बारिश बनी मुसीबत, घर व दुकानों में घुसा पानी, मारकंडा में उफान से दहशत
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बारिश बनी मुसीबत, घर व दुकानों में घुसा पानी, मारकंडा में उफान से दहशत
- खुले पड़े नाले बन रहे लोगों के लिए बने मुसीबत
- सड़कों पर बने गड्ढों में पानी, लोगों के लिए खतरा
- मारकंडा नदी भी हैं उफान पर, गोला गांव के लोगों में दहशत
2 सितंबर
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी/नारायणगढ़/मुलाना। बारिश व प्रशासन के अधूरे इंतजाम से जहां बारिश लोगों के लिए मुसीबत बन गया, वहीं सड़कों पर जलभराव से परेशानियां हुईं। लोगों के घरों व दुकानों में पानी भर गया, जबकि मारकंडा नदी उफान पर है और गांव गोला के लोग सहमे हुए हैं। हालांकि मौसम विभाग अभी और बारिश की उम्मीद जता रहा है, जबकि बीती रात को हुई बारिश के कारण परेशानियां झेलनी पड़ीं।
गांव मछौंडा के रहने वालों में कुलविंद्र सिंह, गुरजिंद्र, गुरविंद्र, केसर सिंह, प्रवीण, रंजीत, चरणजीत, सरदारा सिंह, जसविंद्र सिंह, रविंद्र सिंह, उषा देवी, बाला देवी, शंकुतला, अंग्रेज कौर आदि ने बताया कि वे कितनी ही बार नगर निगम को शिकायत कर चुके है परंतु किसी भी तरह की कोई सुनवाई ही नहीं की जा रही है। वहां के निवासियों ने बताया कि इस क्षेत्र की मुख्य सड़क से गुजर रही पुली पूरी तरह से ब्लाक हो रखी है, जिसकी सफाई नहीं की गई। शिकायतें करने बाद यहां पानी की निकासी करवाने के लिए सड़क को नाले के ऊपर से ही तोड़ दिया जो एक बहुत बड़े गढ्ढे रूप में बन गया और अब यही सड़क से गुजरने वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। पानी भर जाने के कारण इस गड्ढे में वाहन फंस रहे हैं, जबकि कईं लोग घायल हो चुके हैं। तकरीबन 10 से 12 लोग घायल होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं। इसके अलावा निगम द्वारा पानी निकासी के लिए पाइप भी रखे हैं, लेकिन इसका काम भी लटका हुआ है। करीब आठ फुट गहरा नाला भी खुला है, जो किसी बड़ी घटना का कारण बन सकता है।
टिंबर मार्केट में जलभराव
अंबाला सिटी की टिंबर मार्केट में जलभराव की समस्या तस से मस नहीं हो रही है। थोड़ी सी बारिश होने से टिंबर मार्केट में गलियां पानी से लबालब भर जाती हैं और वहां से गुजरने वाले दुकानदारों और लोगो को परेशानी होती है। दुकानदारों ने बताया कि यह पानी कई कई दिनों तक गलियों में भरा रहता है क्योंकि आस पास नालियां न होने के कारण यहां से पानी की निकासी नहीं हो पाती है। जिसको लेकर वह कई बार नगर निगम में शिकायत भी कर चुके है परंतु इस समस्या का निदान नहीं किया जा रहा है।
- उधर, मारकंडा नदी में बरसाती पानी आने से लोगों में दहशत है। इसके साथ लगते गांव गोला के लोग सहमे हुए हैं। इसी मानसून सीजन में दो बार मारकंडा नदी का पानी गांव में घुस चुका है, जिससे लोगों का काफी नुकसान भी हुआ है। गांव के रहने वाले सुनील कुमार, सतीश, माया राम, राम अवतार ने बताया कि मारकंडा नदी के किनारे बसे गांव जफपुश्र, पपलौथा, तंदवाल, घेलड़ी व सबगा सहित कई गांवों में खड़ी फसलों का भारी नुकसान हो सकता है। मारकंडा नदी के उफान पर आने से नदी के किनारे रहने वाले गांवों के लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
- नारायणगढ़ में हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्र में हो रही भारी बारिश के चलते क्षेत्र की सभी नदियां उफान पर है। नदियों में आए पानी से किसानों के जमीनों का भूमि कटाव भी पूरे जोर शोर से हो रहा है। नारायणगढ़ में नदियों के साथ लगते गांव डैहर, अम्बली, गदौली आदि गांव में मारकंडा नदी में आए भारी पानी से भूमि कटाव हो रहा है। गांव गदौली के स्थानीय लोगों लाल सिंह, सोहन लाल ,राजू, सोमनाथ व प्रकाश चंद का कहना था कि मारकंडा नदी में आए भारी पानी से उनके गांव में भारी भूमि कटाव हो रहा है। उनका कहना था कि इस भूमि कटाव में रामपाल फौजी की एक एकड़ फसल कर्मचंद की 2 एकड़, शिव कुमार की एक एकड़, धर्मपाल शर्मा की एक एकड़ फसल व अन्य गांव वालों की भी काफी फसल अब तक मारकंडा नदी में गिर गई है। उनका कहना था कि किसानों की फसल लगभग पकने की तैयारी पर है जिस कारण कुछ एक फसल अक्तूबर महीने में आनी शुरू हो जाएगी, वही किसानों का गन्ना भी अगले अक्तूबर महीने से शुरू हो जाएगी। मगर अधिकतर फसल नदी की भेंट चढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना था कि उनको इस फसल का मुआवजा मिलना चाहिए। वहीं जब इस बारे गांव गदौली के सरपंच से बात की गई तो सरपंच सुखदेव सैनिकों कहना था कि उन्होंने पहले भी प्रशासन को अवगत कराया था कि उनके गांव गदौली में काफी भूमि कटाव हो रहा है। संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने बांध के पर तो मिट्टी के थैले लगा दिए थे लेकिन अब शुक्रवार वह शनिवार को आए भारी पानी से अधिकतर थैले पानी के तेज बहाव में बह चुके हैं। सरपंच सुखदेव सैनी कहना था कि प्रशासन को इस और विशेष नजर रखनी चाहिए क्योंकि सबसे ज्यादा भूमि कटाव गदौली मौजा में ही हो रहा है।
- गोला गांव में बेगना नदी का पानी आना अब तो जैसे हर रोज की बात हो गई है । हालात बदतर है चले है । लगभग एक महीने में बेगना नदीं सात बार गांव में मार कर चुकी है। वहीं प्रशासन की अनदेखी जारी है। प्रशासन की तरफ से पानी को गांव में आने से रोकने के लिए कोई भी प्रबंध नहीं किया गया है । ग्रामीण ही अपने घरों के आगे मिट्टी की मेढ़ बनाकर पानी को रोकने की नाकाम कोशिश कर रहे है । कई ग्रामीणों के घरों में तो हर बार पानी आने से घर की दीवारें गिरने की हालत में है। वहीं इस मामले में नहरी विभाग के एसडीओ सुधीर कुमार का कहना है कि गांव में पानी आने से रोकने का केवल बंध ही उपाय है, जिसे बारिश के मौसम के बाद बनाया जाएगा।