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सीएचसी बराड़ा : अंग्रेजी दवाईयां लिख रहे आयुष के डाक्टर

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स्वास्थ्य मंत्री जी! बराड़ा सीएचसी का भी करें दौरा
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अमर उजाला ब्यूरो
बराड़ा। सीएचसी बराड़ा में डाक्टर मरीजों को बाहर की दवाइयां लिख रहे हैं। यहां तक कि आयुष के डाक्टर भी देसी दवाइयां न लिखकर अंग्रेजी दवाइयां लिख रहे हैं। सीएचसी के डाक्टर एंटीबायोटिक दवाइयां तो लिखते ही लिखते हैं, जबकि सरकार ने मरीजों के इलाज के लिए दवाइयों की सप्लाई दी हुई है।
सीएचसी बराड़ा में उपचार करवाने आए मरीजों व तीमारदारों ने कहा कि सीएचसी बराड़ा में मरीजों को डाक्टर समय पर नहीं मिलते। रात में डाक्टर यहां पर होते ही नहीं, जबकि दिन में भी डाक्टर पूरा समय नहीं देते। मरीजों ने कई बार स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से बराड़ा सीएचसी का दौरा किए जाने की मांग की है। मरीजों ने बताया कि सीएचसी में केवल एमएलआर काटी जाती है और फिर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। यहां मात्र प्राथमिक उपचार ही हो पाता है। यहां एसएमओ सहित पांच मेडिकल अधिकारी, फार्मासिस्ट व नर्सों के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं।
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पीएचसी उगाला का भी यही हाल
यही हाल पीएचसी उगाला का है। मरीज डाक्टरों की इंतजार कर प्राइवेट क्लीनिकों में इलाज करवाने को मजबूर हैं। मरीज विजय कुमार, शेर सिंह व कमलेश ने बताया कि डाक्टर पैरासीटामोल, सीट्राजीन व एमोक्सीसीलन कैप्सूल से ही मरीजों का इलाज करते हैं। सरकार ने सीएचसी व पीएचसी में अंग्रेजी व देसी दवाओं की सप्लाई दी हुई है। बावजूद इसके यहां के साल्ट नहीं है बल्कि कंपनी के ब्रांड नेम से दवाएं लिख रहे हैं जबकि इन दवाओं का लिखना मना है। एक डाक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सरकारी सप्लाई में दवाएं एथीकल कंपनी की नहीं बल्कि जेनेरिक कंपनी की होती हैं।
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आयुष डाक्टर लिख रहे एलोपैथिक दवाएं
आयुष विभाग के डाक्टर देसी दवाइयां नहीं लिखते, बल्कि अंग्रेजी पद्धति से मरीजों का इलाज कर रहे हैं। हालांकि वे आयुर्वेदिक दवाएं ही दे सकते हैं, लेकिन यह डाक्टर एलोपैथिक दवाएं लिख रहे हैं। ऐसे में मरीज पर यह कभी भी भारी पड़ सकती हैं।
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सीएचसी में होने वाली सप्लाई की दवाइयां ही लिखी जाती हैं। अगर ऐसा है तो जांच होगी। वहीं आयुर्वेदिक दवाइयां की सप्लाई न के बराबर ही आती है।
- डा. बीरबल, इंचार्ज, सीएचसी बराड़ा।
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देसी दवाइयां सप्लाई में आ रही हैं। लिखी भी जाती हैं। एलोपेथिक दवाइयां इसलिए लिखनी पड़ रही हैं क्योंकि कई बार रोग जल्द ठीक नहीं हो पाता।
- अमित कुमार, आयुष के डाक्टर।
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