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दो हजार से ज्यादा इकाइयां, कागजों में सिर्फ 600 फैक्ट्रियां

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दो हजार से ज्यादा इकाइयां, कागजों में सिर्फ 600 फैक्ट्रियां
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। जिले में दो हजार से ज्यादा बड़ी और छोटी फैक्ट्रियां हैं, मगर जिले के श्रम विभाग के पास केवल 600 फैक्ट्रियों का ही रजिस्ट्रेशन है। साफ है कि सैकड़ों फैक्ट्रियां ऐसी हैं, जिनका कोई रिकॉर्ड अभी तक प्रशासन के पास नहीं है। इन फैक्ट्रियों में केमिकल और अन्य ज्वलनशील पदार्थ मौजूद हैं या नहीं, इसकी भी जानकारी प्रशासन तक को नहीं है। ऐसे में कोई भी भयानक हादसा हो सकता है। अंबाला में पूर्व में अग्निकांड के अलग-अलग मामले सामने आ चुके हैं। सोनीपत की पेंट फैक्टरी में लगी आग में हुई मौतों के बाद भी जिला प्रशासन अब तक सक्रिय नहीं हुआ है। गली-मोहल्लों से लेकर अन्य स्थानों तक पर कई छोटी और बड़ी फैक्ट्रियां चल रही हैं। इनमें खतरनाक केमिकल तक का इस्तेमाल हो रहा है। पूर्व में पंजाबी मोहल्ले में ऐसी ही एक फैक्टरी में आग लग चुकी है।
सबसे बड़ी इंडस्ट्री में नहीं आग बुझाने के व्यापक प्रबंध
जगाधरी रोड पर एचएसआईडीसी (हरियाणा स्टेट इंडिस्ट्रल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) में 126 फैक्ट्रियां हैं, मगर आलम यह है कि यहां पर आग बुझाने के व्यापक प्रबंध तक एचएसआईडीसी ने नहीं किए हैं। वर्षों पहले यहां पर बनाए गए वॉटर हाइडेंट्स अब कंडम और बंद हो चुके हैं। यदि कहीं आग लगती है, तो फैक्ट्री मालिक को अपने स्तर पर ही आग बुझाने के प्रयास करने होंगे। फैक्ट्रियों में अग्निशमन यंत्रों और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर श्रम विभाग की टीम निरीक्षण तो करती है, जरूरी कार्रवाई नहीं करती।
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कैंट में एक हजार से ज्यादा साइंस इकाइयां
अकेले अंबाला कैंट में ही एक हजार से ज्यादा साइंस आधारित इकाइयां हैं। इनमें केमिकल से लेकर अन्य ज्वलनशील पदार्थों का उपयोग होता है। इनमें से ज्यादातर इकाइयां श्रम विभाग के पास रजिस्टर्ड ही नहीं हैं। इस कारण इनकी नियमित तौर पर जांच तक नहीं हो रही है। कुछ वर्ष पहले बाजार के बीचों-बीच स्थित पंजाबी मोहल्ले में साइंस फर्म के गोदाम में रखे केमिकल में आग लग गई थी। इस भीषण आग में तीन मंजिला भवन जलकर राख हो गया था। इस मामले के बाद भी प्रशासन नहीं चेता।
ये हैं रजिस्ट्रेशन के नियम
श्रम विभाग के पास केवल वहीं फर्म रजिस्टर्ड होती हैं, जिनमें दस से अधिक श्रमिकों की संख्या होती है। इन्हीं फैक्ट्रियों में ही विभाग फायर सेफ्टी को लेकर निरीक्षण करता है। मगर, अधिकतर फैक्टरी संचालक श्रमिकों की संख्या इससे ज्यादा दिखाते ही नहीं हैं। इस वह कारण विभाग की नजर से बचे रहते हैं। ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि फायर ब्रिगेड या फिर श्रम विभाग अपने स्तर पर सीधा जाकर फैक्ट्रियों में जांच करें। फायर ब्रिगेड केवल एनओसी देने तक ही सीमित है। इतना ही नहीं, श्रम विभाग की सूचि में जो खतरनाक स्तर की फैक्ट्रियां होती हैं, उनमें प्रतिवर्ष निरीक्षण किया जाता है। ऐसी श्रेणी में बड़ी फैक्ट्रियां आती हैं, मगर सामान्य श्रेणी में आने वाली फैक्ट्रियाें में पांच वर्ष में एक बार निरीक्षण का प्रावधान है। निरीक्षण भी औचक नहीं होता। इस वजह से फैक्टरी मालिक पहले से ही सुरक्षा के प्रबंध कर लेता है।
विभाग के पास नहीं पर्याप्त स्टाफ
फैक्ट्रियों पर निगरानी रखने के लिए श्रम विभाग के पास व्यापक स्तर पर स्टाफ तक नहीं है। विभाग के अधिकतर अधिकारियों और कर्मियों को वेल्फेयर स्टाफ में तैनात कर दिया गया है, जबकि सेफ्टी का अलग से स्टाफ होता है। जिले में विभाग के पास केवल 600 फैक्टरी रजिस्टर्ड हैं। इनमें करीब 12 हजार श्रमिक काम कर रहे हैं। हकीकत में यह संख्या कई गुणा ज्यादा है।
पूर्व में अंबाला में हुए भयानक हादसे
अंबाला में पूर्व में कई बड़े हादसे हो चुके हैं। कुछ वर्ष पहले ही खोजकीपुर में साइंस उपकरण बनाने वाली फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था। इसमें एक श्रमिक की मौत हो गई थी, जबकि कई घायल हो गए थे। जांच हुई तो पता चला कि फैक्ट्री गांव में बिना रजिस्ट्रेशन के चल रही थी। इस पर मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद मंडोर गांव में एक पेंट फैक्ट्री में रात में धमाका हो गया था। इससे आसपास के गांवों के लोग सहम गए थ्ज्ञे। इस मामले में भी लापरवाही सामने आई थी और केस दर्ज कराया गया था।
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विभाग समय-समय पर फैक्ट्रियों में निरीक्षण करता है। खामी पाए जाने पर कार्रवाई की जाती है। अंबाला में अभी करीब 600 फैक्ट्रियां रजिस्टर्ड हैं। फायर सेफ्टी को लेकर फैक्ट्रियों का निरीक्षण होता है। अंबाला में आईओसी टर्मिनल सबसे बड़ा तेल का भंडारक है। वहां सुरक्षा के व्यापक इंतजाम हैं। शेष फैक्ट्रियां इंडस्ट्री एरिया और अन्य स्थानों पर हैं।
संजय मलिक, डिप्टी डायरेक्टर, श्रम विभाग, अंबाला।
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