रेत माफिया ने तटबंधों को तोड़कर बारसात में कई गांवों को डुबोने की कर दी है व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
शहजादपुर/नारायणढ़। क्षेत्र की नदियों में अवैध खनन का दंश अब बरसातों में कई गांवों के निवासियों को झेलना पड़ेगा। रोक के बावजूद चोरी-छिपे अवैध खनन क्षेत्र में बदस्तूर जारी है। भारी भरकम वाहन तटबंधों से गुजर रहे हैं, जिसकी वजह से बांध कई जगह से धंस चुका हैं। बरसात में नदियां उफान पर आईं तो इन्हीं स्थानों से पानी गांवों में पहुंचकर डुबा सकता है। क्षेत्र के आधा दर्जन से ज्यादा ऐसे गांव हैं जिनमें बीते वर्ष नदियों के पानी ने कहर बरपाया था। मगर प्रशासन की लापरवाही इस बार बरसाती दिनों में गांवों के लोगों पर भारी पड़ने वाली है। गांव बनौदी में बेगना नदी में खनन बदस्तूर जारी है। गांव के लोग अभी से इसको लेकर चिंतित हैं, मगर प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। बता दें कि क्षेत्र में मारकंडा, बेगना व रूण नदियां होकर गुजरती हैं। इन नदियों में ही अवैध खनन का खेल जारी है, जिस वजह से अब बरसाती सीजन में आसपास बसे गांव में जलभराव की स्थिति का खतरा है।
बेगना नदी में कई स्थान पर धंसे
गांव बनौंदी में बेगना नदी में खनन किया जा रहा है। खनन करने के लिए वाहनों को नदी तल तक ले जाया जा रहा है। जिसकी वजह से यहां पर तटबंध को अवैध तरीके से तोड़कर अंदर जाने का रास्ता बनाया गया है। बरसात के दिनों में नदी पूरी तरह से उफान पर रहती है, जिस कारण गांव बनौंदी में जलभराव हो सकता है। इसी गांव के साथ गांव भारापुर, तंदगवाल व बड़ागढ़ हैं, जहां नदी का पानी घुस सकता है। नदी में खनन के लिए माफिया द्वारा यहां पर कई रास्ते बनाए गए हैं, जबकि तटबंध को तोड़ा गया है। गांव के लोग भी इससे परेशान हैं और उन्हें बरसात से पहले ही चिंता सता रही है। उनका कहना था कि नदी किनारे जो बांध बनाया गया है, उसे खनन माफिया वाहनों से तोड़ देते हैं, जिस कारण नदी का पानी गांवों में घुस जाता है।
उन्होंने बताया कि प्रशासन ने अभी तक इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। बीते वर्ष भी बरसात के समय गांव में नदी का पानी घुस गया था, जिस वजह से पूरा गांव जलमग्न हो गया था।
मारकंडा और रूण नदी में भी यही स्थिति
बरसात के समय में मारकंडा और रूण नदी भी गांव वालों को परेशानी में डाल देती हैं। यहां इस समय खनन के चलते तटबंध कई स्थानों से कमजोर हो चुके हैं। गांव गदौली के अलावा अन्य गांवों में बांध कमजोर होने से कटाव का खतरा होने के साथ नदी में उतरने के लिए बनाए गए रास्तों से भी खतरा है। यहां नदी के साथ ग्रामीणों की कृषि भूमि लगती है। नदियां उफान पर आईं तो किसानों की फसल को इससे नुकसान होगा। क्षेत्र के किसान राजू, साहिब सिंह, रॉकी, गुरमीत आदि ने बताया कि कई बार खनन सामग्री लोड करके वाहन उनके गांवों से गुजरते हैं, जिस वजह से गांव के साथ लगते तटबंध कमजोर हैं। इस बारे में प्रशासन को जानकारी दी गई, जबकि कई बार खनन करने वाले वाहनों को भी पकड़ा गया है, मगर कुछ दिनों बाद स्थिति फिर पहले जैसे हो जाती है।
हिमाचल की तलहटी से जुड़ा क्षेत्र
बता दें कि नारायणगढ़ व शहजादपुर क्षेत्र हिमाचल प्रदेश की तलहटी से जुड़े क्षेत्र हैं। बरसात के दिनों में पहाड़ में ज्यादा बारिश होती है जिस वजह से पहाड़ों से आया पानी पूरे वेग के साथ नारायणगढ़ एवं शहजादपुर क्षेत्र में आता है। बहाव तेज होने के कारण अकसर तटबंध कट जाते हैं, जबकि नदी उफान पर आए तो नीचे जुए तटबंधों से पानी गांवों तक में घुस जाता है।
--------------------
जहां कोई कमी आई उसे हल किया जाएगा : वीरेंद्र सिंह
नारायणगढ़ के एसडीएम वीरेंद्र सिंह ने कहा कि नहरी विभाग के अधिकारियों की मीटिंग गत दिनों ली गई थी। उन्हें निर्देश दिए गए थे कि जहां कोई भी कमी नजर आए उसका समाधान जल्द किया जाए। जहां भी नदियों से गांव में पानी घुसने जैसी समस्या पैदा होती है वहां स्वयं जाकर व नहरी विभाग के अधिकारियों को लेकर मौके पर दौरा किया जाएगा। यदि इस समय कहीं कोई समस्या है तो उसका समाधान किया जाएगा।