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%वात्सल्य’ की छांव में जिंदगी को %चैलेंज’ दे रहे स्पैशल बच्चे

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‘वात्सल्य’ की छांव में स्पेशल बच्चे का मिथक तोड़ रहे ये 75 विद्यार्थी
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
‘स्पेशल बच्चे’ ये दो शब्द सुनते ही आम जनमानस में एक विद्यार्थी के प्रति भ्रांति बन जाती है कि यह सामान्य विद्यार्थी की तरह शिक्षा ग्रहण करने में कहीं न कहीं असमर्थ है। लेकिन वात्सल्य की छांव में पढ़ रहे 75 विद्यार्थी इस मिथक को तोड़ रहे हैं। कैंटोनमेंट बोर्ड के वात्सल्य स्कूल में पढ़ रहे 75 विद्यार्थियों का ये कारवां दो से शुरू हुआ था। आज इन्होंने न केवल अपनी काबिलियत साबित की बल्कि
निजी स्कूलों में सामान्य विद्यार्थी के साथ पढ़ते हुए ‘स्पेशल चैलेंज’ को मात दे रहे हैं। वहीं कई विद्यार्थी दसवीं की परीक्षा भी पास कर चुके हैं। देश भर के कैंटोनमेंट बोर्ड में सर्वश्रेष्ठ घोषित किए गए स्पेशल बच्चों के स्कूल वात्सल्य को रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। साल 2014 में दो बच्चों से शुरू हुए इस स्कूल के कई बच्चे मुख्यधारा में शामिल होकर जिंदगी के अगले पड़ाव पर निकल चुके हैं। आज यह स्कूल करीब 75 बच्चों को ‘स्पेशल चैलेंज’ को पार करना सिखा रहा है।
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अभिभावकों ने जताया विश्वास, प्रबंधन खरा उतरा
साल 2014 में स्पेशल बच्चों के लिए अंबाला कैंटोनमेंट बोर्ड के तहत वात्सल्य स्कूल की शुरुआत की गई थी। इस दौरान सिर्फ दो बच्चे ही एडमिशन के लिए आए थे, जिनके अभिभावकों ने स्कूल पर भरोसा किया। इसके बाद पूरे स्टाफ ने क्षेत्र में स्पेशल बच्चों की तलाश शुरू की और अभिभावकों से उनके बच्चों के बारे में बातचीत की। धीरे-धीरे कर अभिभावकों ने भी भरोसा जताया और अपने बच्चों को स्टाफ को सौंप दिया, ताकि उनके बच्चे भी आत्मनिर्भर बन सकें। स्कूल में बच्चों को फिजियोथैरेपी, स्पोर्ट्स, कंप्यूटर आदि में भी ‘मास्टर’ बनाया जा रहा है। इस स्कूल में अब कुरुक्षेत्र, यमुनानगर से भी बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं।

अब तक आठ बच्चों ने पार किया ‘स्पेशल चैलेंज’
इस स्कूल के आठ विशेष बच्चे ऐसे रहे जिन्होंने यह मिथक तोड़ दिया कि स्पेशल बच्चों का दायरा सीमित है। चार छोटे बच्चों को स्कूल में इस तरह से ट्रेनिंग दी गई कि यह बच्चे अंबाला कैंट के एक नामी प्राइवेट स्कूल में सामान्य बच्चों के साथ पढ़ाई कर रहे हैं। इतना ही नहीं चार बच्चे ऐसे भी रहे, जिन्होंने ओपन स्कूल से दसवीं कक्षा पास की। इसके अलावा इस स्कूल के बच्चे नेशनल लेवल पर भी खेलों में अपनी पहचान बना रहे हैं।
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स्पेशल बच्चों के लिए यह स्कूल साल 2014 में दो बच्चों से शुरू हुआ था। स्कूल में आज ऐसे बच्चों की संख्या 75 तक पहुंच चुकी है। आगे कई प्रोजेक्ट लाए जा रहे हैं, जबकि कुछ बच्चे प्राइवेट स्कूल में मेन स्ट्रीम में पढ़ रहे हैं। कुछ ने ओपन स्कूल से दसवीं भी की है। बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। रक्षामंत्री भी स्कूल को सम्मानित कर चुकी हैं। अभिभावकों का भरोसा है कि वे अपने बच्चों को स्कूल तक लाते हैं।
- यशपाल, प्रिंसिपल वात्सल्य स्कूल फॉर स्पेशल चिल्ड्रन
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