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Ambala News: जिले के 62 गांव नशा-मुक्त घोषित, निगरानी के लिए बनाई टीमें

Thu, 17 Jul 2025 02:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
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अंबाला। पुलिस ने जिले के 62 गांवों को नशा-मुक्त घोषित किया है। इसी प्रकार अंबाला रेंज के अधीन जिला यमुनानगर के 119 गांव और जिला कुरुक्षेत्र के 82 गांव शामिल हैं। वहीं नशे की लत में पड़े व्यक्तियों के तहत अंबाला में 23, यमुनानगर में 44 और कुरुक्षेत्र में 86 व्यक्तियों की पहचान की गई है। इसके तहत अंबाला के 18, यमुनानगर के 36 और जिला कुरुक्षेत्र के 45 व्यक्तियों का उपचार शुरु किया गया है। वहीं नशा बेचने वाले 38 व्यक्तियों की पहचान की गई है। इस संबंध में पुलिस महानिरीक्षक अंबाला मंडल पंकज नैन ने बुधवार को अपने कार्यालय में टीमों के साथ गोष्ठी करके उनके कार्य का मूल्यांकन किया और आवश्यक दिशा-निर्देश एवं मार्गदर्शन प्रदान किया।
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उन्होंने कहा कि अभियान के तहत नशा-प्रभावित गांवों में खेल-कूद गतिविधियों का आयोजन कर अधिक से अधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई। इन आयोजनों के दौरान युवाओं को नशा न करने की शपथ भी दिलाई ताकि वे स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली को अपनाएं। उन्होंने कहा कि ड्रग्स और नशीले पदार्थों के खिलाफ अंबाला रेंज ने अभियान शुरु किया है और इस अभियान का नाम मैदान दिया है। इस अभियान का उद्देश्य नशे की बढ़ती समस्या पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना तथा समाज को नशा-मुक्त बनाना है। अभियान के अंतर्गत प्रत्येक जिले में विशेष टीमें गठित की गई हैं, जिनको मनोवैज्ञानिकों एवं मनोचिकित्सकों द्वारा विशेष प्रशिक्षण भी दिलवाया गया है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से इन टीमों को नशे की लत से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान, उनकी काउंसलिंग तथा आवश्यक उपचार सुनिश्चित करने में सक्षम बनाया गया है। मैदान अभियान न केवल नशा तस्करी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक पुनर्वास और जन-जागरूकता के माध्यम से स्थायी समाधान की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
ग्रामीण क्षेत्रों की तरफ विशेष ध्यान
नशा मुक्त टीमों द्वारा नशा-प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर सर्वे किया जा रहा है। सर्वे के माध्यम से नशे की लत में पड़े व्यक्तियों की पहचान कर, उनकी काउंसलिंग की जा रही है और उपचार के लिए प्रेरित कर अस्पतालों में इलाज भी शुरू करवाया जा रहा है। इसके साथ ही उन गांवों का भी दौरा किया जा रहा है जो पहले नशा-मुक्त घोषित किए जा चुके हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यहां पुनः किसी प्रकार की नशा संबंधी गतिविधियां तो प्रारंभ नहीं हुई हैं।
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