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करनाल से आए गोताखोरों ने नदी में रेत में चार फुट नीचे दबा शव निकाला, पोस्टमार्टम कराकर वारिसों को सौंपा

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चार फुट नीचे रेत में दबा था अंकुश का शव
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अमर उजाला ब्यूरो
मुलाना। चार दिन पहले मारकंडा नदी में डूबे अंकुश का शव करनाल से आए गोताखोरों की टीम ने निकाल लिया। बीते दिनों से स्थानीय गोताखोर शव की तलाश में जुटे थे, लेकिन शव नहीं मिल रहा था। रविवार को अंकुश का शव करनाल से चार हेडकांस्टेबल की टीम ने खोज निकाला। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया। बीते वीरवार को नारायणगढ़ खंड के गांव जौली निवासी अंकुश अपने दोस्त गौरव एवं मलकीत उर्फ लाली के साथ बराड़ा आया था। जब वे वापस आ रहे थे तो वे तीनों मुलाना-झाडू़माजरा मार्ग पर बने मारकंडा नदी के पुल के पास नदी में नहाने लगे। इस दौरान गहरे पानी में जाने से अंकुश डूबने लगा । उसके दोस्त मलकीत व गौरव को तैरना न आने के कारण उसे पानी से नहीं निकाल सके और अंकुश डूब गया।
मारकंडा नदी से बदबू आई तो उसी के सहारे सभी गोताखोर एक जगह पर ही सर्च अभियान में जुट गए। इसके बाद करीब चार फुट रेत हटाने के बाद अंकुश का शव मिला। हालांकि गोताखोर शुक्रवार से मारकंडा नदी में सर्च अभियान चला रहे थे। इसे राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल करनाल के चार हेड कांस्टेबल कृष्ण कुमार, फतेह सिंह, राजेश कुमार, जगतार सिंह की टीम ने शव को बाहर निकाला। इसके बाद पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया, जिसका जौली गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया है ।
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एक किलोमीटर तक बह गया था शव
पानी के बहाव में अंकुश का शव घटनास्थल से लगभग एक किलोमीटर आगे तक बह गया, जहां वह रेत में दब चुका था। सर्च अभियान एक दिन बाद शुरू होने के कारण अंकुश के शव पर नदी में रेत की परत मोटी होती गई, जिससे गोताखोरों को दो दिन सर्च अभियान के दौरान शव का कोई सुराग हाथ नहीं लगा। गोताखोर हेड कांस्टेबल राजेश ने बताया कि नदी में जहां से अंकुश का शव मिला है वहां पानी की गहराई केवल तीन फुट के लगभग थी, लेकिन शव लगभग चार फुट रेत के नीचे दबा हुआ था। बता दें कि शुक्रवार को अंकुश को ढूंढने आए उसके दोस्त साहिल की भी नदी में डूबने के कारण मौत हो गई थी, जिसका शव भी लगभग उसी जगह से मिला था, जहां से रविवार को अंकुश का शव मिला है।

सेना में भर्ती होना चाहता था अंकुश
अंकुश अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था। बेटे के शव को देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था वहीं तीन दिनों के भीतर गांव जौली में दूसरी मौत होने के कारण मातम पसरा हुआ है। अंकुश के चाचा दर्शन सिंह ने बताया कि अंकुश भारतीय सेना में भर्ती होना चाहता था। पिछली भर्ती में वह लिखित परीक्षा में उतीर्ण न होने कारण सेना भर्ती से वंचित रह गया था, लेकिन उसके बाद से ही वह सेना भर्ती को अपना लक्ष्य बनाकर तैयारी कर रहा था ।
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दोस्त ने भी गंवाई जान
गौरव व मलकीत ने अपने गांव जौली में जाकर अंकुश के परिजनों को भी अंकुश के मारकंडा नदी में डूबने की बात नहीं बताई थी। शुक्रवार को गौरव व मलकीत ने इस हादसे के बारे में अपने एक दूसरे दोस्त साहिल को बताया, तो उनकी बात सुनकर साहिल मारकंडा नदी पर पहुंचा और अंकुश को ढूंढने लगा। काफी देर तक तो साहिल अंकुश को तलाशता रहा था लेकिन अचानक से साहिल भी पानी में डूबने लगा। इस दौरान साहिल को डूबता देखकर साहिल के साथियों ने शोर मचाना शुरू कर दिया था। तभी वहां मौजूद ग्रामीणों ने आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद साहिल को जीवित अवस्था में ही मारकंडा नदी से बाहर निकाल लिया लेकिन उसने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

रविवार दोपहर को अंकुश का शव मारकंडा नदी से निकाल लिया गया है। शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है।
- सुधीर तनेजा, डीएसपी बराड़ा।
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