यूरिया की कमी किसानों पर पड़ रही भारी
- किसान बोले, बारिश के बाद गेहूं की फसल में यूरिया खाद है जरूरी
अमर उजाला ब्यूरो
नारायणगढ़। क्षेत्र में यूरिया खाद की कमी के चलते किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गत सोमवार की देर रात से बुधवार शाम तक क्षेत्र में रुक-रुक कर हुई बारिश ने जहां एक ओर किसानों के चेहरे पर रौनक ला दी थी वहीं अब दूसरी ओर गेहूं की फसल के लिए यूरिया खाद की कमी से किसानों के चेहरों पर मायूसी छा गई है। किसानों का कहना है कि बारिश के बाद व गेहूं की फसल में एक पानी देने के उपरांत यूरिया खाद की काफी आवश्यकता रहती है परंतु क्षेत्र में हो रही यूरिया खाद की कमी से तो ऐसा ही प्रतीत हो रहा है कि कहीं गेहूं की फसल ही प्रभावित न हो जाए।
क्षेत्र के गेहूं उत्पादकों नरेश कुमार, गुलजार सिंह, मनोज कुमार, हरफूल सिंह, किरपाल सिंह, अमरजीत, रामकुमार, अजय कुमार, बलबीर, जगदीश, अमरकांत आदि का कहना है कि वे पिछले दो दिनों से खाद की दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं परन्तु उन्हें यूरिया रिसीव नहीं हो रहा। जिस किसी के पास थोड़ा बहुत यूरिया है, वह पानी से भीगा हुआ तथा जमा हुआ यूरिया ही है, जोकि गेहूं की फसल के लिए नुक्सानदायक है। इन गेहूं उत्पादकों का कहना है कि यदि इसी प्रकार खाद की कमी चलती रही तो आने वाले दिनों में उन्हें गेहूं की फसल को बचाना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
अभी खाद आने की कोई संभावना नहीं : हरप्रीत
इस बारे में खाद के अधिकृत डीलर हरप्रीत सिंह का कहना है कि अभी पांच चार दिन खाद आने की कोई भी संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि पानीपत में स्थित नेशनल फर्टिलाइजर कंपनी द्वारा जो क्षेत्र में यूरिया आता था, वहां से आने की भी संभावना धूमिल हो गई है। दूसरी ओर नारायणगढ़ में स्थित मार्केटिंग पोसैसिंग सोसाइटी के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने गत दिनों बराड़ा से खाद लाकर क्षेत्र के किसानों को वितरित किया था परंतु अब कहीं भी यूरिया खाद उपलब्ध है तथा न ही निकट भविष्य में खाद आने की संभावना है। किसानों ने क्षेत्र के प्रतिनिधि एवं प्रशासन से मांग की है कि गेहूं उत्पादकों की इस जटिल समस्या को देखते हुए वे उनके लिए किसान यूरिया उपलब्ध करवाएं, जिससे किसानों को इस जटिल समस्या से छुटकारा मिल सके।