अंबाला। शहर के पंचायत भवन में सोमवार को जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति की बैठक हुई। इसमें लोकसभा सांसद वरुण मुलाना और राज्यसभा सदस्य कार्तिकेय शर्मा सख्त नजर आए। कार्तिकेय शर्मा ने नगर निगम के अधिकारियों से पूछा कि ढाई साल पहले 28 हजार स्ट्रीट लाइटें आई थीं वह अब तक क्यों नहीं लगीं।
इस पर डीएमसी दीपक सूरा ने बताया कि इनके लिए करीब 13 करोड़ का टेंडर लगाया है। इस पर सांसद ने पूछा कि लाइटें लावारिस पड़ी हैं, फिर भी मोटा टेंडर दिया जा रहा है। यह किसे फायदा पहुंचाने की कोशिश है। इस पर अधिकारी संतुष्ट जवाब नहीं दे पाए। जबकि कुछ समय पहले ही चार हजार लाइटें खरीदकर लगाई हैं तो पुरानी लाइटों का ही इस्तेमाल क्यों नहीं किया। इस मामले में सांसद ने जांच के निर्देश दिए।
इसके साथ ही छह घंटे चली बैठक में अनुपस्थित रहने वाले और अपने स्थान पर दूसरों को भेजने वालों के खिलाफ समिति पदाधिकारियों ने नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। समीक्षा के दौरान यह भी पाया कि कार्यालय अध्यक्षों के जवाब उनके अधीनस्थ दे रहे हैं तो दोनों ने बाकायदा सदन में अधिकारियों के नाम लेकर हाजिरी कराई।
इसके बाद सामने आया कि नाै अधिकारी मौके पर नहीं हैं। इन्होंने नहीं आने की सूचना भी नहीं दी। ऐसे में सांसद ने सभी के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। नगर निगम में ढाई साल पहले आईं 28 हजार स्ट्रीट लाइटों और अमरूट-एक स्कीम में ठेकेदार को भुगतान करने के मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों के लिए विजिलेंस जांच के निर्देश दिए। इस दौरान समिति के अध्यक्ष सांसद वरुण मुलाना, सह अध्यक्ष राज्यसभा सदस्य कार्तिकेय शर्मा, मेयर सैलजा सचदेवा और एडीसी ब्रह्मजीत सिंह माैजूद रहे।
बिना काम ठेकेदार को कर दिया भुगतान, विजिलेंस जांच
अमरूम-1 योजना में तीन साल से नगर निगम ने पेयजल पाइप लाइन के काम को पूरा करके पब्लिक हेल्थ विभाग को नहीं दिया। पब्लिक हेल्थ के अधिकारियों ने बताया कि यूएलबी हर बार यही कह देता है कि काम अभी पूरा नहीं है। तीन साल हो गए हैं। सांसद ने अधिकारियों से पूछा कि क्या भुगतान हो गया तो अधिकारी ने बताया कि जिस कंपनी ने काम किया था, उसे भुगतान हो गया। ऐसे में कार्तिकेय शर्मा ने कहा कि इस मामले में भ्रष्टाचार की बू आ रही है, क्योंकि काम से पहले भुगतान नहीं होता। इस मामले की विजिलेंस जांच के निर्देश दिए। जबकि अब अमरुत 2 का भी काम शुरू हो गया।
प्रशिक्षण स्थल पर मिली खामियां
दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना में समिति ने प्रशिक्षण स्थल का निरीक्षण करने के पूर्व में निर्देश दिए थे। यहां निरीक्षण में सामने आया कि 362 बच्चों को प्रशिक्षण दिलाया, जिनमें से 71 को ही प्लेसमेंट मिला। इसके साथ ही आवासीय केंद्र पर निरीक्षण में बच्चों की घटिया गुणवत्ता का भोजन दिया जा रहा था, शिकायतों का निवारण ठीक से नहीं हो रहा था, छात्रावास हाईजैनिक स्थिति में नहीं था। यहां तक कि शौचालय भी गंदे मिले। केंद्र में आरओ तक नहीं था।
बैडमिंटन कोट की लकड़ी खराब
सांसद वरुण ने सिटी के राजीव गांधी खेल स्टेडियम के जर्जर हालातों का मुद्दा उठाया। इस पर मेयर सैलजा सचदेवा ने कहा कि यहां पर खिलाड़ी परेशान होते हैं। इस पर खेल विभाग की तरफ से आए अधिकारी ने बताया कि यहां बैडमिंटन कोट के आधार की लकड़ी पानी से खराब हो गई है। यहां 40 लाख रुपये से इसे ठीक करने की तैयारी है। इस पर सांसद ने सवाल उठाया कि जब तक पानी की समस्या का समाधान नहीं करोगे तो फिर कोट खराब हो जाएगा। पूर्व के बेडमिंटन कोट के नुकसान का कौन जिम्मेदार होगा। सीईओ जिला परिषद को अपनी निगरानी में कार्य कराने के निर्देश दिए।
डीएसओ को कारण बताओ नोटिस के निर्देश
खेलो इंडिया योजना की समीक्षा के दौरान एजेंडा में सांसदों ने देखा कि 35 से 40 खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। इसके साथ ही इस योजना में फंड की मांग भी नहीं की। ऐसे में समिति ने जिला खेल अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही चेताया है कि ऐसी भ्रमित करने वाली जानकारी कोई अधिकारी एजेंडा में न दें।
कुछ काम एजेंडे में नहीं, कई में जानकारी अधूरी
समीक्षा के दौरान सामने आया कि दिशा की बैठक के एजेंडे में कई योजनाओं का शामिल ही नहीं किया था। कई योजनाओं का पुराना डाटा दे दिया। इस पर समिति के अध्यक्ष लोकसभा सांसद और सह अध्यक्ष राज्यसभा सदस्य ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा आगे से अधूरी तैयारी हुई तो कार्रवाई होगी। इसी प्रकार सांसद वरुण ने कहा सीईट के फार्म भरने के नाम पर प्राइवेट सीएससी ने अभ्यर्थियों से वसूली की है। उन्हें रसीद भी नहीं दी। अधिकारी को जानकारी नहीं थी तो उन्हें भी कारण बताओ नोटिस जारी के निर्देश दिए।
कचरा निस्तारण के लिए नहीं मिली 200 गज जमीन
समीक्षा के दौरान सामने आया कि गांव में कचरा निस्तारण के लिए जगह की आवश्यकता है। मगर अधिकारियों ने बताया कि 56 गांवों ने 200 गज जगह नहीं मिली। इस पर सांसद हैरान हुए और पूछा कि कौन सा गांव ऐसा है जिसके पास इतनी जमीन नहीं है। उन्होंने बीडीपीओ को निर्देश दिए कि सभी गांवों से जगह लेकर कचरे का निस्तारण कराएं। कोई गांव नहीं माने तो वह उनसे मिलेंगे।
साइट पर नहीं योजनाओं की जानकारी
अंबाला की बेवसाइट पर कई योजनाओं की जानकारी नहीं है। सांसद वरुण चौधरी ने बैठक की शुरुआत में ही इस मुद्दे को उठाया। इसके बाद जब समीक्षा हुई तो पता चला कि कई योजनाओं में तो किसी एक व्यक्ति ने भी आवेदन नहीं किया। इस पर सांसद ने जिला तकनीकी अधिकारियों सभी योजनाएं बेवसाइट पर डालने के निर्देश दिए। यहां तक कि डायल 112 के बारे में भी जिला की बेवसाइट पर जानकारी नहीं है।