अंबाला सिटी। सरकारी कार्यालयों की ओर से बिना कारण लोगों को परेशान करना आम हो गया है। मगर ऐसे लोग जब लोक अदालत तक अपने मामलों को लेकर जाते हैं तो निश्चित तौर पर उन्हें न्याय मिलता है।
एक ऐसे ही मामले में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के अधिकारियों पर एनओसी देने में आनाकानी करने पर लोक अदालत ने 20 हजार रुपये पीड़ित को मुआवजा व मुकदमे का खर्चा देने के आदेश सुनाए हैं। इतना ही नहीं बल्कि कोर्ट ने यह भी कहा है कि जब तक पीड़िता को एनओसी नहीं मिल जाती है तब तक 200 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
दरअसल नारायणगढ़ के गांव बरोली निवासी शकुंतला देवी ने वर्ष 2018 में स्थाई लोक अदालत में एस्टेट ऑफिसर एचएसवीपी और नीलम देवी के खिलाफ वाद दायर किया था। जिसमें बताया गया था कि पूर्व में वह अपना प्लॉट नीलम देवी को बेचना चाहते थे, जिसके लिए उन्होंने एचएसवीपी कार्यालय से एनओसी ली थी। मगर किसी कारण से वह अपना प्लॉट संबंधित पार्टी को नहीं बेच सके। ऐसे में उन्होंने जो विभाग से एनओसी ली थी उसका 90 दिन का समय निकल गया।
इसके बाद में जब पीड़िता अपने प्लॉट को परिवार में ही ट्रांसफर करने के लिए गई तो विभाग ने उन्होंने एनओसी देने से मना कर दिया। इसके पीछे तर्क दिया गया कि जिसको पहले वह प्लॉट बेचना चाहते थे उन्होंने अर्जी दी है कि प्लॉट मालिक को एनओसी न दी जाए। विभाग ने पीड़िता के कई चक्कर कटाए।
ऐसे में पीड़िता ने स्थाई लोक अदालत में मामले की अर्जी दी। इसके बाद लोक अदालत में सुनवाई हुई और अब अदालत ने पीड़िता के पक्ष में फैसला सुनाया है। इसमें एचएसवीपी के अधिकारियों को 20 हजार रुपये पीड़ित को देने के निर्देश दिए हैं। वहीं, 200 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से तब तक दिए जाएंगे जब तक नई एनओसी विभाग पीड़िता को नहीं दे देता है।