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सर्वेक्षण टीम आने से पहले जागा नगर निगम, 1250 अंकों की परीक्षा में पास होना कठिन

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फोटो नंबर : 3 व 4
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नकदी सम्मान के सहारे स्वच्छता रैंकिंग में सुधार लाने की कवायद में जुटा नगर निगम
निगम की ओर से शुरू की गईं तमाम योजनाएं रहीं पूरी तरह फेल, 5000 अंकों की परीक्षा में पास होना कठिन
बीते साल की स्वच्छता रैंकिंग में आया था सुधार, 308 से 159वें पायदान पर पहुंचा था अंबाला
मगर, इस बार धरातल पर जगह-जगह गंदगी के ढेर लगने से कम नंबर मिलने के आसार
तरुण अग्रवाल
अंबाला सिटी। स्वच्छता के मामले में शहर की रैंकिंग में सुधार हो और अंबाला के माथे से गंदे शहरों में शुमार होने का दाग धुले, इसके लिए नगर निगम अब नींद से जागा है। चार जनवरी से देशभर में स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 शुरू हो चुका है और सर्वेक्षण टीम आने से पहले हर व्यवस्था को चाक-चौबंद करने में निगम जुट गया है। हालांकि जहां पुरानी योजनाएं पूरी तरह से फेल हो चुकी हैं, वहीं अब नकदी सम्मान के सहारे नगर निगम रैंकिंग में सुधार लाने की कवायद में है। धरातल पर हालात अब भी खराब हैं, जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं। लोग सफाई न होने से परेशान हैं। ऐसे हालात में विभिन्न वर्गों में 5000 अंकों की परीक्षा में पास होना निगम के लिए कठिन होगा। अंबाला की रैंकिंग में कोई सुधार होगा, ऐसा प्रतीत नहीं होता। पिछले सर्वे में अंबाला देशभर में 308 से 159वें पायदान पर आ गया था। इस बार निगम अफसरों की योजना अंबाला को पहले 40वें स्थान में लाने की है।
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ये शुरू हुईं थीं योजनाएं, हालात खराब
1. रैंकिंग सुधारने के लिए नगर निगम ने डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन योजना चलाई थी, ताकि हर घर से कूड़ा उठ सके। साथ ही पक्के कर्मचारियों को भी सफाई की कमान सौंपी थी।
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मौजूदा हालात : डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन अभियान पूरी तरफ विफल रहा। मजबूरन निगम ने टेंडर रद कर दिया था। कई बार टेंडर लगाने के बाद भी कोई नहीं आया। वहीं पक्के कर्मचारी भी आए दिन वेतन न मिलने के कारण हड़ताल पर जा रहे हैं।
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2. ट्विन सिटी में लोहे के डस्टबिन लगाए गए थे, ताकि सभी लोग गीले व सूखे कूड़े को अलग-अलग डस्टबिन में डालें और सफाई व्यवस्था बनी रहे।
मौजूदा हालात : जहां भी डस्टबिन लगाए थे, अत्यधिक जगहों से यह डस्टबिन गायब हो गए हैं। सड़कों पर जाते समय कूड़ा कहां डालें, यह समस्या आ रही है।
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3. कूड़ा कलेक्शन के लिए ऑटो व टिपर्स की खरीद की गई थी, ताकि हर घर से कूड़ा उठाया जा सके। वहीं सभी घरों के बाहर यूनिक आईडी भी लगाई गईं थीं, ताकि हर घर से कूड़ा उठ रहा है या नहीं, इसके बारे में पता लगाया जा सके।
मौजूदा हालात : टेंडर समाप्त होने के कारण यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से ठप हो गया है और खरीदे गए ऑटो व टिपर्स कंडम की स्थिति में आ गए हैं। इस कारण निगम एरिया में सफाई व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।
