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धीन गांव में नहीं चलते एसडीएम के आदेश, हालात जस के तस

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धीन में नहीं चलते एसडीएम के आदेश, कागजी साबित हुआ खुला दरबार, स्कूल की टूटी दीवार जस की तस
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अमर उजाला ब्यूरो
मुलाना। गोद लिए धीन गांव में डीसी के आदेश पर जनता कैंप लगाना केवल मात्र औपचारिकता ही साबित हुआ है। इस कैंप में जो भी आदेश दिए गए, इन पर अभी तक अमल नहीं हो पाया है। ग्रामीणों की समस्याएं तो दूर होने से रहीं, स्कूल की टूटी दीवार भी जस की तस बिना सीमेंट के खड़ी है।
एसडीएम ने आदेश दिया था कि पटवारी अपने पटवारखाने में बैठे ताकि लोगों को अपने काम के लिए भटकना न पड़े। उनके आदेश के बाद भी पटवारी पटवारखाने में नहीं बैठा। पटवारी को बराड़ा का किराये पर लिया चौबारा ही रास आ रहा है, पटवारी के साथ उसका सहायक भी बैठा है। पटवारी को जब पूछा कि धीन गांव में पटवारखाने में क्यों नहीं बैठते, जबकि आपको तो एसडीएम ने स्वयं कहा था। इस पर पटवारी ने तपाक से कहा कि नहीं मुझे एसडीएम बराड़ा ने खुद कहा था कि बुधवार को केवल एक दिन धीन बैठने को बोला है बाकी के दिन मुझे यहां पर ही बैठना है। मेरे पास करीब 16 गांव हैं, उनको भी देखना होता है। रही बात चौबारे की मैं यहां पर बैठा हूं, मैंने कार्यालय बना रखा है, जिसका मैं मासिक रेंट अपनी जेब से देता हूं।
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उधर, धीन गांव में लगे जनता कैंप में एसडीएम के अध्यक्षता में जनता कैंप लगा था, जिसमें लोगों ने डिपो से राशन न मिलने की बात कही थी। साथ ही लोगों की मांग थी कि स्वास्थ्य केंद्र में लाइट की सुविधा नहीं है, स्कूल के मैदान में कंटीली झाड़ियां उगी हैं, बच्चे खेल नहीं सकते। वहीं प्राइमरी स्कूल की टूटी दीवार को बिना सीमेंट के सहारे ईंटे लगा कर खड़ा कर दिया।
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स्कूल की दीवार बन जानी चाहिए थी, रिपोर्ट मंगवाता हूं : एसडीएम
एसडीएम बराड़ा गिरीश कुमार ने कहा कि पटवारी के गांव धीन में दो दिन बैठने के लिए कहा था ताकि लोगों के जमीन संबंधी कार्य हों। इसके अलावा स्कूल की दीवार बन जानी चाहिए थी। इन सभी की रिपोर्ट मंगवाता हूं। यदि कहीं कमी है, तो उसे दूर करवाकर सारे कार्य निपटाए जाएंगे।
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