अंबाला। डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए मानसून से पहले ही स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। शहरी क्षेत्र में डेंगू के लार्वा की जांच के लिए मंगलवार को विभाग ने 50 ब्रीडिंग चेकर को फील्ड में उतारा।
उन्होंने अलग-अलग गली-मोहल्लों में जाकर घरों में जमा पानी के लिए जांचा। पानी की टंकी से लेकर गमलों व छत पर एकत्रित किए सामान को देखा कि कहीं जमा पानी की लारवा को नहीं पनप रहा।
इतना ही नहीं नगर परिषद की तरफ से भी अंबाला कैंट में फॉगिंग शुरू की जा चुकी है। मच्छरों की फौज पर प्रहार करने के लिए परिषद के कर्मचारी अलसुबह ही गली-मोहल्लों में जाकर फॉगिंग कर रहे हैं। अलग-अलग वार्ड का शेड्यूल बनाया है। उसके अनुसार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। वहीं सिटी में निगम की तरफ से 20 वार्डाें में भी फॉगिंग करवाई जा रही है।
ज्यादा लार्वा मिला तो नोटिस : विभाग की तरफ से मैदान में उतारे गए ब्रीडिंग चेकर अधिक मात्रा में लारवा मिलने पर नोटिस भी थमाएंगे। हालांकि पहले वह लोगों को जागरूक भी करेंगे कि वह अपने घर की छतों, फ्रिज और गमलों की ट्रे में साफ पानी न जमा होने दें। साथ ही वह डोर टू डोर जाकर परिवार का डाटा भी लेंगे कि कोई लंबे समय से बीमार तो नहीं हो रहा।
मशीन को लाइसेंस का इंतजार : डेंगू और मलेरिया के मरीजों के लिए वरदान बनने वाली नई एफेरेसिस मशीन पिछले डेढ़ साल से नहीं चल पाई है। अभी तक इस मशीन का चलाने के लिए लाइसेंस ही नहीं मिल पाया है। कैंट के नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक में यह मशीन महज शोपीस बनी है। 40 लाख रुपये की लागत से खरीदी यह मशीन पहले मुख्यालय में रही। करीब छह माह पहले अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल में पहुंची तो अभी तक इसे चलाने के लिए लाइसेंस ही नहीं मिल पाया है।