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4. निगम के सफाई कर्मचारियों की हाजिरी बायोमैट्रिक सिस्टम से लगेगी। रैंकिंग में सुधार के लिए यह जरूरी कदम है। अभी ज्यादातर कर्मचारियों की मैन्युअल तरीके से हाजिरी लग रही है।
मौजूदा हालात : इस योजना को बीच में बंद कर दिया था, लेकिन एक बार फिर से इस योजना पर विचार किया जा रहा है और दोबारा से बायोमैट्रिक सिस्टम से हाजिरी लगाने की प्रक्रिया जारी की गई है।
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5. कई जगहों पर निगम द्वारा लाखों रुपये खर्च करके डंपिंग प्वाइंट बनाए गए ताकि सूखे और गीले कूड़े को अलग-अलग करके पटवी प्लांट में भेजा जा सके।
मौजूदा हालात : कई डंपिग प्वाइंटों को बंद कर दिया गया है, जिस कारण कूड़े को सीधे पटवी प्लांट में भेजा जा रहा है। लेकिन, वहां पर कार्य शुरू न होने के कारण कूड़ा वहीं पर एकत्रित हो रहा है।
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इन वर्गों में मिलेंगे अंक और क्या है स्थिति
प्रमाणीकरण प्रक्रिया में 20 प्रतिशत अंक स्टार रेटिंग के दिए जाएंगे। जिस शहर में जितने अधिक अंक होंगे उस शहर को उतने अधिक अंक दिए जाएंगे। इसके साथ ही 5 प्रतिशत अंक शौचमुक्त शहर के लिए दिए जाएंगे, जोकि 1250 अंकों का होगा।
- प्रत्यक्ष अवलोकन प्रक्रिया में स्लम एरिया, पुराने शहर व अन्य क्षेत्रों में गंदगी को देखा जाएगा जहां जितनी कम गंदगी मिलेगी उस शहर को उतने अधिक अंक मिलेंगे। वहीं इसमें इन क्षेत्रों में बिजली, क्षेत्र में खुली हवा आ रही है व अन्य पहलुओं को देखा जाएगा। जिसमें अंकों को विभाजित किया गया है। यह भी 1250 अंकों का होगा।
- नागरिक प्रतिक्रिया में लोगों से सवाल पूछे जाएंगे कि क्या वह स्वच्छता सर्वेक्षण के बारे में जानते हैं, क्या आप सफाई से खुश हैं, क्या गीला व सूखा कूड़ा अलग किया जाता है व अन्य प्रश्नों के उत्तर के आधार पर 1250 अंकों में से नंबर दिए जाएंगे।
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इसमें मुख्य रूप से सेविस स्तर की प्रक्रिया के है जिसके अंतर्गत नगर निगम को मुख्य रूप से कार्य करने की आवश्यकता है। जिसके कुल 25 प्रतिशत यानि कुल 1250 अंक मिलेंगे। इसमें भी विभिन्न पहलुओं को जोड़ा गया है।
कूड़ा निस्तारण : 30 प्रतिशत यानी 375 अंक
कूड़ा निस्तारण के लिए सबसे अधिक 30 प्रतिशत अंक मिलेंगे, लेकिन पिछले कई सालों से पटवी प्लांट पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। अभी तक इसको चलाने की योजना नहीं है। वहीं कैंट में लाखों रुपये की लागत से बनाए गए डंपिंग प्वाइंट को भी बंद कर दिया है।
कूड़ा उठान को सही जगह पहुंचाना : 27 फीसदी यानी 338 अंक
कूड़े के इकट्ठा करने और उनको सही जगह पहुंचाने के लिए डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की योजना ठप हो गई है और इतने सफाई कर्मचारी नहीं हैं कि ट्विन सिटी के हर घर से कूड़ा उठा सकें और उसका निपटान भी कर सकें। वहीं लोगों ने 150 से लेकर 200 रुपये तक निजी रेहड़ी वालों को कूड़ा उठाने के लिए लगाया है।
स्थायी स्वच्छता : 25 प्रतिशत यानी 313 अंक
स्थायी स्वच्छता के नाम पर कोई भी सही प्रावधान नहीं है। हर क्षेत्र व कूड़ेदान के बाहर गंदगी का आलम लगा रहा है। जगह-जगह लगाए गए डस्टबिन गायब हो गए हैं। बाकी अन्य 13 प्रतिशत अंकों को पाने के लिए निगम की ओर से बहुत अधिक प्रयास करने पड़ेंगे।
लोगों के व्यवहार में बदलाव : 5 फीसदी यानी 63 अंक
नगर निगम लोगों के व्यवहार में बदलाव के लिए स्कूल-कॉलेजों में जाकर अभियान चला रहा है लेकिन सवाल यह है कि सर्वेक्षण टीम के आने से एक माह पहले इस अभियान का कोई फायदा नहीं होने वाला है।
इनोवेशन : 5 फीसदी यानी 62 अंक
जागरूकता व जनसंपर्क के लिए नगर निगम 20 वार्डों में सक्षम युवाओं को लगाया हुआ है। स्कूल-कॉलेजों में भी प्रचार प्रसार किया जा रहा है। लेकिन, लोगों की भागीदारी के लिए केवल 5 प्रतिशत ही अंक मिलेंगे।
नियम की पालना : 5 फीसदी यानी 62 अंक
शहर में विभिन्न जगहों पर राजनेताओं व नए साल के शुभकामनाओं के होर्डिंग्स लगे हुए हैं। इसको लेकर अब तक नगर निगम की नींद नहीं खुली है। लगातार यह मामला उठने के बाद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
क्षमता निर्माण : 3 फीसदी यानी 37 अंक
नगर निगम में कर्मचारियों की जितनी जरूरत है, उससे काफी कम हैं। यही नहीं सेलरी नहीं मिलने के कारण आए दिन धरना-प्रदर्शन होते रहते हैं। इसको लेकर नगर निगम के अधिकारियों पर सवाल उठते रहते हैं।
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स्वच्छता रैंकिंग को लेकर नगर निगम कमिश्नर सत्येंद्र सिवाच से सीधी बातचीत
1. प्रश्न : पिछले दो सालों में स्वच्छता रैंकिंग में सुधार हुआ है। इस बार क्या उम्मीद है।
उत्तर : पिछले दो सालों में स्वच्छता रैंकिंग में काफी सुधार हुआ है। इस बार भी काफी योजनाएं बनाई गई हैं ताकि रैंकिंग को सुधारा जा सके।
2. प्रश्न : ऐसी कौनसी योजना बनाई गई है ताकि रैंकिंग में अधिक सुधार आए।
उत्तर: इस बार 10 विभिन्न वर्गों में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इसमें 1100 से लेकर 2 लाख रुपये तक की राशि का प्रावधान रखा गया है। इसमें सरकारी कार्यालय से लेकर सामाजिक संगठनों को भी शामिल किया गया है।
3. प्रश्न: पिछली बार सामाजिक लोगों को इस बारे में अधिक जानकारी नहीं थी, इस बार क्या किया जा रहा है।
उत्तर : पिछले काफी समय से सक्षम युवाओं को स्वच्छता एप के बारे में जानकारी देने और लोगों को स्वच्छता सर्वेक्षण के बारे में बताने के लिए लगाया गया है, ताकि आमजन भी इसमें अपनी पूर्ण भागीदारी निभाए। साथ ही हर वर्ग के साथ मीटिंग ली जा रही है और पीपीटी के माध्यम से जानकारी दी जा रही है।
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4. प्रश्न : होर्डिंग्स स्वच्छता रैंकिंग पर असर डाल सकते हैं।
उत्तर : होर्डिंग्स लगाने के लिए जगह और रेटों पर विचार किया जा रहा है, ताकि निश्चित स्थान पर ही होर्डिंग्स लगाए जाएं। बाकी कर्मचारियों को अवैध होर्डिंग्स हटाने के निर्देश दे दिए हैं।
5. प्रश्न : कर्मचारियों को सम्मानित करने की योजना थी, कब किए जाएंगे सम्मानित।
उत्तर: अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों को अगले हफ्ते सम्मानित करने की योजना बनाई जा रही है ताकि उन्हें प्रोत्साहित किया जा सके।
6. प्रश्न : स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान मॉनीटरिंग में काफी दिक्कत आती है। इसके लिए क्या व्यवस्था की गई है।
उत्तर : कर्मचारियों को टैबलेट दिए गए हैं और गाड़ियों पर भी जीपीएस सिस्टम लगाया गया है, ताकि कूड़े के उठान से लेकर लिफ्टिंग के बारे में पता चल सके।
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