अंबाला सिटी। विकास कार्यों की आरटीआई के तहत जानकारी न देने पर हरियाणा सूचना आयोग ने जिले के गांव साहिबपुरा के सरपंच राजबीर और ग्राम सचिव पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इनमें से 10 हजार रुपये ग्राम सचिव नीरज को भरने होंगे। शिकायतकर्ता जितेंद्र सिंह ने बताया कि उसने 12 जून 2018 को गांव के सरपंच से आरटीआई के तहत किए गए विकास कार्यों की जानकारी मांगी थी, जिसका एक साल के अंदर सही जवाब नहीं दिया गया। राज्य सूचना आयोग चंडीगढ़ ने कई बार आरटीआई देने के लिए आदेश जारी किए गए, लेकिन सरंपच व ग्राम सचिव ने कमिश्नर के आदेश को हल्के में लिया और शिकायतकर्ता को सही जानकारी नहीं दी। 4 अप्रैल 2019 को कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद भी सरपंच व ग्राम सचिव ने स्वीकार नहीं किया कि यह मामला उनका है। शिकायत को वह किसी और की ही बताने लगे, जिसके चलते राज्य सूचना आयोग के कमिश्नर ने सरंपच राजबीर पर 15 हजार रुपये और ग्राम सचिव पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
सीएम विंडो की कार्यप्रणाली से नाराज होकर की थी आयोग को शिकायत
सरपंच से विकास कार्यों की सही जानकारी लेने के लिए साहिबपुरा के जितेंद्र सिंह ने सीएम विंडो में शिकायत दी थी। सात रिमाइंडर डालने के बाद भी उसे सही जानकारी नहीं दी गई तो उसने राज्य सूचना आयोग के कार्यालय में शिकायत दर्ज करवाई। सही जांच के बाद राज्य सूचना आयोग के कमीशन ने सरपंच और ग्राम सचिव पर 25 हजार रुपये का जुर्माना किया।
इन विकास कार्यों की मांगी थी जानकारी
गांव में लगाए कूड़ादान बाजार कीमत से ज्यादा रेट पर लगाए गए हैं। गांव में बनाए गए सिमेंट के बैंच की संख्या कितनी है और किस रेट में लगवाए हैं। सरकारी सड़क पर परमिशन से पहले टाइलें लगाई गईं, जबकि परमिशन लेकर टाइलें लगवानी चाहिए थीं, आदि कार्यों पर आरटीआई मांगी गई थी। सरपंच राजबीर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जितेंद्र ने जब-जब आरटीआई मांगी उसका जवाब दिया है। विकास कार्यों में पारदर्शिता बरती गई है।