थित ईसाई क​ब्रिस्तान। संवाद
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अंबाला। सेना से लगभग 900 करोड़ सेवा शुल्क की प्राप्ति के लिए कैंटोनमेंट बोर्ड की जोर-आजमाईश कर रहा है। कई बार बैठक और पत्राचार करने के बाद भी सेना ने एक भी पैसा सेवा शुल्क के तहत बोर्ड के खाते में जमा नहीं कराया है।
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एक बार फिर सेवा शुल्क की प्राप्ति के लिए बोर्ड की तरफ से पत्राचार की तैयारी की जा रही है। यह सेवा शुल्क उस जमीन के एवज में लिया जा रहा है जोकि कैंटोनमेंट बोर्ड के अधीन है, लेकिन इस पर सेना के कार्यालय, यूनिट और रिहायशी भवन बने हुए हैं। इसलिए सेना से सेवा शुल्क के तहत राशि लेने का प्रावधान है। लेकिन वर्ष 2011 के बाद से सेना ने एक पैसा जमा नहीं करवाया।
अब यह पैसा करोड़ों रुपये में पहुंच गया है। वहीं, पैसे की प्राप्ति के लिए कैंटोनमेंट बोर्ड पिछले लगभग 15 वर्षों से सेना के साथ पत्राचार कर रहा है,बावजूद इसके लंबित भुगतान पर आजतक फैसला नहीं हो पाया और न ही सेना ने इस मामले को लेकर कोई रूचि दिखाई है। प्राप्त जानकारी अनुसार सेना की ओर से इस सेवा शुल्क को जमा न करवाने का एक कारण तोपखाना परेड की जमीन भी मानी जा रही है।
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इस जमीन को लेकर सेना की तरफ से लगभग 800 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई थी और इसकी रिपोर्ट बनाकर हरियाणा सरकार को भी दी थी। लेकिन सरकार ने अभी तक इस पर कोई सकारात्मक रुख नहीं दिखाया है। जबकि सेना की यह योजना थी कि जैसे ही यह पैसा मिलेगा तो इस पैसे से ही बोर्ड के लंबित सेवा शुल्क का भुगतान कर दिया जा जाएगा।
झोली में आए 22 करोड़ रुपये
एयरफोर्स ने सेवा शुल्क के तहत लगभग 22 करोड़ रुपये कैंटोनमेंट बोर्ड के खाते में जमा करवा दिए हैं। वहीं रेलवे भी जल्द ही पांच करोड़ रुपये का सेवा शुल्क बोर्ड के खाते में जमा करवा देगा। सेवा शुल्क की प्राप्ति से अब कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला द्वारा मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की योजना तैयार की जाएगी। इसके लिए धरातल पर उतरकर टीमें कार्य करेंगी। स्थानीय निवासियों से भी इस संबंध में जानकारी मांगी जाएगी। वहीं इस कार्य में बोर्ड के पूर्व सदस्यों का भी सहयोग लिया जाएगा। विकास कार्याें की सूची में सड़कों, नालियों व स्ट्रीट लाइटों आदि को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा कुछ बड़ी परियोजनाओं को लेकर भी रुपरेखा तैयार की जा सकती है ताकि बोर्ड का क्षेत्र हरा-भरा रहे और यहां प्रत्येक घर में मूलभूत सुविधाएं पहुंच सकें।
नगर परिषद पर बकाया 5 करोड़ का चुंगी कर
नगर परिषद सदर अंबाला की देनदारी भी कैंटोनमेंट बोर्ड की तरफ है। लगभग पांच करोड़ रुपये का चुंगी कर नगर परिषद की तरफ लंबित है। इसके लिए वर्ष 1999 से पत्राचार चल रहा है और अब यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है। प्राप्त जानकारी अनुसार वर्ष 1999 से पहले अंबाला छावनी के चारों तरफ के रास्तों पर चुंगी बनाई गई थी और इसका कुछ हिस्सा कैंटोनमेंट बोर्ड को भी चुंगी कर के रूप में दिया जाता था।
वर्जन
एयरफोर्स से लगभग 22 करोड़ रुपये का सेवा शुल्क मिल गया है। रेलवे से भी जल्द ही पांच करोड़ रुपये सेवा शुल्क मिलने की उम्मीद है। वहीं सेना की तरफ लंबित सेवा शुल्क के लिए कार्रवाई की जा रही है। प्राप्त सेवा शुल्क को बोर्ड क्षेत्र में रहने वाले लोगों से जुड़ी मूलभूत सुविधाओं पर खर्च किया जाएगा।
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राहुल आनंद शर्मा, सीईओ कैंट बोर्ड, अंबाला।
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