सात करोड़ के स्वर्ण जयंती द्वार पर फिर विवाद
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
जीटी रोड पर स्वर्ण जयंती द्वार का जैसे-जैसे निर्माण बढ़ता जा रहा है, वैसे ही ‘अंगुलियां उठनी’ भी शुरू हो गई है। करोड़ों रुपये का स्वर्ण जयंती द्वार जिस स्थान पर बन रहा है, क्या यह किसी को फायदा देने के लिए है। पुष्ट सूत्र बताते हैं कि पहले यह द्वार जीटी रोड पर जंडली पुल के निकट प्रस्तावित था। यह जीटी रोड किनारे उस स्थान पर बनना प्रस्तावित था जिसके पास सेना द्वारा राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया है। मगर बाद में इसे लगभग 150 मीटर आगे किया गया। जिले के बड़े अधिकारियों से लेकर अधीनस्थ अधिकारी इस मामले को लेकर चुप्पी साधे हैं, लेकिन दबी जुबान में चर्चाओं का बाजार गर्म होने लगा है। बता दें कि स्वर्ण जयंती द्वार का 18 सितंबर को शिलान्यास समारोह भी विवादों में घिरा रहा था और बाद में यहां से शिलान्यास पत्थर तक हटाना पड़ा था। अब ताजे विवाद को फिर से हवा मिल गई है।
अभी यहां बन रहा
जीटी रोड पर जंडली फ्लाईओवर एवं किंगफिशर पर्यटक स्थल के ठीक बीच में स्वर्ण जयंती द्वार बन रहा है। बताते हैं कि पूर्व में जंडली पुल के पास स्वर्ण जयंती द्वार का निर्माण किया जाना था और यह केवल जीटी रोड के ऊपर बनना था ताकि चंडीगढ़ और अमृतसर की ओर से आने-जाने वाले लोग द्वार का नजारा ले सके। यहां पर यदि द्वार बनता तो यह काफी छोटा रहता और इसपर लागत भी कम आती। मगर बाद में इस द्वार को प्रस्तावित जगह से आगे बनाना तय किया गया और यह स्थान अब पहले से ज्यादा चौड़ा है। इस स्थान के ठीक साथ एक बड़ा मॉल भी है जिसे लेकर अब सरकार की इस योजना पर अंगुलियां उठने लगी है।
सात करोड़ की आएगी लागत
बता दें कि यह द्वार करीब सात करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। द्वार पर अलग-अलग रंग की लाइटों से इसकी सुंदरता बढ़ाई जाएगी। अंबाला के अलावा गुरुग्राम में ऐसा द्वार बनाने की योजना है। द्वार से पहले एवं बाद में डिवाइडर पर आकर्षक लाइटें भी लगाई जा रही है।
अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की सोशल मीडिया इंचार्ज चित्रा सरवारा ने कहा कि जीटी रोड पर साफ नजर आ रहा है कि जनता की करोड़ों रुपये की राशि किसके लिए खर्च की जा रही है। यह पैसे की बर्बादी है। पहले जानकारी मिली थी कि किसी और स्थल पर स्वर्ण जयंती द्वार बनेगा। मगर बाद में यह कहीं और बनाया गया है। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि आखिरकार किसने और किसको लाभ पहुंचाने के लिए द्वार का स्थान बदला। भाजपा व्यापारियों की पार्टी और उन्हें लाभ पहुंचाने के लिए यह पूरा खेल चल रहा है।
इनेलो जिला व्यापार सेल अध्यक्ष ओंकार सिंह ने कहा कि कोई भी द्वार प्रदेश या जिले की आरंभिक सीमा पर बनता है। मगर अब जिस जगह पर स्वर्ण जयंती द्वार बन रहा है वह न तो प्रदेश न ही किसी जिले की सीमा का आरंभिक प्वाइंट है। एक मॉल के आगे द्वार बनाकर बड़ी-बड़ी लाइटें लगा दी गई है। व्यापारियों को लाभ पहुंचाने के लिए जनता के करोड़ों रुपये बहा दिए हैं। इनेलो इस पर चुप नहीं रहेगा और आगामी दिनों पर मौके पर पहुंच कर पुरजोर विरोध जताएगी। जनता के पैसे की बर्बादी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले में इनेलो सरकार से जांच की मांग करेगी।
स्वर्ण जयंती द्वार जिस स्थान पर लगाया जा रहा है वह बिल्कुल भी समझ से परे है। जीटी रोड पर यह द्वार या पंजाब सीमा पर लगना चाहिए था या फिर चंडीगढ़ सद्दोपुर बैरियर स्थित सीमा पर। साफ है कि यहां मॉल के आगे द्वार लगाकर भाजपा सरकार जनता के करोड़ों रुपये बर्बाद कर रही है। ऐसा लग रहा है जैसे मॉल संचालक निर्माण कर रहा है। सरकार आखिरकार यहां ही क्यों करोड़ों की लागत से स्वर्ण जयंती द्वार का निर्माण करना चाहती है। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए और जनता के पैसे बर्बाद करने वालों पर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। इस मामले में पूरा विरोध जताया जाएगा। -अजय गुलाटी, संयोजक, सिटीजन फोरम, अंबाला।
मुझे इस संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं है कि स्वर्ण जयंती द्वार का निर्माण स्थल बदला गया या नहीं। यह मामला पीडब्ल्यूडी बीएंडआर विभाग देख रहा है, वहीं इस संबंध में कुछ ज्यादा बता सकते हैं। -शरणदीप कौर बराड़, डीसी, अंबाला।
सात करोड़ की लागत से स्वर्ण जयंती द्वार बनाया जा रहा है। पहले कुछ असमंजस था और अब उसी स्थान पर स्वर्ण जयंती द्वार बनाया जा रहा है जहां से मुख्यालय द्वारा आदेश जारी किए गए थे। -डीडी कंबोज, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी, अंबाला।