फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिविल अस्पताल स्टाफ ने बिना पोस्टमार्टम किए थमा दिया शव

विज्ञापन
विज्ञापन
- संस्कार से पहले पुलिस ने गांव से वापिस मंगवाकर करवाया पोस्टमार्टम
विज्ञापन

पेज नंबर चार की लीड ...
फोटो नंबर : : 01
सिविल अस्पताल स्टाफ ने बिना पोस्टमार्टम किए थमा दिया शव
- संस्कार से पहले पुलिस ने गांव से वापिस मंगवाकर करवाया पोस्टमार्टम
- सड़क हादसे में घायल हुए खुड्डा के राम किशन ने कैंट उपचार के दौरान तोड़ा दम
- मामले की सूचना मिलते ही फूले अस्पताल और पुलिस प्रबंधन के हाथ-पांव घंटों तक रही असमंजस की स्थिति
अमर उजाल ब्यूरो
अंबाला कैंट।
सिविल अस्पताल में डॉक्टरों व स्टाफ की एक बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। एक्सीडेंट में घायल हुए खुड्डा के 52 वर्षीय राम किशन अस्पताल की एमरजेंसी वार्ड में भर्ती थे। यहां रविवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया। अस्पताल स्टाफ ने मृतक के परिवार वालों से केवल लिखापढ़ी करवाकर शव बिना पोस्टमार्टम किए ही उनके हवाले कर दिया। राम किशन के बेटे ने पिता की मौत की जानकारी और शव को गांव में ले आने की सूचना जब महेश नगर पुलिस को दी तो पुलिस के भी हाथ पांव फूल गए। पुलिस हरकत में आई जिसके बाद शव को गांव से दोबारा सिविल अस्पताल में लाकर पोस्टमार्टम करवाया।
कार्रवाई न कराने को कह बेटा ले गया शव
गांव खुड्डा के रहने वाले मृतक रामकिशन के बेटे विजय ने बताया कि 19 जनवरी को उसके पिता को एक बाइक सवार ने गांव के पास टक्कर मार दी जिससे वह बुरी तरह घायल हो गए थे। पिता को कैंट सिविल अस्पताल लाए थे। यहां से उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया था। पीजीआई में उनके सिर के ऑपरेशन के बाद उन्हें वापस कैंट सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया था। रविवार सुबह लगभग साढ़े सात बजे उनकी मौत हो गई। पिता की मौत की सूचना यहां के स्टाफ को दी जिसके बाद कोई कार्रवाई न करने की बात लिखकर देने के बाद पिता का शव ले गए। मामला एक्सीडेंट से जुड़ा था इसलिए गांव से महेश नगर पुलिस को फोन पर पिता की मौत और शव को गांव में ले आने की सूचना दी और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं।
विज्ञापन

सूचना मिलते ही फूले पुलिस और अस्पताल प्रबंधन के हाथ पांव
अस्पताल प्रबंधन ने एक्सीडेंट में हुई मौत के मामले में लापरवाही बरती और बिना पोस्टमार्टम के शव परिजनों के हवाले कर दिया जो पुलिस की जांच को प्रभावित कर सकता था। मृतक के बेटे की सूचना पर पुलिस ने तुरंत संज्ञान लेते हुए पोस्टमाटज्ञम के लिए शव सिविल अस्पताल में मंगवा लिया। यहां कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद शव पोस्टमार्टम करवाया। इसके बाद ही शव परिजनों के हवाले किया।
तीन घंटों तक रही असमंजस की स्थिति
अस्पताल की ओर से पुलिस को भेजी गई सूचना के मुताबिक रामकिशन ने सुबह लगभग साढ़े 7 बजे दम तोड़ दिया था। उनके परिजन अस्पताल को लिखकर देने के बाद शव ले गए थे। वहां परिवार दुख से बिलख रहा था और अंतिम संस्कार की तैयारियां भी शुरू हो चुकी थीं। पुलिस के हरकत में आने के बाद रामकिशन के शव को सुबह लगभग साढ़े दस बजे गांव से वापस अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए लाया गया तो यहां मौजूद स्टाफ के पैरों तले जमीन खिसक गई। ड्यूटी बदल चुकी थी और इमरजेंसी वार्ड में तैनात स्टाफ को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए इमरजेंसी वार्ड में तैनात डॉक्टरों और स्टाफ ने इस मामले की सूचना एसएमओ दी जिसके बाद दोबारा से कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद शव का पोस्टमार्टम करवाया गया।
गांव खुड्डा के रामकिशन सड़क हादसे में घायल हो गए थे जिनकी रविवार सुबह कैंट सिविल अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। उनके परिवार को कार्रवाई के बारे में पता नहीं था इसलिए वह अनजाने में शव को अपने साथ गांव ले गए थे। रामकिशन के बेटे ने ही पुलिस के इस बारे में बताया जिसके बाद रामकिशन के शव को गांव से अस्पताल में लाकर उनका पोस्टमार्टम करवाया गया।
विज्ञापन

- एएसआई सुल्तान सिंह, जांच अधिकारी महेश नगर थाना।
मृतक के बेटे ने ही अस्पताल प्रबंधन को बताया था कि उनके पिता की मौत हो गई है। ड्यूटी स्टाफ ने शायद उनकी मौत को कुदरती समझते हुए लिखित में उनकी सहमति देने के बाद शव उनके हवाले कर दिया था। फिर भी इस बारे में मैं उस वक्त ड्यूटी पर तैनात पूरे स्टाफ से बात करूंगा। मेरी गुजारिश है कि कोई भी डॉक्टर या स्टाफ अपनी पूरी तसल्ली किए बिना कोई भी कार्रवाई न करे ताकि किसी को भी परेशानी न उठानी पड़े।
- डॉ. सतीश, एसएमओ कैंट सिविल अस्पताल।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें