अंबाला सिटी। नेग्लिजेंसी बोर्ड के समक्ष आने वाली शिकायतों में अधिकतर मामलों में विभाग की ओर से क्लीन चिट दी जा रही है। 2020 से लेकर अब तक बोर्ड के समक्ष सिर्फ 69 शिकायतें पहुंची। इनमें से 90 प्रतिशत शिकायतें निजी अस्पतालों की ही मिली है।
इन शिकायतों में दुर्व्यवहार के मामले अधिक देखने में आए हैं। जांच के बाद सभी शिकायतों का निपटारा कर दिया गया है। इनमें से सिर्फ एक या दो मामलों में ही बोर्ड द्वारा कार्रवाई की गई है। वर्तमान में चार शिकायतें ही लंबित हैं। इन पर फैसला आना बाकी है।
अधिकतर मामलों में होते हैं समझौते
बोर्ड के समक्ष आई शिकायतों में या तो समझाैता हो जाता है या फिर चिकित्सकों को क्लीन चिट दे दी जाती है। विभाग का कहना है कि 10 प्रतिशत मामलों में मरीज समझौता करके उपचार का भुगतान ले लेते हैं। इसके बाद मरीज अपनी शिकायत वापस ले लेते हैं। इसके अलावा अन्य मामलों में लापरवाही नहीं मिलती। उनमें सिर्फ बहस ही पाई जाती है। सिर्फ दो या तीन मामले ऐसे होते हैं। इनमें लापरवाही मिलती है। वर्तमान में जिला अंबाला में चार शिकायतें लंबित हैं। इनमें से एक शिकायत पर टिप्पणी करके पुलिस विभाग को भेज दी हैं।
यह होता है नेग्लिजेंसी बोर्ड
उपचार के दौरान अगर किसी चिकित्सक या अस्पताल प्रबंधन की ओर से मरीज का गलत उपचार या उपचार के दौरान लापरवाही होती है। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए नेग्लिजेंसी बोर्ड स्थापित किया जाता है। इस बोर्ड की देखरेख सीएमओ की ओर से की जाती है। किसी भी मामले की सुनवाई के लिए दो आईएमए सदस्य, दो बीमारी से संबंधित विशेषज्ञ, जिला नागरिक अस्पताल की पीएमओ सहित एक अन्य अधिकारी होता है। मामले की सुनवाई के बाद बोर्ड की टिप्पणी होती है। इसकी रिपोर्ट कार्रवाई के लिए आईएमए और निदेशालय भेजी जाती है। इसके बाद ही निर्देशों के आधार पर कार्रवाई होती है।
पांच वर्षों में इस प्रकार आईं शिकायतें
वर्ष कुल शिकायतें
2020 3
2021 20
2022 17
2023 18
2024 7
2025 से अभी तक चार मामले आए हैं। जिन पर जांच जारी है।
वर्जन
मेरे संज्ञान में अभी तक कोई गंभीर शिकायत नहीं आई है। अगर आएगी तो उस पर निष्पक्षता के साथ ही कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. सत्यपाल बहल, आईएमए प्रधान अंबाला सिटी।
बोर्ड में जो भी शिकायतें आती हैं उनका जल्द से जल्द निपटारा कर दिया जाता है। इसके लिए विशेषज्ञ की टीम गठित की जाती है। जो संबंधित उपचार के बारे में विशेष जानकारी रखता हो। इसके बाद ही बोर्ड में शामिल किया जाता है।
-डॉ. राकेश सहल, सीएमओ अंबाला।