चार बड़ी समस्याओं पर ‘चार कदम’ चले प्रशासन तो बने बात
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
शहरवासी चार मुख्य समस्याओं से परेशान हैं, ऐसा नहीं है कि इन समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन या संबंधित विभाग कोई योजना नहीं बनाता लेकिन यह बीच रास्ते ही दम तोड़ती दिखाई दे रही है। योजनाएं शुरू करने के साथ बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। यहीं नहीं कई दिन मेहनत भी की जाती है, लेकिन टारगेट तक पहुंचने से पहले ही सुस्ती के कारण समस्या तो हल हो पाती नहीं जबकि जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा जरूर खर्च हो जाता है। ट्रैफिक, बेपटरी सफाई व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा और लावारिस पशुओं की समस्या से पार पाने के लिए प्रशासन को ‘चार कदम’ यानि टारगेट तक पहुंचने के लिए शिद्दत से मेहनत करनी होगी और दावों को हकीकत में बदलना होगा तभी आम लोग इन समस्याओं से निजात पा सकेंगे। जनता का कहना है कि प्रशासन दावे तो करता है लेकिन हकीकत कोसों दूर होती है। समस्याओं से निजात के लिए दावों को धरातल पर पूरा करना जरूरी है। शहर की चार मुख्य समस्याओं को लेकर प्रशासन के क्या रहे प्रयास, कहां हुए फेल पर पेश है एक रिपोर्ट।
सफाई व्यवस्था : करोड़ों के प्रोजेक्ट में काम कम, विवाद ज्यादा
जुलाई में शुरू हुए मिशन ओये (ओपन योअर आइज) से लोगों को उम्मीद थी कि तीन महीने में गंदगी से कुछ राहत मिलेगी। उल्लेखनीय है कि स्वच्छता को लेकर देश भर में हुए सर्वे में अंबाला सदर को देश में जहां 308वां स्थान मिला, वहीं प्रदेश में 13वें स्थान पर रहा। इसके कुछ समय बाद जिला प्रशासन ने मिशन ओय के तहत निगम क्षेत्र को साफ करने की तैयारी की। दावा किया गया था कि तीन माह में लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट में सिर्फ विवाद ही साथ रहे, जबकि अधिकतर समय जागरूकता में निकला, जिसका कोई रिजल्ट हाथ नहीं आया। ट्विन सिटी के 20 वार्डों में डंपिंग प्वाइंट बनाकर हालत बदतर कर दी गई। पटवी स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट से कोई मदद नहीं मिली, जबकि इसी पर लोगों ने भी सवाल उठा दिए।
कहां चूके
- मॉनीटरिंग को लेकर पहले तैयारी नहीं हो पाई
- किन क्षेत्रों में कितने कर्मचारी कूड़ा उठाएंगे, इस पर नजर नहीं रही
- योजना में 1.25 लाख घरों को यूनिक आईडी नंबर अलाट नहीं हुए
- सफाई के बिल उन घरों को भेजे, जहां से कूड़ा उठा नहीं
- कूड़ा फैलाने वालों पर कार्रवाई की तैयारी क्यों नहीं की गई
यह योजनाएं जो हो चुकी फेल
- रात के समय ट्विन सिटी के बाजारों को साफ करने की योजना धराशायी
- सुलभ शौचालय से कुछ माह के लिए हुआ टाइअप पर सवाल उठे
- डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन में हुए घपला, जिस पर निगम में जांच हुई
- पार्षदों से उनके वार्ड में कितने सफाईकर्मी चाहिए, लिस्ट मांगी लेकिन बात नहीं बनी
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट कुछ माह के बाद बंद हो गया, जिसका फायदा नहीं मिला
- प्लांट के लिए मंगवाई गई करोड़ों रुपये की मशीनरी बर्बाद हो गई
ट्रैफिक : रोड पर सिर्फ जाम, पीली पट्टी न ट्रैफिक लाइट
