अंबाला सिटी की अनाजमंडी में फसल को कवर करते किसान। संवाद
40 क्विंटल खरीद के फरमान ने बढ़ाई मुसीबत, सरकार से लगाई गुहार, पूरी फसल की एक बार में हो खरीद
संवाद न्यूज एजेंसी
जलबेड़ा। लंबे इंतजार के बाद जैसे ही सूरजमुखी की सरकारी खरीद शुरू हुई, वैसे ही मौसम ने करवट बदल ली। आसमान में छाए काले बादलों ने अन्नदाता की चिंता बढ़ा दी और देखते ही देखते शुरू हुई तेज बारिश ने मंडी में रखी फसल को गीला कर दिया। हालांकि, किसानों और आढ़तियों ने तेजी दिखाते हुए कृषि यंत्रों की मदद से फसल को शेड के नीचे छुपाया। लेकिन इसके बावजूद करीब 20 से 30 फीसदी सूरजमुखी खुले आसमान के नीचे भीग गई।
दोहरी मार से बेहाल हुआ अन्नदाता
अनाज मंडी में फसल लेकर पहुंचे मोहड़ा गांव और 18 माजरी के किसान गुलजार सिंह, दलजीत सिंह और जोगिंदर सिंह ने अपनी पीड़ा सुनाई। उन्होंने कहा कि इस बार उन पर सरकार और प्रकृति दोनों की दोहरी मार पड़ रही है। सरकार ने 25 मई के बजाय 30 मई से खरीद शुरू की। अब जब खरीद शुरू हुई, तो सरकार ने नया फरमान जारी कर दिया कि एक पंजीकरण पर एक दिन में केवल 40 क्विंटल सूरजमुखी ही बेची जा सकती है।
किसानों का कहना है कि 160 रुपये प्रति क्विंटल की लेबर देने के बाद भी उन्हें अपनी बची हुई फसल ट्रालियों में लादकर वापस घर ले जानी पड़ रही है। इससे उनका किराया और समय दोनों बर्बाद हो रहे हैं।
खुली खरीद की उठी मांग
7,721 रुपये प्रति क्विंटल के सरकारी रेट पर बिक रही सूरजमुखी को लेकर किसानों ने सरकार से गुहार लगाई है। मौजूद किसानों ने मांग की है कि मंडी में प्रतिदिन की 40 क्विंटल की सीमा को खत्म कर खुली खरीद शुरू की जाए। जो किसान एक बार मंडी में अपनी फसल ले आया है, उसकी पूरी फसल एक साथ खरीदी जाए ताकि उसे बार-बार चक्कर न काटने पड़ें।