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एक व्यक्ति के दिए गए रक्त से बचेंगे चार जीवन

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सिविल अस्पताल कैंट में ब्लड बैंक और लिथोट्रिप्सी मशीन का उद्घाटन
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। स्वास्थ्य सेवाओं में कैंट का सिविल अस्पताल में सोमवार से आधुनिक ब्लड बैंक की स्थापना कर दी गई है। वहीं ब्लड बैंक में कंपोनेंट की व्यवस्था की गई है, जिससे एक आदमी का दान किया रक्त चार लोगों के बहुमूल्य जीवन को बचा सकेगा। सिविल अस्पताल में दाखिल मरीजों को निशुल्क रक्त मिलेगा जबकि प्राइवेट अस्पताल संचालक भी यहां से रक्त ले सकेंगे। यानी अब रक्त लेने के लिए कैंट के निवासियों को प्राइवेट ब्लड बैंक या फिर सिटी स्थित सरकारी ब्लड बैंक की ओर दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
सोमवार को मंत्री अनिल विज ने अस्पताल परिसर पर ब्लड बैंक का उद्घाटन किया। इसके अलावा उन्होंने आधुनिक लिथोट्रिप्सी मशीन का भी उद्घाटन किया, जिसके जरिये कम खर्च में पथरी का ऑपरेशन बिना चीर-फाड़ के किया जा सकेगा। उन्होंने दो करोड़ों की लागत से बनने वाली मोर्चरी का भी शिलान्यास किया। मंत्री ने कुल छह करोड़ रुपये की सुविधाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।
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यह खासियत ब्लड बैंक की
- रक्तदानी से खून लेने के बाद उसके रक्त से प्लेटलेट्स, रेड ब्लड सेल, प्लाजमा एवं सामान्य रक्त अलग-अलग रखा जा सकेगा। प्लेटलेट्स को सुरक्षित रखने के लिए मशीन की व्यवस्था की गई है जिसमें पांच दिनों तक प्लेटलेट्स सुरक्षित रखे जा सकेंगे। प्लेटलेट्स डेंगू पीड़ित मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होते हैं। इसी तरह रेड ब्लड सेल खून की कमी को पूरा करते हैं जबकि प्लाजमा का इस्तेमाल बर्न केस में होता है। प्लाजमा सुरक्षित रखने के दो डीप फ्रिजर लगाए गए हैं। इसे पिघलाने के लिए भी एक मशीन की व्यवस्था की गई है। इसी तरह सामान्य ब्लड स्टोर के लिए तीन रेफ्रीजरेटर स्थापित हैं।
- सिविल अस्पताल में भर्ती मरीजों को जरूरत पड़ने पर रक्त के बदले निशुल्क रक्त दिया जाएगा। यदि कोई प्राइवेट अस्पताल या नर्सिंग होम रक्त की मांग करता है तो उसे 1050 रुपये में प्रति यूनिट रक्त दिया जाएगा जबकि रक्त के बदले रक्त लिया जाएगा।
- ब्लड बैंक में 300 यूनिट रक्त रखने की व्यवस्था है जोकि अधिकतम 35 दिन तक है। कैंट सिविल अस्पताल में प्रतिदिन आठ से दस लोग रक्त के लिए आते हैं जिन्हें अब तक करीब 14 किमी. दूर सिटी ब्लड बैंक जाना पड़ता था।
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अभी पुराने स्टाफ पर ही भार, जल्द मिलेगा नया स्टाफ
नए स्थापित ब्लड बैंक के लिए करीब 20 सदस्यों के स्टाफ की जरुरत है। छह तकनिशियन, छह टेक्निकल अधिकारी, छह लैब सहायक, दो स्टाफ नर्स एवं चार सहायकों की जरुरत है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा एनएचएम का स्टाफ सेंक्शन कर दिया है। मगर जब तक उनकी तैनाती नहीं होती तब तक अस्पताल स्थित लेबोरेटरी स्टाफ ही ब्लड बैंक चलाएगा।
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महज पांच हजार में होगा फ्रांस की लिथोट्रिप्सी मशीन से आपरेशन
पथरी का ऑपरेशन अब बिना चीर-फाड़ सिविल अस्पताल में महज पांच हजार रुपये में होगा। 3.50 करोड़ रुपये की लागत से मशीन स्थापित की गई है। इसके ईएसडब्ल्यूएल (एक्ट्रा कोरपोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी) भी कहा जाता है। शॉक वेव के माध्यम से बिना चीर फाड़ के शरीर में ही पथरी को तोड़ दिया जाता है जोकि बाद में पेशाब के माध्यम से बाहर निकल आती है। प्रदेश में रोहतक मेडिकल कालेज के बाद अंबाला में इसे स्थापित किया गया है। मशीन में पारंगत होने के लिए डॉक्टरों को ट्रेन किया गया है जबकि अतिरिक्त सर्जन की भी जल्द यहां तैनाती होगी।
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