सड़कों पर जाम से जनता परेशान है। हालात यह है कि जहां 10 मिनट का समय लगता है, वहां पहुंचने में कई बार दोगुना समय लग जाता है। हालात इतने खराब हैं कि सड़कें गलियों में बदल चुकी हैं और आवाजाही काफी मुश्किल भरी है। शायद ही कोई सड़क हो, जहां पर जाम के हालात न हों। ट्विन सिटी की सड़कों पर तमाम योजनाएं दम तोड़ चुकी हैं, लेकिन हालात नहीं बदले। पीली पट्टी से लेकर पार्किंग योजनाएं लाई गईं, लेकिन हालात नहीं बदलते। इसका सबसे बड़ा कारण दुकानदारों का अतिक्रमण है, जो आज तक नहीं हट पाया। इसके अलावा शहर में ट्रैफिक लाइट व्यवस्था भी दम तोड़ चुकी है। शायद ही कोई ऐसा चौक चौराहा हो जहां पर ट्रैफिक लाइट सुचारू रूप से चल रही हों। कहीं पर लाइट ही नहीं है तो कहीं पर लाइटें बंद पड़ी है। नतीजन और मजबूरन लोग जहां जब समय मिले निकल लेते हैं।
कहां चूके
- सड़कों के किनारे से पीली पट्टी ही गायब हो चुकी है
- सार्वजनिक पार्किंग देने के बावजूद वाहन चालक भीड़ वाले इलाके में वाहन लेकर आते हैं
- बाजारों में जो मार्किंग वाहन खड़े करने के लिए है, वहां पर दुकानदारों का अतिक्रमण है
- गलत दिशा में वाहन चलाने के कारण कई बार सड़कों पर जाम लगता है
-ट्रैफिक लाइट व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं है।
यह योजनाएं जो हो चुकी फेल
-पुलिस द्वारा गलत पार्किंग के लिए ई-चालान शुरू किए गए, जिसका असर नहीं
- क्रेन के जरिये वाहनों को उठाने की योजना भी कामयाब नहीं
- ट्रैफिक लाइट्स का सिस्टम ही कभी दुरुस्त नहीं हो पाया
- हाइवे पर बनाए गए रोड कट (लोगों द्वारा बनाए) भी बंद नहीं हो पाए
- पार्किंग में प्रशासन द्वारा चौकीदार नहीं रखा गया, जिसके चलते वाहन चालक वाहन नहीं खड़ा करते
लावारिस पशु : सिर्फ कहने को ही कैटल फ्री
सड़कों पर घूम रहे लावारिस जानवर जनता के लिए जान का खतरा बने हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे। नगर निगम ने ट्विन सिटी को लावारिस पशुओं से मुक्त घोषित तो कर दिया, लेकिन समस्याएं जस की तस हैं। सड़कों पर लावारिस जानवर घूम रहे हैं, जबकि प्रशासन के पास सिर्फ दावों के अलावा कुछ नहीं है। तमाम हादसों के बावजूद प्रशासन इससे कोई सबक नहीं सीख रहा, जबकि जनता के लिए हालात कुछ भी नहीं बदले हैं। डॉग बाइट के केस भी लगातार हो रहे हैं, जबकि लावारिस डॉग की समस्या पर आज तक काबू नहीं पाया गया है। प्रशासन ने टंगैल में नंदीशाला भी बनाई थी जिसमें आज लगभग 450 गोवंश है। लेकिन पिछले दो-तीन दिनों में वहां के हालात क्या है यह किसी से छुपे नहीं है। प्रशासन की अनदेखी से नाराज नंदीशाला कमेटी प्रशासन को चाबी तक सौंप चुकी है।
कहां चूके
- जिन पशुपालकों के पशु सड़कों पर हैं, उन पर नियमित कार्रवाई नहीं होती
-शहर में लावारिस पशुओं को पकड़ने में गंभीरता नहीं
- लावारिस पशु रखने के लिए प्रशासन के पास पूरी व्यवस्था नहीं है
- यदि लावारिस पशु के कारण हादसा हो तो इसकी जिम्मेदारी भी तय नहीं है
-नंदीशाला तो बनवाई पर वहां भी अनदेखी
ये योजनाएं जो हो चुकी फेल
- पशुपालकों पर जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया, असर नहीं
- गौशालाओं और नंदीशाला के साथ टाइअप किया गया, हालात नहीं बदले
- स्ट्रे डॉग्स पर शिकंजा कसने के लिए कई बार योजना बनाने की बात, पर काम नहीं
- लावारिस पशुओं को संभालने के लिए बनी व्यवस्थाओं ने भी तोड़ा दम
-धुंध में लावारिस पशुओं की वजह से हादसों से बचाव के उपाय नहीं
स्वास्थ्य सेवा : भीड़ बढ़ी, सुविधाएं नहीं
