अंबाला सिटी। अंबाला प्रदेश का ऐसा पहला जिला बन गया है, जिसके शहरी क्षेत्र में नगर निगम और नगर परिषद दोनों ही होंगे। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में इस निर्णय पर मोहर लगाई गई है। जल्द ही अब सरकार इसकी अधिसूचना जारी करेगी, जिसके बाद ट्विन सिटी में नए सिरे से वार्डबंदी होगी। सरकार द्वारा सिटी जोन को नगर निगम और कैंट जोन को नगर परिषद बनाने की घोषणा की गई है। बीते वर्ष कांग्रेस पार्षद ने सरकार के अंबाला नगर निगम को भंग करने के मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर अलगी सुनवाई सात अगस्त को होनी है। मगर इस सुनवाई से पहले ही सरकार ने इसका तोड़ सूझबूझ से निकालते हुए निगम और परिषद दोनों को बरकरार रखा है।
जीटी बेल्ट व चंडीगढ़ रोड बेल्ट के यह 12 गांव जुड़ेंगे
पूर्व में अंबाला सिटी और कैंट विधानसभा क्षेत्र को जोड़कर अंबाला नगर निगम का गठन किया गया था। नगर निगम में आसपास क्षेत्र के 26 गांव जोड़े गए थे, जिनमें 18 गांव कैंट और शेष गांव सिटी जोन में थे। अब सिटी जोन में नगर निगम को बरकरार रखा गया है। सिटी जोन में जनसंख्या और क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए 12 गांवों को जोड़ा गया है जोकि जीटी रोड और चंडीगढ़ एक्सप्रेस हाईवे बेल्ट के आसपास स्थित हैं। इनमें गांव डंगडेरी, डडियाना, कौलां, मानकपुर, लोहगढ़, छोटी घेल, बड़ी घेल, सद्दोपुर, देवी नगर, कालो माजरा, लहारसा, सुलतानपुर शामिल हैं। इन गांवों को जोड़ने के बाद सिटी निगम की आबादी तीन लाख से पार पहुंच जाएगी और निगम के लिए यह होना जरूरी है। क्षेत्रफल बढ़ जाने से सिटी में करीब 20 वार्ड भी बनने तय हैं।
कैंट परिषद में 18 गांव रहेंगे 34 से ज्यादा वार्ड होंगे
अंबाला कैंट में नगर निगम को भंग करके अब नगर परिषद बनाने की घोषणा की गई है। कैंट नगर परिषद में इस समय शहरी क्षेत्र के अलावा 18 गांव भी शामिल, जिनमें रामगढ़, बब्याल, चंदपुरा, रामपुर, सरसेहड़ी, खोजकीपुर, सलारहेड़ी, मच्छौंडा, शाहपुर, नन्हेड़ा, करधान, नग्गल, घसीटपुर, टुंडला, कलेहड़ी, बोह आदि शामिल हैं। पूर्व में जब यह गांव नगर परिषद में नहीं थे तो परिषद के 30 वार्ड थे। मगर वर्ष 2010 में निगम बनने पर 18 गांव शामिल हुए और अब नगर परिषद में इन गांवों का रकबा जुड़ने के बाद कैंट नगर परिषद में 34 वार्ड होने की संभावना है। बता दें कि निगम क्षेत्र में वार्डों का क्षेत्रफल बड़ा होता है जबकि परिषद में कम होता है।
फरवरी 2018 में भंग किया था अंबाला नगर निगम
फरवरी 2018 में भाजपा सरकार ने अंबाला नगर निगम को भंग कर नगर परिषद गठन करने का निर्णय लिया था। मगर इस निर्णय को कांग्रेस पार्षदों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट की डबल बेंच मामले को लेकर अभी सुनवाई कर रही है, जिसपर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। इसी बीच कानूनी दांव पेंच के जरिये सरकार ने अब अंबाला में निगम भी बरकरार रखा है जबकि इसको भंग भी कर दिया है। ऐसे में आगामी दिनों में हाईकोर्ट का निर्णय सरकार के पक्ष में हो सकता है, क्योंकि कांग्रेस पार्षदों द्वारा दायर याचिका का मुख्य आधार ही निगम भंग करने के विरोध में था। मगर अब अंबाला में निगम बरकरार है जबकि एक क्षेत्र को इससे अलग कर दिया गया है।
मंत्री विज नहीं चाहते थे नगर निगम
अंबाला सिटी और कैंट का क्षेत्र अलग-अलग है। पूर्व में दोनों विधानसभा क्षेत्रों में नगर परिषद कार्यालय थे, जिनकी दूरी करीब 10 से 12 किलोमीटर है जबकि बीच में जीटी रोड गुजरती है। मगर वर्ष 2010 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने परिषद भंग कर नगर निगम गठित कर दी थी। दोनों नगर परिषद को इसमें समायोजित कर एवं 26 गांवों को निगम में जोड़ा गया था। तब भाजपा ने इसका पुरजोर विरोध किया था। मंत्री विज नहीं चाहते थे कि अंबाला में नगर निगम रहे, क्योंकि सिटी व कैंट में दूरी ज्यादा थी। निगम में बेशक फंड ज्यादा है, मगर ढांचा पर्याप्त नहीं था। लोगों को काम कराने के लिए 10 से 12 किमी. दूर अधिकारियों के पास जाना पड़ता था। इसके अलावा कई अन्य छोटी-मोटी परेशानियां भी थीं, जिसको लेकर मंत्री खासकर कैंट में नगर परिषद बनाने के पक्ष में ही थे। इसी को लेकर बीते वर्ष नगर निगम अंबाला को भंग कर दिया था।
कोर्ट केस के कारण यह हो रहा था नुकसान
नगर निगम का कार्यकाल बीते वर्ष जून माह में ही समाप्त हो गया था। इसके उपरांत निगम कमिश्नर को ही प्रशासक नियुक्त किया गया था जोकि कामकाज संभाल रहे थे। प्रदेश में अन्य जिलों में निगम के चुनाव हुए, लेकिन अंबाला निगम का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन होने की वजह से यहां चुनाव नहीं हुए। निगम कमिश्नर एवं प्रशासक ही अब तक कामकाज संभाल रहे हैं। जनता के प्रतिनिधियों की भागीदारी निगम में एक वर्ष से नहीं है, जिस कारण सफाई के अलावा अन्य कई कार्य भी लगातार प्रभावित हो रहे हैं।
अंबाला में नगर निगम का कोई औचित्य ही नहीं है। भूगौलिक दृष्टि से यह संभव नहीं। निगम के नाम पर लोगों को आज भी सिटी और कैंट के बीच धक्के खाने पड़ रहे हैं। अब अंबाला सिटी में निगम रहेगा जबकि कैंट में नगर परिषद, कैबिनेट मीटिंग में यह निर्णय लिया गया है। जल्द अधिसूचना जारी होगी, जिसके बाद वार्डबंदी की जाएगी। हाईकोर्ट को भी मामले की जानकारी दी जाएगी ताकि पूर्व में दायर याचिका को खारिज किया जा सके।
- अनिल विज, स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री, हरियाणा।