अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। बैडमिंटन के खिलाड़ियों को 13 नवंबर को अंबाला कैंट में 28 साल के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर का बैडमिंटन कोर्ट नसीब होगा। मंडल कमीशन आंदोलन के दौरान आग की भेंट चढ़े कोर्ट के लिए खिलाड़ियों ने काफी लंबा समय इंतजार किया है। इस दौरान बैडमिंटन खेल में एक दो पीढ़ियां आगे बढ़ चुकी हैं। अब उम्मीद बंधी है कि इस खेल में अंबाला से नेशनल ही नहीं इंटरनेशनल लेवल के खिलाड़ी भी निकल सकेंगे। अंबाला कैंट में तत्कालीन नगर परिषद में खिलाड़ियों के लिए बैडमिंटन कोर्ट बनाया गया था। इस बैडमिंटन कोर्ट में अंबाला कैंट के खिलाड़ी रोजाना अभ्यास किया करते थे। काफी लंबे समय तक नगर परिषद में यह सुविधा रही और इसे ठीक से मेनटेन भी किया गया। लेकिन साल 1990 में मंडल कमीशन आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने इस बैडमिंटन कोर्ट को आग की भेंट चढ़ा दिया। इसके बाद अधिकारियों ने इस बैडमिंटन कोर्ट की सुध नहीं ली और यह खंडहर में बदल गया। वर्तमान में इस जगह पर नगर परिषद के कंडम सामान रखे जाते हैं। नगर परिषद द्वारा इस के दोबारा निर्माण के लिए कभी प्रोजेक्ट ही तैयार नहीं किया।
नौ साल से चल रहा था प्रोजेक्ट
सुभाष पार्क के पास बैडमिंटन कोर्ट बनाने का मामला करीब नौ साल से चल रहा था। साल 2009 में बैडमिंटन कोर्ट बनाने के लिए प्रोजेक्ट बनाकर प्रशासन के पास भेजा गया था। लेकिन इसके बाद मामला करीब तीन साल तक लटकता रहा। साल 2012 के आसपास सुभाष पार्क के पास जगह को बैडमिंटन कोर्ट बनाने के लिए फाइनल किया गया, जिसके बाद बजट भी अलॉट किया गया था। इसके बाद से यह मामला लटकता गया, जबकि बाद में इसका बजट खेल मंत्री अनिल विज ने 1.57 करोड़ से 4.54 करोड़ रुपये कर दिया।
यह कहते हैं खिलाड़ी
बैडमिंटन खिलाड़ी रहे लक्ष्यवीर शुक्ला, दीपक रस्तोगी, रवि पॉल, रामकुमार का कहना है कि कैंट में बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए कोर्ट ही नहीं था। इसी कारण खिलाड़ियों को अभ्यास करने में भी दिक्कतें आती रही हैं। जो भी बैडमिंटन प्रतियोगिताएं होती रही, वे भी उधार के कोर्ट पर ही हुईं। अब कम से कम बैडमिंटन कोर्ट मिलने के बाद अंबाला से भी बेहतरीन खिलाड़ियों के सामने आने की संभावनाएं बढ़ी हैं।