जिला के तीन सिविल अस्पतालों में अव्यवस्थाओं का आलम है, जबकि स्टाफ की कमी के कारण मरीज परेशान हैं। अंबाला सिटी सिविल अस्पताल की ओपीडी में रोजाना सैकड़ों की संख्या में मरीज घंटों लाइनों में लगने के बाद इलाज पाते हैं। इसके साथ ही ट्रॉमा सेंटर में भी व्यवस्थाएं अधूरी हैं, जिसके चलते मरीजों को रेफर किया जाता है। यही हालात अंबाला कैंट सिविल अस्पताल के हैं जहां पर ओपीडी बढ़ गई, लेकिन स्टाफ की कमी से मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। एडवांस मेडिकल सुविधाओं के लिए मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो बुरे हालात हैं, जहां पर मरीज सरकारी अस्पताल की बजाए निजी अस्पताल में जाना पसंद करते हैं। गत दिनों संदिग्ध बुखार की चपेट में भी सैकड़ों लोग आए, विभाग को गांवों में स्वास्थ्य शिविर तक लगाना पड़ा।
कहां चूके
- कई साल गुजर गए, लेकिन सिविल अस्पतालों में स्टाफ की कमी नहीं पूरी कर पाए
- सिविल अस्पताल में एडवांस मेडिकल लैब टेस्ट की सुविधा नहीं
- एमआरआई, सिटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड के लिए मरीज निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर
- ट्रॉमा सेंटर में सुविधाएं न होने के कारण मरीजों को रेफर करने की मजबूरी
- प्राइवेट चिकित्सकों से पूर्व में टाइअप किया गया, कोई फायदा नहीं हुआ
जो भी समस्याएं आज जनता मुख्य रूप से झेल रही हैं, वह एक या दो दिन में खड़ी नहीं हुई हैं। यदि इन समस्याओं का हल करने के लिए योजनाएं ठीक से लागू की जाती और उनकी मॉनिटरिंग होती, तो नई योजनाओं पर रुपया बर्बाद करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। न तो मिशन ओये से कोई फायदा हुआ और न ही लावारिस जानवर सड़कों से हटे हैं। -आनंद मोहन शुक्ला, अंबाला
सिर्फ कागजों में दावे किए जा रहे हैं, जबकि हकीकत में समस्याएं वहीं हैं, बल्कि बढ़ गई हैं। अब निगम ने सफाई के बिल भेज दिए हैं, जबकि कूड़ा कर्कट उठता नहीं हैं। इससे तो साफ दिख रहा है कि जमीनी स्तर पर मॉनीटरिंग ही नहीं हो रही है। जब मॉनीटरिंग नहीं होगी, योजना शायद ही कामयाब हो सके। - बृजभूषण गुप्ता, महेश नगर
योजना यदि शुरू की जाती है, तो उसके लिए पूरी प्लानिंग और संसाधन जुटाने चाहिए, ताकि इसके बेअसर होने का सवाल न हो। सरकारी अस्पताल में हालात ज्यादा नहीं सुधरे, जबकि परेशानियां बढ़ी हैं। इसी तरह सड़कों पर यदि आप वाहन लेकर आए हैं, तो जगह तलाशनी पड़ती है, कहां पर वाहन खड़ा करें। दूसरा हर बाजार में जाम की स्थिति है। - एडवोकेट रविंदर कुमार, अंबाला कैंट
लावारिस जानवरों की समस्या आज तक नहीं सुलझ पाई, जबकि कइयों की इन जानवरों के कारण हुए हादसों में जान चली गई और कई घायल भी हुए हैं। योजनाएं बनाई जाती हैं, कुछ दिन काम होता है और फिर वही हालात बन जाते हैं। योजनाओं से जब राहत ही नहीं मिलती, तो कमी कहां है, इस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जाता। - कुमार प्रशांत, अंबाला कैंट
सफाई को लेकर कहीं परेशानी है तो निगम की जानकारी में लाई जाए। यह समस्या हल की जाएगी और सफाई व्यवस्था नियमित होगी। जनता भी इस मामले में थोड़ा सहयोग करे।
- सत्येंद्र दूहन, आयुक्त, नगर निगम
ट्रैफिक को लेकर प्लानिंग बनाई गई है, जिसे जल्द ही अमलीजामा पहनाया जाएगा। जगह-जगह नए बैरिकेट्स लगाए जाएंगे, जबकि रोड सेफ्टी के लिए सर्वे भी हो रहा है। ट्रैफिक पुलिस नियम तोड़ने वालों के चालान भी कर रही है। - प्रमोद कुमार, डीएसपी ट्रैफिक अंबाला