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समर्थन मूल्य की कहानी, किसानों की जुबानी

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समर्थन मूल्य की कहानी, किसानों की जुबानी
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। किसानों ने सरकार की ओर से फसलों के बढ़ाए गए समर्थन मूल्य को मजाक बताया। उन्होंने कहा कि वैसे तो सरकार डेढ़ गुना एमएसपी देने की बात कर रही है, लेकिन फिर भी किसानों को उनकी फसल लगाने की लागत भी वसूल नहीं होगी। ऐसे किसानों के हित का क्या करना, क्योंकि जिस आधार पर सरकार ने धान की फसल का लागत मूल्य 1166 रुपये प्रति एकड़ निर्धारित किया है। उससे अधिक लागत तो फसल को लगाने के लिए किसान मजदूर को ही दे देता है जबकि किसानों को प्रति एकड़ का खर्च लगभग 1560 रुपये आता है। अगर किसानों के लिए एमएसपी बढ़ाना था तो धान का एमएसपी 2340 रुपये मिलना चाहिए था। ऐसे ही अन्य फसलों के दामों की बढ़ौतरी में भी किसानों ने लागत मूल्य से अधिक 50 प्रतिशत अधिक कर एमएसपी तय नहीं किया है। -------------------------
क्या कहते है किसान
किसान मलकीत सिंह ने बताया कि सरकार ने ए2+एफएस के आधार पर फसल की लागत मूल्य निर्धारित की है, लेकिन किसानों को सी2 के अंतर्गत फसलों के लागत मूल्य का निर्धारण करना चाहिए था। सरकार ने जितना लागत मूल्य तय किया है उससे अधिक लागत तो मजदूर ही फसल की लगाई कटाई और अन्य कार्यो के लिए ले जाते है। इसके उपर पेट्रोल का खर्चा व अन्य होने वाले खर्च नहीं गिने गए है। इस कारण सरकार को धान में 200 के स्थान पर 700 रुपये समर्थन मूल्य बढ़ाना चाहिए था।
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किसान गुलाब सिंह ने बताया कि पहले किसानों को 50 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से किसानों को बोनस दिया जाता था जोकि पिछले चार सालों में नहीं मिला है और हरियाणा व पंजाब में सबसे अधिक धान व गेहूं का ही उत्पादन होता है। सरकार ने उन्हीं चार सालों की फसल के बोनस को जोड़ कर समर्थन मूल्य बढ़ा दिया है।
किसान जसविंद्र सिंह ने बताया कि कई फसलें तो ऐसी है जिनका उत्पादन कम है और उनका समर्थन मूल्य बहुत अधिक बढ़ा है लेकिन जिन फसलों का उत्पादन अधिक होता है उनका समर्थन मूल्य नाम के बराबर ही बढ़ाया है, जबकि किसानों को समर्थन मूल्य में और अधिक वृद्धि करनी चाहिए थी।
किसान नरेश छपरा ने बताया कि अगर सरकार को धान की फसल की कीमत बढ़ानी ही थी, तो तीन स्तरों पर बढ़ानी चाहिए थी क्योंकि धान भी तीन तरह की होती है, इसमें सुपर फाईन, बासमती और सिंपल चावल इसके साथ ही अन्य किस्मों के चावल भी उगाए जाते है, जिनकी कीमत बाजार में अलग अलग है, लेकिन सरकार सभी किस्मों के चावल का एक ही रेट दे रही है, जबकि किसानों को चावल की किस्म के अनुसार रेट निर्धारित करने चाहिए थे।
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सूरजमुखी बेच रहे किसानों को करना होगा इंतजार
इस समय जिले भर के किसानों की अंबाला सिटी स्थित अनाज मंडी में सूरजमुखी फसल की खरीद की जा रही है, जोकि 4100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से सरकार को अपनी फसल बेच रहे हैं, लेकिन अब किसानों को सूरजमुखी के लिए 5388 रुपये मिलेंगे। यह रेट अब किसानों को अगले साल मिलेगा जिसके लिए किसानों को अभी एक साल और इंतजार करना होगा।
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