मंत्री जी! कृषि उपनिदेशक ने पहले भी बजट का किया था दुरुपयोग, कोर्ट से स्टे लेकर दोबारा आ गए
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। कृषि विभाग के कर्मचारी और अधिकारी शनिवार को स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री अनिल विज से उनके निवास पर मिले। उन्होंने कृषि उपनिदेशक पर शोषण करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अधिकारी जब 2014-15 में अंबाला में कार्यरत थे, उस समय भी उन्होंने शोषण किया और बजट के रुपयों का दुरुपयोग किया। एक आरोप में उनका कोर्ट में केस भी चल रहा है जिसका स्टे लेकर वह इस पोस्ट पर दोबारा आ गए। दोबारा से उन्होंने धमकाना शुरू कर दिया है। वहीं मंत्री ने जांच का आश्वासन दिया है।
उन्होंने मंत्री को बताया कि सीआरएम स्कीम के अंतर्गत 10 हजार रुपये सरकार द्वारा दिए जाते हैं। इससे पूर्व मीटिंग में कर्मचारियों व उपनिदेशक ने बिना किसी वित्तीय सहायता के कैंप लगाने का निर्णय लिया था, लेकिन बिना किसी निर्देश के 15 सितंबर को कर्मचारियों के खातों में 2500 रुपये प्रति कैंप के हिसाब से उनके अकाउंट में डाल दिए गए। साथ ही रुपयों को खर्च कर उनके बिलों को जमा करवाने का दबाव बनाया गया। ऐसा न करने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी। उन्होंने मंत्री को बताया कि एटीएम और बीटीएम स्टाफ की ओर से एक साल की सेक्शन होती है, जिसके बाद वार्षिक रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसको खराब करते हुए उन्हें नौकरी से हटाने के बारे में कहा गया।
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विशेष व्यक्ति से लेनदेन का लगाया आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि उपनिदेशक अपने विशेष व्यक्ति से लेनदेन का कार्य करवाते हैं, जिस कारण शहजादपुर में मेले में भी 1500 किसानों के लिए खाने की खराब व्यवस्था की गई थी और पानी की व्यवस्था नहीं की गई। बाद में कर्मचारियों पर ही खराब खाने का आरोप जड़ दिया। उन्होंने मंत्री से जल्द उप निदेशक के तबादले की मांग की और अधिकारी द्वारा किए गए भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच करने की गुहार लगाई गई। विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने बताया कि वह इसको लेकर कृषि मंत्री को शिकायत सौंपते हुए अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गुहार लगाएंगे।
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मेरिट के आधार पर चुनने के बाद भी नहीं दी सब्सिडी
किसान अजय कुमार ने बताया कि उन्हें कृषि विभाग अंबाला द्वारा मेरिट के अधार पर कृषि यंत्र खरीदने के लिए चुना गया था। इसकी उन्होंने खरीद कर ली और बिल भी जमा करवा दिए। इसके बाद उनके घर पर यंत्रों की सब्सिडी रद का नोटिस दे दिया गया। इसके बाद फोन कर कहा गया कि सब्सिडी पाने के लिए 54 हजार रुपये जमा करवाने होंगे। मना करने पर वह उनकी सब्सिडी कैंसल कर देते हैं। इसके साथ ही उन्होंने अन्य आरोप भी लगाते हुए मंत्री से गुहार लगाई।